| 301 | सर्वैश्वर्यप्रदातृ | ॐ सर्वैश्वर्यप्रदात्रे नमः। | Om Sarvaishvaryapradatre Namah। | जो सभी प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करने वाले हैं। |
| 302 | सर्वकार्यविधायिन् | ॐ सर्वकार्यविधायिने नमः। | Om Sarvakaryavidhayine Namah। | जो सभी कार्यों को पूर्ण एवं व्यवस्थित करने वाले हैं। |
| 303 | सर्वज्वरविनाश | ॐ सर्वज्वरविनाशाय नमः। | Om Sarvajvaravinashaya Namah। | जो सभी प्रकार के ज्वर और कष्टों का नाश करते हैं। |
| 304 | सर्वरोगापहारिन् | ॐ सर्वरोगापहारिणे नमः। | Om Sarvarogapaharine Namah। | जो सभी रोगों और पीड़ाओं को दूर करने वाले हैं। |
| 305 | सर्वाभिचारहन्तृ | ॐ सर्वाभिचारहन्त्रे नमः। | Om Sarvabhicharahantre Namah। | जो सभी अभिचार एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश करते हैं। |
| 306 | सर्वैश्वर्यविधायिन् | ॐ सर्वैश्वर्यविधायिने नमः। | Om Sarvaishvaryavidhayine Namah। | जो भक्तों को सभी प्रकार का ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। |
| 307 | पिङ्गाक्ष | ॐ पिङ्गाक्षाय नमः। | Om Pingakshaya Namah। | जिनके नेत्र पिंगल वर्ण के और तेजस्वी हैं। |
| 308 | एकशृङ्ग | ॐ एकशृङ्गाय नमः। | Om Ekashringaya Namah। | जो एक दिव्य शृंग के स्वरूप से युक्त हैं। |
| 309 | द्विशृङ्ग | ॐ द्विशृङ्गाय नमः। | Om Dvishringaya Namah। | जो दो दिव्य शृंगों वाले स्वरूप से युक्त हैं। |
| 310 | मरीचि | ॐ मरीचये नमः। | Om Marichaye Namah। | जो दिव्य किरणों और प्रकाश के स्वरूप हैं। |
| 311 | बहुशृङ्ग | ॐ बहुशृङ्गाय नमः। | Om Bahushringaya Namah। | जो अनेक दिव्य शृंगों के स्वरूप हैं। |
| 312 | लिङ्ग | ॐ लिङ्गाय नमः। | Om Lingaya Namah। | जो परम सत्य के दिव्य प्रतीक एवं स्वरूप हैं। |
| 313 | महाशृङ्ग | ॐ महाशृङ्गाय नमः। | Om Mahashringaya Namah। | जो महान दिव्य शृंग वाले हैं। |
| 314 | माङ्गल्य | ॐ माङ्गल्याय नमः। | Om Mangalyaya Namah। | जो मंगल एवं कल्याण प्रदान करने वाले हैं। |
| 315 | मनोज्ञ | ॐ मनोज्ञाय नमः। | Om Manojnaya Namah। | जो अत्यन्त मनोहर एवं आकर्षक हैं। |
| 316 | मन्तव्य | ॐ मन्तव्याय नमः। | Om Mantavyaya Namah। | जो मनन एवं ध्यान करने योग्य परम स्वरूप हैं। |
| 317 | महात्मा | ॐ महात्मने नमः। | Om Mahatmane Namah। | जो महान एवं परम पवित्र आत्मस्वरूप हैं। |
| 318 | महादेव | ॐ महादेवाय नमः। | Om Mahadevaya Namah। | जो महान देव एवं परम पूजनीय हैं। |
| 319 | देव | ॐ देवाय नमः। | Om Devaya Namah। | जो स्वयं परम दिव्य देवता हैं। |
| 320 | मातुलिङ्गधर | ॐ मातुलिङ्गधराय नमः। | Om Matulingadharaya Namah। | जो मातुलिङ्ग फल धारण करने वाले हैं। |
| 321 | महामायाप्रसूत | ॐ महामायाप्रसूताय नमः। | Om Mahamayaprasutaya Namah। | जो महामाया की दिव्य शक्ति से प्रकट होने वाले हैं। |
| 322 | प्रस्तुत | ॐ प्रस्तुताय नमः। | Om Prastutaya Namah। | जो सदैव उपस्थित एवं स्तुति के योग्य हैं। |
| 323 | मायिन् | ॐ मायिने नमः। | Om Mayine Namah। | जो अपनी दिव्य माया के स्वामी हैं। |
