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हरि ॐ तत्सत्
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Sahasranamavali of Lord Narasimha

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✦ AI Summary
No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning1नारसिंहॐ नारसिंहाय नमः।Om Narasimhaya Namah।जो भगवान नरसिंह के दिव्य स्वरूप हैं।2वज्रदंष्ट्रॐ वज्रदंष्ट्राय नमः।Om Vajradamshtraya Namah।जिनके दाँत वज्र के समान कठोर एवं शक्तिशाली हैं।3वज्रीॐ वज्रिणे नमः।Om Vajrine Namah।जो वज्र के समान शक्तिशाली हैं।4वज्रदेहॐ वज्रदेहाय नमः।Om Vajradehaya Namah।जिनका दिव्य शरीर वज्र के समान दृढ़ है।5वज्रॐ वज्राय नमः।Om Vajraya Namah।जो वज्र के समान अजेय एवं शक्तिशाली हैं।6वज्रनखॐ वज्रनखाय नमः।Om Vajranakhaya Namah।जिनके...
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
1नारसिंहॐ नारसिंहाय नमः।Om Narasimhaya Namah।जो भगवान नरसिंह के दिव्य स्वरूप हैं।
2वज्रदंष्ट्रॐ वज्रदंष्ट्राय नमः।Om Vajradamshtraya Namah।जिनके दाँत वज्र के समान कठोर एवं शक्तिशाली हैं।
3वज्रीॐ वज्रिणे नमः।Om Vajrine Namah।जो वज्र के समान शक्तिशाली हैं।
4वज्रदेहॐ वज्रदेहाय नमः।Om Vajradehaya Namah।जिनका दिव्य शरीर वज्र के समान दृढ़ है।
5वज्रॐ वज्राय नमः।Om Vajraya Namah।जो वज्र के समान अजेय एवं शक्तिशाली हैं।
6वज्रनखॐ वज्रनखाय नमः।Om Vajranakhaya Namah।जिनके नख वज्र के समान तीक्ष्ण एवं शक्तिशाली हैं।
7वासुदेवॐ वासुदेवाय नमः।Om Vasudevaya Namah।जो भगवान वासुदेव के परम स्वरूप हैं।
8वन्द्यॐ वन्द्याय नमः।Om Vandyaya Namah।जो सभी देवताओं और भक्तों द्वारा वन्दनीय हैं।
9वरदॐ वरदाय नमः।Om Varadaya Namah।जो भक्तों को वरदान प्रदान करते हैं।
10वरात्माॐ वरात्मने नमः।Om Varatmane Namah।जो श्रेष्ठ एवं दिव्य आत्मस्वरूप हैं।
11वरदाभयहस्तॐ वरदाभयहस्ताय नमः।Om Varadabhayahastaya Namah।जिनके हाथ वरदान और अभय प्रदान करते हैं।
12वरॐ वराय नमः।Om Varaya Namah।जो स्वयं श्रेष्ठ एवं वरण करने योग्य हैं।
13वररूपिन्ॐ वररूपिणे नमः।Om Vararupine Namah।जिनका दिव्य स्वरूप अत्यन्त श्रेष्ठ एवं मनोहर है।
14वरेण्यॐ वरेण्याय नमः।Om Varenyaya Namah।जो सर्वोत्तम एवं पूजनीय हैं।
15वरिष्ठॐ वरिष्ठाय नमः।Om Varishthaya Namah।जो सभी में श्रेष्ठ एवं सर्वोच्च हैं।
16श्रीवरॐ श्रीवराय नमः।Om Shrivaraya Namah।जो श्री, सौभाग्य एवं समृद्धि प्रदान करने वाले हैं।
17प्रह्लादवरदॐ प्रह्लादवरदाय नमः।Om Prahladavaradaya Namah।जिन्होंने भक्त प्रह्लाद को वरदान प्रदान किया।
18प्रत्यक्षवरदॐ प्रत्यक्षवरदाय नमः।Om Pratyakshavaradaya Namah।जो प्रत्यक्ष होकर भक्तों को वरदान प्रदान करते हैं।
19परात्परपरेशॐ परात्परपरेशाय नमः।Om Paratparapareshaya Namah।जो परम से भी परम और सर्वोच्च ईश्वर हैं।
20पवित्रॐ पवित्राय नमः।Om Pavitraya Namah।जो स्वयं पवित्र हैं और भक्तों को पवित्र करते हैं।
21पिनाकीॐ पिनाकिने नमः।Om Pinakine Namah।जो पिनाक धनुष धारण करने वाले दिव्य स्वरूप हैं।