| 324 | अनन्त | ॐ अनन्ताय नमः। | Om Anantaya Namah। | जो अनन्त एवं असीम हैं। |
| 325 | अनन्तरूप | ॐ अनन्तरूपाय नमः। | Om Anantarupaya Namah। | जो अनन्त दिव्य रूप धारण करने वाले हैं। |
| 326 | मायिन् | ॐ मायिने नमः। | Om Mayine Namah। | जो दिव्य माया के अधिपति हैं। |
| 327 | जलशायिन् | ॐ जलशायिने नमः। | Om Jalashayine Namah। | जो जल में शयन करने वाले दिव्य स्वरूप हैं। |
| 328 | महोदर | ॐ महोदराय नमः। | Om Mahodaraya Namah। | जिनका उदर विशाल एवं दिव्य है। |
| 329 | मन्द | ॐ मन्दाय नमः। | Om Mandaya Namah। | जो शांत, सौम्य एवं गंभीर स्वरूप वाले हैं। |
| 330 | मदद | ॐ मददाय नमः। | Om Madadaya Namah। | जो भक्तों को आनन्द एवं उत्साह प्रदान करते हैं। |
| 331 | मद | ॐ मदाय नमः। | Om Madaya Namah। | जो दिव्य आनन्द एवं शक्ति के स्वरूप हैं। |
| 332 | मधुकैटभहन्तृ | ॐ मधुकैटभहन्त्रे नमः। | Om Madhukaitabhahantre Namah। | जो मधु और कैटभ असुरों का संहार करने वाले हैं। |
| 333 | माधव | ॐ माधवाय नमः। | Om Madhavaya Namah। | जो भगवान विष्णु के माधव स्वरूप हैं। |
| 334 | मुरारि | ॐ मुरारये नमः। | Om Muraraye Namah। | जो मुर नामक असुर का संहार करने वाले हैं। |
| 335 | महावीर्य | ॐ महावीर्याय नमः। | Om Mahaviryaya Namah। | जो महान शक्ति एवं पराक्रम से युक्त हैं। |
| 336 | धैर्य | ॐ धैर्याय नमः। | Om Dhairyaya Namah। | जो धैर्य एवं दृढ़ता के स्वरूप हैं। |
| 337 | चित्रवीर्य | ॐ चित्रवीर्याय नमः। | Om Chitraviryaya Namah। | जिनका पराक्रम अद्भुत एवं विलक्षण है। |
| 338 | चित्रकूर्म | ॐ चित्रकूर्माय नमः। | Om Chitrakurmaya Namah। | जो अद्भुत कूर्म स्वरूप से सम्बद्ध हैं। |
| 339 | चित्र | ॐ चित्राय नमः। | Om Chitraya Namah। | जो अद्भुत एवं विविध दिव्य रूपों वाले हैं। |
| 340 | चित्रभावन | ॐ चित्रभावने नमः। | Om Chitrabhavane Namah। | जो अद्भुत सृष्टि एवं विविध भावों के रचयिता हैं। |
| 341 | मायातीत | ॐ मायातीताय नमः। | Om Mayatitaya Namah। | जो माया से पूर्णतः परे हैं। |
| 342 | माया | ॐ मायाय नमः। | Om Mayaya Namah। | जो दिव्य माया के परम स्वरूप हैं। |
| 343 | महावीर | ॐ महावीराय नमः। | Om Mahaviraya Namah। | जो महान वीर एवं पराक्रमी हैं। |
| 344 | महातेज | ॐ महातेजाय नमः। | Om Mahatejaya Namah। | जो महान दिव्य तेज से प्रकाशित हैं। |
| 345 | बीज | ॐ बीजाय नमः। | Om Bijaya Namah। | जो सम्पूर्ण सृष्टि के मूल बीज हैं। |
| 346 | तेजोधामन् | ॐ तेजोधाम्ने नमः। | Om Tejodhamne Namah। | जो समस्त तेज के परम धाम हैं। |
| 347 | बीजिन् | ॐ बीजिने नमः। | Om Bijine Namah। | जो सृष्टि के मूल बीज के स्वामी हैं। |
| 348 | तेजोमयनृसिंह | ॐ तेजोमयनृसिंहाय नमः। | Om Tejomayanrisimhaya Namah। | जो पूर्णतः दिव्य तेज से बने नरसिंह स्वरूप हैं। |
| 349 | चित्रभानु | ॐ चित्रभानवे नमः। | Om Chitrabhanave Namah। | जो अद्भुत एवं विविध प्रकाश के स्वरूप हैं। |
| 350 | महादंष्ट्र | ॐ महादंष्ट्राय नमः। | Om Mahadamshtraya Namah। | जिनकी दंष्ट्राएँ अत्यन्त विशाल एवं शक्तिशाली हैं। |
| 351 | तुष्ट | ॐ तुष्टाय नमः। | Om Tushtaya Namah। | जो सदैव संतुष्ट एवं प्रसन्न रहते हैं। |
| 352 | पुष्टिकर | ॐ पुष्टिकराय नमः। | Om Pushtikaraya Namah। | जो स्वास्थ्य, शक्ति एवं समृद्धि प्रदान करते हैं। |
| 353 | शिपिविष्ट | ॐ शिपिविष्टाय नमः। | Om Shipivishtaya Namah। | जो दिव्य प्रकाश में सर्वत्र व्याप्त हैं। |
| 354 | हृष्ट | ॐ हृष्टाय नमः। | Om Hrishtaya Namah। | जो आनन्दित एवं प्रसन्न स्वरूप हैं। |
| 355 | पुष्ट | ॐ पुष्टाय नमः। | Om Pushtaya Namah। | जो पूर्ण शक्ति एवं पोषण के स्वरूप हैं। |
| 356 | परमेष्ठिन् | ॐ परमेष्ठिने नमः। | Om Parameshthine Namah। | जो सर्वोच्च दिव्य पद पर विराजमान हैं। |
| 357 | विशिष्ट | ॐ विशिष्टाय नमः। | Om Vishishtaya Namah। | जो सभी में विशिष्ट एवं श्रेष्ठ हैं। |
| 358 | शिष्ट | ॐ शिष्टाय नमः। | Om Shishtaya Namah। | जो धर्मनिष्ठ एवं सदाचारी स्वरूप हैं। |
| 359 | गरिष्ठ | ॐ गरिष्ठाय नमः। | Om Garishthaya Namah। | जो अत्यन्त महान एवं श्रेष्ठ हैं। |
| 360 | इष्टदायिन् | ॐ इष्टदायिने नमः। | Om Ishtadayine Namah। | जो भक्तों की इच्छित वस्तुएँ प्रदान करते हैं। |
| 361 | ज्येष्ठ | ॐ ज्येष्ठाय नमः। | Om Jyeshthaya Namah। | जो सबसे प्राचीन एवं श्रेष्ठ हैं। |
| 362 | श्रेष्ठ | ॐ श्रेष्ठाय नमः। | Om Shreshthaya Namah। | जो सभी में सर्वोत्तम एवं श्रेष्ठ हैं। |
| 363 | तुष्ट | ॐ तुष्टाय नमः। | Om Tushtaya Namah। | जो पूर्णतः संतुष्ट एवं प्रसन्न हैं। |
| 364 | अमिततेजस् | ॐ अमिततेजसे नमः। | Om Amitatejase Namah। | जिनका तेज असीम एवं अपरिमित है। |
| 365 | अष्टाङ्गव्यस्तरूप | ॐ अष्टाङ्गव्यस्तरूपाय नमः। | Om Ashtangavyastarupaya Namah। | जो अष्टाङ्ग रूप में व्यापक दिव्य स्वरूप वाले हैं। |
| 366 | सर्वदुष्टान्तक | ॐ सर्वदुष्टान्तकाय नमः। | Om Sarvadushtantakaya Namah। | जो सभी दुष्टों एवं अधर्मियों का अंत करते हैं। |
| 367 | वैकुण्ठ | ॐ वैकुण्ठाय नमः। | Om Vaikunthaya Namah। | जो भगवान विष्णु के परम धाम वैकुण्ठ के स्वामी हैं। |
| 368 | विकुण्ठ | ॐ विकुण्ठाय नमः। | Om Vikunthaya Namah। | जो सभी बाधाओं से परे परम दिव्य स्वरूप हैं। |
| 369 | केशिकण्ठ | ॐ केशिकण्ठाय नमः। | Om Keshikanthaya Namah। | जिनका कण्ठ दिव्य एवं शक्तिशाली है। |
| 370 | कण्ठीरव | ॐ कण्ठीरवाय नमः। | Om Kanthiravaya Namah। | जो सिंह के समान प्रचण्ड गर्जना वाले हैं। |
| 371 | लुण्ठ | ॐ लुण्ठाय नमः। | Om Lunthaya Namah। | जो अधर्म एवं बाधाओं का हरण करने वाले हैं। |
| 372 | निश्शठ | ॐ निश्शठाय नमः। | Om Nishshathaya Namah। | जो छल-कपट से रहित एवं दृढ़ स्वरूप हैं। |
| 373 | हठ | ॐ हठाय नमः। | Om Hathaya Namah। | जो अटल शक्ति एवं दृढ़ संकल्प के स्वरूप हैं। |
| 374 | सत्वोद्रिक्त | ॐ सत्वोद्रिक्ताय नमः। | Om Satvodriktaya Namah। | जिनमें दिव्य सत्त्वगुण की प्रबलता है। |
| 375 | रुद्र | ॐ रुद्राय नमः। | Om Rudraya Namah। | जो उग्र एवं अधर्म-विनाशक रुद्र स्वरूप हैं। |
| 376 | ऋग्यजुस्सामग | ॐ ऋग्यजुस्सामगाय नमः। | Om Rigyajussamagaya Namah। | जो ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के स्वरूप एवं ज्ञाता हैं। |