22पावनॐ पावनाय नमः।Om Pavanaya Namah।जो समस्त जगत को पवित्र करने वाले हैं।
23प्रसन्नॐ प्रसन्नाय नमः।Om Prasannaya Namah।जो सदैव प्रसन्न एवं कृपालु रहते हैं।
24पाशीॐ पाशिने नमः।Om Pashine Namah।जो पाश धारण करने वाले एवं बन्धनों को नियंत्रित करने वाले हैं।
25पापहारीॐ पापहारिणे नमः।Om Papaharine Namah।जो भक्तों के पापों का नाश करते हैं।
26पुरुष्ठुतॐ पुरुष्ठुताय नमः।Om Purushtutaya Namah।जिनकी महान स्तुति श्रेष्ठ पुरुष एवं देवता करते हैं।
27पुण्यॐ पुण्याय नमः।Om Punyaya Namah।जो स्वयं पुण्यस्वरूप एवं पवित्र हैं।
28पुरुहूतॐ पुरुहूताय नमः।Om Puruhutaya Namah।जिनका अनेक प्रकार से आह्वान एवं पूजन किया जाता है।
29तत्पुरुषॐ तत्पुरुषाय नमः।Om Tatpurushaya Namah।जो परम पुरुष एवं दिव्य चेतना के स्वरूप हैं।
30तथ्यॐ तथ्याय नमः।Om Tathyaya Namah।जो सत्य एवं वास्तविकता के स्वरूप हैं।
31पुराणपुरुषॐ पुराणपुरुषाय नमः।Om Puranapurushaya Namah।जो सनातन आदि पुरुष हैं।
32पुरोधस्ॐ पुरोधसे नमः।Om Purodhase Namah।जो यज्ञ एवं धार्मिक कर्मों के अग्रणी मार्गदर्शक हैं।
33पूर्वजॐ पूर्वजाय नमः।Om Purvajaya Namah।जो सबसे प्राचीन एवं आदि स्वरूप हैं।
34पुष्कराक्षॐ पुष्कराक्षाय नमः।Om Pushkarakshaya Namah।जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं।
35पुष्पहासॐ पुष्पहासाय नमः।Om Pushpahasaya Namah।जिनकी मुस्कान पुष्प के समान मनोहर है।
36हासॐ हासाय नमः।Om Hasaya Namah।जो दिव्य हास्य एवं आनन्द के स्वरूप हैं।
37महाहासॐ महाहासाय नमः।Om Mahahasaya Namah।जिनकी महान हँसी से भय एवं अधर्म का नाश होता है।
38शार्ङ्गीॐ शार्ङ्गिणे नमः।Om Sharngine Namah।जो शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले भगवान हैं।
39सिंहॐ सिंहाय नमः।Om Simhaya Namah।जो सिंह के समान शक्तिशाली एवं पराक्रमी हैं।
40सिंहराजॐ सिंहराजाय नमः।Om Simharajaya Namah।जो सिंहों के भी राजा एवं सर्वोच्च पराक्रमी हैं।
41जगद्वश्यॐ जगद्वश्याय नमः।Om Jagadvashyaya Namah।जिनके अधीन सम्पूर्ण जगत है।
42अट्टहासॐ अट्टहासाय नमः।Om Attahasaya Namah।जिनकी प्रचण्ड दिव्य हँसी अत्यन्त प्रभावशाली है।
43रोषॐ रोषाय नमः।Om Roshaya Namah।जो अधर्म के विनाश के लिए दिव्य क्रोध धारण करते हैं।
44जलवासॐ जलवासाय नमः।Om Jalavasaya Namah।जो जल में निवास करने वाले दिव्य स्वरूप हैं।
45भूतावासॐ भूतावासाय नमः।Om Bhutavasaya Namah।जो समस्त प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं।
46भासॐ भासाय नमः।Om Bhasaya Namah।जो दिव्य प्रकाश से प्रकाशित हैं।
47श्रीनिवासॐ श्रीनिवासाय नमः।Om Shrinivasaya Namah।जो देवी श्री लक्ष्मी के निवासस्थान हैं।
48खड्गीॐ खड्गिने नमः।Om Khadgine Namah।जो खड्ग धारण करने वाले हैं।
49खड्गजिह्वॐ खड्गजिह्वाय नमः।Om Khadgajihvaya Namah।जिनकी जिह्वा खड्ग के समान तीक्ष्ण एवं शक्तिशाली है।
50सिंहॐ सिंहाय नमः।Om Simhaya Namah।जो सिंह के समान निर्भीक एवं पराक्रमी हैं।
51खड्गवासॐ खड्गवासाय नमः।Om Khadgavasaya Namah।जो खड्ग के दिव्य तेज एवं शक्ति से युक्त हैं।