| 377 | ऋतुध्वज | ॐ ऋतुध्वजाय नमः। | Om Ritudhvajaya Namah। | जो ऋतु एवं सत्य के दिव्य ध्वजस्वरूप हैं। |
| 378 | वज्र | ॐ वज्राय नमः। | Om Vajraya Namah। | जो वज्र के समान अजेय एवं शक्तिशाली हैं। |
| 379 | मन्त्रराज | ॐ मन्त्रराजाय नमः। | Om Mantrarajaya Namah। | जो सभी मन्त्रों के राजा एवं परम शक्ति हैं। |
| 380 | मन्त्रिन् | ॐ मन्त्रिणे नमः। | Om Mantrine Namah। | जो मन्त्रों के ज्ञाता एवं स्वामी हैं। |
| 381 | त्रिनेत्र | ॐ त्रिनेत्राय नमः। | Om Trinetraya Namah। | जिनके तीन दिव्य नेत्र हैं। |
| 382 | त्रिवर्ग | ॐ त्रिवर्गाय नमः। | Om Trivargaya Namah। | जो धर्म, अर्थ और काम के आधार हैं। |
| 383 | त्रिधामन् | ॐ त्रिधाम्ने नमः। | Om Tridhamne Namah। | जो तीनों दिव्य धामों के आधार हैं। |
| 384 | त्रिशूलिन् | ॐ त्रिशूलिने नमः। | Om Trishuline Namah। | जो त्रिशूल धारण करने वाले दिव्य स्वरूप हैं। |
| 385 | त्रिकालज्ञानरूप | ॐ त्रिकालज्ञानरूपाय नमः। | Om Trikalajnanarupaya Namah। | जो भूत, वर्तमान और भविष्य का ज्ञान रखने वाले हैं। |
| 386 | त्रिदेह | ॐ त्रिदेहाय नमः। | Om Tridehaya Namah। | जो तीनों प्रकार के दिव्य शरीरों के स्वरूप हैं। |
| 387 | त्रिधात्मा | ॐ त्रिधात्मने नमः। | Om Tridhatmane Namah। | जो तीनfold दिव्य तत्त्वों में आत्मस्वरूप हैं। |
| 388 | त्रिमूर्तिविद्या | ॐ त्रिमूर्तिविद्याय नमः। | Om Trimurtividyaya Namah। | जो त्रिमूर्ति के परम ज्ञान के स्वरूप हैं। |
| 389 | त्रितत्त्वज्ञानी | ॐ त्रितत्त्वज्ञानिने नमः। | Om Tritatvajnanine Namah। | जो तीनों प्रमुख तत्त्वों के परम ज्ञाता हैं। |
| 390 | अक्षोभ्य | ॐ अक्षोभ्याय नमः। | Om Akshobhyaya Namah। | जो कभी विचलित या क्षुब्ध नहीं होते। |
| 391 | अनिरुद्ध | ॐ अनिरुद्धाय नमः। | Om Aniruddhaya Namah। | जो अजेय एवं किसी से रोके न जा सकने वाले हैं। |
| 392 | अप्रमेय | ॐ अप्रमेयाय नमः। | Om Aprameyaya Namah। | जिन्हें किसी सीमा या प्रमाण से मापा नहीं जा सकता। |
| 393 | भानु | ॐ भानवे नमः। | Om Bhanave Namah। | जो सूर्य के समान प्रकाशमान हैं। |
| 394 | अमृत | ॐ अमृताय नमः। | Om Amritaya Namah। | जो अमरत्व एवं अमृत के स्वरूप हैं। |
| 395 | अनन्त | ॐ अनन्ताय नमः। | Om Anantaya Namah। | जो अनन्त एवं असीम हैं। |
| 396 | अमित | ॐ अमिताय नमः। | Om Amitaya Namah। | जो अपरिमित एवं असीम हैं। |
| 397 | आमितौजस् | ॐ आमितौजसे नमः। | Om Amitaujase Namah। | जिनका तेज असीम एवं अपरिमित है। |
| 398 | अपमृत्युविनाश | ॐ अपमृत्युविनाशाय नमः। | Om Apamrityuvinashaya Namah। | जो अकाल मृत्यु का नाश करने वाले हैं। |
| 399 | अपस्मारविघातिन् | ॐ अपस्मारविघातिने नमः। | Om Apasmaravighatine Namah। | जो अपस्मार एवं उससे जुड़े कष्टों का नाश करते हैं। |
| 400 | अन्नद | ॐ अन्नदाय नमः। | Om Annadaya Namah। | जो अन्न एवं जीवन का पोषण प्रदान करते हैं। |
| 401 | अन्नरूप | ॐ अन्नरूपाय नमः। | Om Annarupaya Namah। | जो अन्न के रूप में समस्त प्राणियों का पोषण करते हैं। |
| 402 | अन्न | ॐ अन्नाय नमः। | Om Annaya Namah। | जो स्वयं अन्न एवं जीवन के आधार हैं। |
| 403 | अन्नभुज् | ॐ अन्नभुजे नमः। | Om Annabhuje Namah। | जो अन्न का ग्रहण एवं यज्ञीय अर्पण स्वीकार करते हैं। |
| 404 | नाद्य | ॐ नाद्याय नमः। | Om Nadyaya Namah। | जो दिव्य नाद के माध्यम से अनुभूत होने वाले हैं। |
| 405 | निरवद्य | ॐ निरवद्याय नमः। | Om Niravadyaya Namah। | जो सभी दोषों से पूर्णतः रहित हैं। |
| 406 | विद्या | ॐ विद्याय नमः। | Om Vidyaya Namah। | जो परम ज्ञान एवं विद्या के स्वरूप हैं। |
| 407 | अद्भुतकर्मन् | ॐ अद्भुतकर्मणे नमः। | Om Adbhutakarmane Namah। | जो अद्भुत एवं दिव्य कर्म करने वाले हैं। |
| 408 | सद्योजात | ॐ सद्योजाताय नमः। | Om Sadyojataya Namah। | जो तत्काल प्रकट होने वाले दिव्य स्वरूप हैं। |
| 409 | सङ्घ | ॐ सङ्घाय नमः। | Om Sanghaya Namah। | जो समस्त शक्तियों एवं जीवों के एकत्व के आधार हैं। |
| 410 | वैद्युत | ॐ वैद्युताय नमः। | Om Vaidyutaya Namah। | जो बिजली के समान तेजस्वी एवं प्रकाशमान हैं। |
| 411 | अध्वातीत | ॐ अध्वातीताय नमः। | Om Adhvatitaya Namah। | जो सभी मार्गों एवं सीमाओं से परे हैं। |
| 412 | सत्व | ॐ सत्वाय नमः। | Om Satvaya Namah। | जो शुद्ध सत्त्व एवं पवित्रता के स्वरूप हैं। |
| 413 | वागतीत | ॐ वागतीताय नमः। | Om Vagatitaya Namah। | जो वाणी और शब्दों से परे हैं। |
| 414 | वाग्मिन् | ॐ वाग्मिने नमः। | Om Vagmine Namah। | जो दिव्य वाणी के स्वामी एवं वक्ता हैं। |
| 415 | वागीश्वर | ॐ वागीश्वराय नमः। | Om Vagishvaraya Namah। | जो वाणी के परम ईश्वर हैं। |
| 416 | गोप | ॐ गोपाय नमः। | Om Gopaya Namah। | जो प्राणियों एवं धर्म की रक्षा करने वाले हैं। |
| 417 | गोहित | ॐ गोहिताय नमः। | Om Gohitaya Namah। | जो गौ एवं समस्त प्राणियों के हितकारी हैं। |
| 418 | गवांपति | ॐ गवांपतये नमः। | Om Gavampataye Namah। | जो गौ एवं पृथ्वी के परम स्वामी हैं। |
| 419 | गन्धर्व | ॐ गन्धर्वाय नमः। | Om Gandharvaya Namah। | जो दिव्य संगीत एवं गन्धर्वों से सम्बद्ध हैं। |
| 420 | गभीर | ॐ गभीराय नमः। | Om Gabhiraya Namah। | जो अत्यन्त गम्भीर एवं अगाध स्वरूप वाले हैं। |
| 421 | गर्जित | ॐ गर्जिताय नमः। | Om Garjitaya Namah। | जिनकी गर्जना अत्यन्त शक्तिशाली एवं प्रभावशाली है। |
| 422 | ऊर्जित | ॐ ऊर्जिताय नमः। | Om Urjitaya Namah। | जो महान शक्ति एवं ऊर्जा से युक्त हैं। |
| 423 | पर्जन्य | ॐ पर्जन्याय नमः। | Om Parjanyaya Namah। | जो वर्षा एवं जीवनदायी जल के स्वरूप हैं। |
| 424 | प्रबुद्ध | ॐ प्रबुद्धाय नमः। | Om Prabuddhaya Namah। | जो पूर्णतः जागृत एवं ज्ञानस्वरूप हैं। |
| 425 | प्रधानपुरुष | ॐ प्रधानपुरुषाय नमः। | Om Pradhanapurushaya Namah। | जो प्रकृति एवं पुरुष के परम आधार हैं। |
| 426 | पद्माभ | ॐ पद्माभाय नमः। | Om Padmabhaya Namah। | जिनकी नाभि एवं स्वरूप कमल के समान दिव्य है। |
| 427 | सुनाभ | ॐ सुनाभाय नमः। | Om Sunabhaya Namah। | जिनकी नाभि अत्यन्त सुन्दर एवं दिव्य है। |
| 428 | पद्मनाभ | ॐ पद्मनाभाय नमः। | Om Padmanabhaya Namah। | जिनकी नाभि से कमल का दिव्य प्राकट्य हुआ। |