52मूलाधिवासॐ मूलाधिवासाय नमः।Om Muladhivasaya Namah।जो सम्पूर्ण अस्तित्व के मूल आधार में स्थित हैं।
53धर्मवासॐ धर्मवासाय नमः।Om Dharmavasaya Namah।जो धर्म में सदैव स्थित रहने वाले हैं।
54धन्वीॐ धन्विने नमः।Om Dhanvine Namah।जो धनुष धारण करने वाले हैं।
55धनञ्जयॐ धनञ्जयाय नमः।Om Dhananjayaya Namah।जो विजय एवं ऐश्वर्य प्रदान करने वाले हैं।
56धन्यॐ धन्याय नमः।Om Dhanyaya Namah।जो धन्य, पवित्र एवं सौभाग्य प्रदान करने वाले हैं।
57मृत्युञ्जयॐ मृत्युञ्जयाय नमः।Om Mrityunjayaya Namah।जो मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
58शुभञ्जयॐ शुभञ्जयाय नमः।Om Shubhanjayaya Namah।जो शुभता एवं विजय प्रदान करने वाले हैं।
59सूत्रॐ सूत्राय नमः।Om Sutraya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में बाँधने वाले हैं।
60शत्रुञ्जयॐ शत्रुञ्जयाय नमः।Om Shatrunjayaya Namah।जो शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
61निरञ्जनॐ निरञ्जनाय नमः।Om Niranjanaya Namah।जो पूर्णतः निर्मल एवं माया से रहित हैं।
62नीरॐ नीराय नमः।Om Niraya Namah।जो जल के समान निर्मल एवं शुद्ध हैं।
63निर्गुणॐ निर्गुणाय नमः।Om Nirgunaya Namah।जो प्रकृति के तीन गुणों से परे हैं।
64गुणॐ गुणाय नमः।Om Gunaya Namah।जो समस्त दिव्य गुणों के आधार हैं।
65निष्प्रपञ्चॐ निष्प्रपञ्चाय नमः।Om Nishprapanchaya Namah।जो भौतिक जगत की सीमाओं से परे हैं।
66निर्वाणपदॐ निर्वाणपदाय नमः।Om Nirvanapadaya Namah।जो परम निर्वाण एवं मोक्ष के स्वरूप हैं।
67निबिडॐ निबिडाय नमः।Om Nibidaya Namah।जो अत्यन्त गहन एवं अगाध स्वरूप वाले हैं।
68निरालम्बॐ निरालम्बाय नमः।Om Niralambaya Namah।जो स्वयं किसी बाहरी आधार पर निर्भर नहीं हैं।
69नीलॐ नीलाय नमः।Om Nilaya Namah।जो नील वर्ण के दिव्य स्वरूप वाले हैं।
70निष्कलॐ निष्कलाय नमः।Om Nishkalaya Namah।जो पूर्ण, अखण्ड एवं अविभाज्य हैं।
71कलॐ कलाय नमः।Om Kalaya Namah।जो समय एवं कलाओं के आधार हैं।
72निमेषॐ निमेषाय नमः।Om Nimeshaya Namah।जो एक निमेष अर्थात् क्षण के भी नियन्ता हैं।
73निबन्धॐ निबन्धाय नमः।Om Nibandhaya Namah।जो समस्त जगत की व्यवस्था के आधार हैं।
74निमेषगमनॐ निमेषगमनाय नमः।Om Nimeshagamanaya Namah।जो क्षणमात्र में सर्वत्र गतिशील होने वाले हैं।
75निर्द्वन्द्वॐ निर्द्वन्द्वाय नमः।Om Nirdvandvaya Namah।जो सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों से परे हैं।
76निराशॐ निराशाय नमः।Om Nirashaya Namah।जो सांसारिक अपेक्षाओं से रहित हैं।
77निश्चयॐ निश्चयाय नमः।Om Nishchayaya Namah।जो अटल संकल्प एवं दृढ़ निश्चय के स्वरूप हैं।
78निर्मलॐ निर्मलाय नमः।Om Nirmalaya Namah।जो पूर्णतः शुद्ध एवं निष्कलंक हैं।
79निर्मोहॐ निर्मोहाय नमः।Om Nirmohaya Namah।जो मोह एवं अज्ञान से रहित हैं।
80निराकृतिॐ निराकृतये नमः।Om Nirakritaye Namah।जो निराकार एवं भौतिक रूप से परे हैं।
81नित्यॐ नित्याय नमः।Om Nityaya Namah।जो शाश्वत एवं सदैव विद्यमान हैं।