| 429 | पद्मनाभ | ॐ पद्मनाभाय नमः। | Om Padmanabhaya Namah। | जो कमलनाभ भगवान के दिव्य स्वरूप हैं। |
| 430 | मानी | ॐ मानिने नमः। | Om Manine Namah। | जो दिव्य गौरव एवं सम्मान से युक्त हैं। |
| 431 | पद्मनेत्र | ॐ पद्मनेत्राय नमः। | Om Padmanetraya Namah। | जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं। |
| 432 | पद्म | ॐ पद्माय नमः। | Om Padmaya Namah। | जो कमल के समान पवित्र एवं निर्मल हैं। |
| 433 | पद्मायाःपति | ॐ पद्मायाः पतये नमः। | Om Padmayah Pataye Namah। | जो देवी लक्ष्मी के परम पति एवं स्वामी हैं। |
| 434 | पद्मोदर | ॐ पद्मोदराय नमः। | Om Padmodaraya Namah। | जिनका उदर कमल के समान दिव्य एवं सुन्दर है। |
| 435 | पूत | ॐ पूताय नमः। | Om Putaya Namah। | जो पूर्णतः पवित्र एवं शुद्ध हैं। |
| 436 | पद्मकल्पोद्भव | ॐ पद्मकल्पोद्भवाय नमः। | Om Padmakalpodbhavaya Namah। | जो कमल से उत्पन्न सृष्टि के दिव्य आधार हैं। |
| 437 | हृत्पद्मवास | ॐ हृत्पद्मवासाय नमः। | Om Hritpadmavasaya Namah। | जो भक्तों के हृदय-कमल में निवास करते हैं। |
| 438 | भूपद्मोद्धरण | ॐ भूपद्मोद्धरणाय नमः। | Om Bhupadmoddharanaya Namah। | जो पृथ्वी-कमल का उद्धार एवं संरक्षण करने वाले हैं। |
| 439 | शब्दब्रह्मस्वरूप | ॐ शब्दब्रह्मस्वरूपाय नमः। | Om Shabdabrahmasvarupaya Namah। | जो शब्द-ब्रह्म के परम स्वरूप हैं। |
| 440 | ब्रह्मरूपधर | ॐ ब्रह्मरूपधराय नमः। | Om Brahmarupadharaya Namah। | जो ब्रह्म का दिव्य रूप धारण करने वाले हैं। |
| 441 | ब्रह्मन् | ॐ ब्रह्मणे नमः। | Om Brahmane Namah। | जो परम ब्रह्म के स्वरूप हैं। |
| 442 | ब्रह्मरूप | ॐ ब्रह्मरूपाय नमः। | Om Brahmarupaya Namah। | जो स्वयं ब्रह्म के दिव्य स्वरूप हैं। |
| 443 | पद्मनेत्र | ॐ पद्मनेत्राय नमः। | Om Padmanetraya Namah। | जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं। |
| 444 | ब्रह्मादि | ॐ ब्रह्मादये नमः। | Om Brahmadaye Namah। | जो ब्रह्मा आदि देवताओं के मूल एवं आधार हैं। |
| 445 | ब्राह्मण | ॐ ब्राह्मणाय नमः। | Om Brahmanaya Namah। | जो ब्रह्मविद्या एवं ब्राह्मणत्व के परम स्वरूप हैं। |
| 446 | ब्रह्मन् | ॐ ब्रह्मणे नमः। | Om Brahmane Namah। | जो अनन्त परम ब्रह्म के स्वरूप हैं। |
| 447 | ब्रह्मात्मा | ॐ ब्रह्मात्मने नमः। | Om Brahmatmane Namah। | जो ब्रह्मस्वरूप आत्मा के रूप में स्थित हैं। |
| 448 | सुब्रह्मण्य | ॐ सुब्रह्मण्याय नमः। | Om Subrahmanyaya Namah। | जो परम पवित्र ब्रह्मज्ञान के स्वरूप हैं। |
| 449 | देव | ॐ देवाय नमः। | Om Devaya Namah। | जो परम दिव्य देवता हैं। |
| 450 | ब्रह्मण्य | ॐ ब्रह्मण्याय नमः। | Om Brahmanyaya Namah। | जो ब्रह्म एवं धर्म के परम संरक्षक हैं। |
| 451 | त्रिवेदिन् | ॐ त्रिवेदिने नमः। | Om Trivedine Namah। | जो तीनों वेदों के ज्ञाता हैं। |
| 452 | परब्रह्मस्वरूप | ॐ परब्रह्मस्वरूपाय नमः। | Om Parabrahmasvarupaya Namah। | जो परम ब्रह्म के साक्षात् स्वरूप हैं। |
| 453 | पञ्चब्रह्मात्मा | ॐ पञ्चब्रह्मात्मने नमः। | Om Panchabrahmatmane Namah। | जो पंचब्रह्म के परम आत्मस्वरूप हैं। |
| 454 | ब्रह्मशिरस् | ॐ ब्रह्मशिरसे नमः। | Om Brahmashirase Namah। | जो ब्रह्म के दिव्य मस्तकस्वरूप हैं। |
| 455 | अश्वशिरस् | ॐ अश्वशिरसे नमः। | Om Ashvashirase Namah। | जो अश्व के दिव्य मस्तकस्वरूप से सम्बद्ध हैं। |
| 456 | अधर्वशिरस् | ॐ अधर्वशिरसे नमः। | Om Adharvashirase Namah। | जो अथर्ववेद के दिव्य ज्ञान के स्वरूप हैं। |
| 457 | नित्यमशनिप्रमित | ॐ नित्यमशनिप्रमिताय नमः। | Om Nityamashanipramitaya Namah। | जो नित्य एवं वज्र के समान असीम शक्ति वाले हैं। |
| 458 | तीक्ष्णदंष्ट्र | ॐ तीक्षण दंष्ट्राय नमः। | Om Tikshana Damshtraya Namah। | जिनकी दंष्ट्राएँ अत्यन्त तीक्ष्ण एवं शक्तिशाली हैं। |
| 459 | लोल | ॐ लोलाय नमः। | Om Lolaya Namah। | जो गतिशील एवं चंचल दिव्य शक्ति वाले हैं। |
| 460 | ललित | ॐ ललिताय नमः। | Om Lalitaya Namah। | जो सुन्दर, कोमल एवं मनोहर हैं। |
| 461 | लावण्य | ॐ लावण्याय नमः। | Om Lavanyaya Namah। | जो दिव्य सौन्दर्य एवं लावण्य के स्वरूप हैं। |
| 462 | लवित्र | ॐ लवित्राय नमः। | Om Lavitraya Namah। | जो पवित्र एवं शुद्ध करने वाले हैं। |
| 463 | भासक | ॐ भासकाय नमः। | Om Bhasakaya Namah। | जो प्रकाश प्रदान करने वाले हैं। |
| 464 | लक्षणज्ञ | ॐ लक्षणज्ञाय नमः। | Om Lakshanajnaya Namah। | जो सभी शुभ लक्षणों के ज्ञाता हैं। |
| 465 | लसद्दीप्त | ॐ लसद्दीप्ताय नमः। | Om Lasaddiptaya Namah। | जो चमकते हुए दिव्य तेज से प्रकाशित हैं। |
| 466 | लिप्त | ॐ लिप्ताय नमः। | Om Liptaya Namah। | जो दिव्य शक्ति एवं तेज से आवृत हैं। |
| 467 | विष्णु | ॐ विष्णवे नमः। | Om Vishnave Namah। | जो सर्वव्यापक भगवान विष्णु के स्वरूप हैं। |
| 468 | प्रभविष्णु | ॐ प्रभविष्णवे नमः। | Om Prabhavishnave Namah। | जो महान शक्ति से सर्वत्र व्याप्त हैं। |
| 469 | वृष्णिमूल | ॐ वृष्णिमूलाय नमः। | Om Vrishnimulaya Namah। | जो वृष्णि वंश के मूल एवं परम आधार हैं। |
| 470 | कृष्ण | ॐ कृष्णाय नमः। | Om Krishnaya Namah। | जो भगवान कृष्ण के परम दिव्य स्वरूप हैं। |
| 471 | श्रीमहाविष्णु | ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः। | Om Shrimahavishnave Namah। | जो श्रीमहाविष्णु के परम स्वरूप हैं। |
| 472 | महासिंह | ॐ महासिंहाय नमः। | Om Mahasimhaya Namah। | जो महान एवं प्रचण्ड सिंह स्वरूप वाले हैं। |
| 473 | हारिन् | ॐ हारिणे नमः। | Om Harine Namah। | जो भक्तों के दुःख एवं पाप हर लेते हैं। |
| 474 | वनमालिन् | ॐ वनमालिने नमः। | Om Vanamaline Namah। | जो वनमाला धारण करने वाले हैं। |
| 475 | किरीटिन् | ॐ किरीटिने नमः। | Om Kiritine Namah। | जो दिव्य मुकुट धारण करने वाले हैं। |
| 476 | कुण्डलिन् | ॐ कुण्डलिने नमः। | Om Kundaline Namah। | जो दिव्य कुण्डल धारण करने वाले हैं। |
| 477 | सर्वाङ्ग | ॐ सर्वाङ्गाय नमः। | Om Sarvangaya Namah। | जिनके सभी अंग दिव्य एवं पूर्ण हैं। |
| 478 | सर्वतोमुख | ॐ सर्वतोमुखाय नमः। | Om Sarvatomukhaya Namah। | जिनके मुख सभी दिशाओं में विद्यमान हैं। |
| 479 | सर्वतःपाणिपादोरस् | ॐ सर्वतः पाणिपादोरसे नमः। | Om Sarvatah Panipadorase Namah। | जिनके हाथ, चरण और वक्ष सर्वत्र व्याप्त हैं। |
| 480 | सर्वतोऽक्षिशिरोमुख | ॐ सर्वतोऽक्षिशिरोमुखाय नमः। | Om Sarvatoakshishiromukhaya Namah। | जिनकी आँखें, मस्तक और मुख सभी दिशाओं में हैं। |
| 481 | सर्वेश्वर | ॐ सर्वेश्वराय नमः। | Om Sarveshvaraya Namah। | जो सम्पूर्ण जगत के परमेश्वर हैं। |
| 482 | सदातुष्ट | ॐ सदातुष्टाय नमः। | Om Sadatushtaya Namah। | जो सदैव संतुष्ट एवं प्रसन्न रहते हैं। |
| 483 | समर्थ | ॐ समर्थाय नमः। | Om Samarthaya Namah। | जो सर्वशक्तिमान एवं सभी कार्यों में समर्थ हैं। |
| 484 | समरप्रिय | ॐ समरप्रियाय नमः। | Om Samarapriyaya Namah। | जो धर्म की रक्षा के लिए युद्ध में प्रवृत्त होने वाले हैं। |
| 485 | बहुयोजनविस्तीर्ण | ॐ बहुयोजनविस्तीर्णाय नमः। | Om Bahuyojanavistirnaya Namah। | जिनका दिव्य स्वरूप अनेक योजन तक विस्तृत है। |
| 486 | बहुयोजनमायत | ॐ बहुयोजनमायताय नमः। | Om Bahuyojanamayataya Namah। | जो अत्यन्त विशाल एवं विस्तृत स्वरूप वाले हैं। |
| 487 | बहुयोजनहस्ताङ्घ्रि | ॐ बहुयोजनहस्ताङ्घ्रये नमः। | Om Bahuyojanahastanghraye Namah। | जिनके हाथ और चरण अत्यन्त विशाल एवं व्यापक हैं। |
| 488 | बहुयोजननासिक | ॐ बहुयोजननासिकाय नमः। | Om Bahuyojananasikaya Namah। | जिनकी दिव्य नासिका अत्यन्त विशाल स्वरूप वाली है। |
| 489 | महारूप | ॐ महारूपाय नमः। | Om Maharupaya Namah। | जो महान एवं विराट दिव्य रूप वाले हैं। |
| 490 | महावक्र | ॐ महावक्राय नमः। | Om Mahavakraya Namah। | जिनका दिव्य स्वरूप अत्यन्त प्रभावशाली एवं उग्र है। |
| 491 | महादंष्ट्र | ॐ महादंष्ट्राय नमः। | Om Mahadamshtraya Namah। | जिनकी दंष्ट्राएँ विशाल एवं प्रचण्ड हैं। |
| 492 | महाबल | ॐ महाबलाय नमः। | Om Mahabalaya Namah। | जो अत्यन्त शक्तिशाली एवं बलवान हैं। |
| 493 | महाभुज | ॐ महाभुजाय नमः। | Om Mahabhujaya Namah। | जिनकी भुजाएँ विशाल एवं शक्तिशाली हैं। |
| 494 | महानाद | ॐ महानादाय नमः। | Om Mahanadaya Namah। | जिनका दिव्य नाद अत्यन्त गम्भीर एवं शक्तिशाली है। |
| 495 | महारौद्र | ॐ महारौद्राय नमः। | Om Maharaudraya Namah। | जो अधर्म के विनाश के लिए अत्यन्त उग्र हैं। |
| 496 | महाकाय | ॐ महाकायाय नमः। | Om Mahakayaya Namah। | जिनका दिव्य शरीर अत्यन्त विशाल एवं विराट है। |
| 497 | अनाभेर्ब्रह्मणोरूप | ॐ अनाभेर्ब्रह्मणोरूपाय नमः। | Om Anabherbrahmanorupaya Namah। | जो नाभि से ब्रह्माण्डीय ब्रह्मस्वरूप तक व्याप्त हैं। |
| 498 | आगलाद्वैष्णव | ॐ आगलाद्वैष्णवाय नमः। | Om Agaladvaishnavaya Namah। | जो पूर्णतः वैष्णव दिव्य स्वरूप से युक्त हैं। |
| 499 | आशीर्षाद्रन्ध्रमीशान | ॐ आशीर्षाद्रन्ध्रमीशानाय नमः। | Om Ashirshadrandhramishanaya Namah। | जो मस्तक से समस्त सूक्ष्म मार्गों तक ईशान रूप में व्याप्त हैं। |
| 500 | अग्रेसर्वतश्शिव | ॐ अग्रेसर्वतश्शिवाय नमः। | Om Agresarvatashshivaya Namah। | जो सर्वत्र, सदैव आगे रहने वाले एवं मंगलमय शिवस्वरूप हैं। |