82सत्यॐ सत्याय नमः।Om Satyaya Namah।जो परम सत्य के स्वरूप हैं।
83सत्कर्मनिरतॐ सत्कर्मनिरताय नमः।Om Satkarmanirataya Namah।जो सदैव शुभ एवं धर्मपूर्ण कर्मों में स्थित रहते हैं।
84सत्यध्वजॐ सत्यध्वजाय नमः।Om Satyadhvajaya Namah।जिनका ध्वज सत्य एवं धर्म का प्रतीक है।
85मुञ्जॐ मुञ्जाय नमः।Om Munjaya Namah।जो पवित्र मुञ्ज से सम्बद्ध दिव्य स्वरूप वाले हैं।
86मुञ्जकेशॐ मुञ्जकेशाय नमः।Om Munjakeshaya Namah।जिनके केश मुञ्ज के समान सुन्दर एवं दृढ़ हैं।
87केशीॐ केशिने नमः।Om Keshine Namah।जो केशी नामक असुर का संहार करने वाले हैं।
88हरीशॐ हरीशाय नमः।Om Harishaya Namah।जो हरि के परमेश्वर एवं स्वामी स्वरूप हैं।
89शेषॐ शेषाय नमः।Om Sheshaya Namah।जो अनन्त शेष के स्वरूप एवं आधार हैं।
90गुडाकेशॐ गुडाकेशाय नमः।Om Gudakeshaya Namah।जो निद्रा एवं अज्ञान पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
91सुकेशॐ सुकेशाय नमः।Om Sukeshaya Namah।जिनके केश अत्यन्त सुन्दर एवं मनोहर हैं।
92ऊर्ध्वकेशॐ ऊर्ध्वकेशाय नमः।Om Urdhvakeshaya Namah।जिनके केश ऊपर की ओर उठे हुए एवं तेजस्वी हैं।
93केशिसंहारकॐ केशिसंहारकाय नमः।Om Keshisamharakaya Namah।जो केशी असुर का संहार करने वाले हैं।
94जलेशॐ जलेशाय नमः।Om Jaleshaya Namah।जो जल के अधिपति एवं जलतत्त्व के नियन्ता हैं।
95स्थलेशॐ स्थलेशाय नमः।Om Sthaleshaya Namah।जो पृथ्वी एवं स्थली के अधिपति हैं।
96पद्मेशॐ पद्मेशाय नमः।Om Padmeshaya Namah।जो कमल एवं लक्ष्मी के परम अधिपति हैं।
97उग्ररूपिन्ॐ उग्ररूपिणे नमः।Om Ugrarupine Namah।जो अधर्म के विनाश के लिए उग्र रूप धारण करते हैं।
98कुशेशयॐ कुशेशयाय नमः।Om Kusheshayaya Namah।जो पवित्र कुश एवं कमल से सम्बद्ध दिव्य स्वरूप हैं।
99ज्वलन्तॐ ज्वलन्ताय नमः।Om Jvalantaya Namah।जो अग्नि के समान प्रज्वलित एवं तेजस्वी हैं।
100ज्वालामालीॐ ज्वालामालिने नमः।Om Jvalamalinē Namah।जो अग्नि की ज्वालाओं की माला से सुशोभित हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
101कूलॐ कूलाय नमः।Om Kulaya Namah।जो समस्त जगत के आधार एवं तटस्वरूप हैं।
102केशवॐ केशवाय नमः।Om Keshavaya Namah।जो भगवान केशव के दिव्य स्वरूप हैं।
103सूक्तिकर्णॐ सूक्तिकर्णाय नमः।Om Suktikarnaya Namah।जो पवित्र सूक्तियों एवं स्तुतियों को सुनने वाले हैं।
104सूक्तॐ सूक्ताय नमः।Om Suktaya Namah।जो पवित्र वैदिक सूक्तों के स्वरूप हैं।
105रक्तजिह्वॐ रक्तजिह्वाय नमः।Om Raktajihvaya Namah।जिनकी जिह्वा रक्त के समान लाल एवं उग्र है।
106रागीॐ रागिणे नमः।Om Ragine Namah।जो भक्तों के प्रेम एवं भक्ति से प्रसन्न होते हैं।
107दीप्तरूपॐ दीप्तरूपाय नमः।Om Diptarupaya Namah।जिनका दिव्य स्वरूप तेज से प्रकाशित है।
108दीप्तॐ दीप्ताय नमः।Om Diptaya Namah।जो अत्यन्त तेजस्वी एवं प्रकाशमान हैं।
109प्रदीप्तॐ प्रदीप्ताय नमः।Om Pradiptaya Namah।जो चारों ओर दिव्य प्रकाश फैलाते हैं।
110प्रलोभिन्ॐ प्रलोभिने नमः।Om Pralobhine Namah।जो अपने दिव्य स्वरूप से भक्तों के मन को आकर्षित करते हैं।
111प्रच्छिन्नॐ प्रच्छिन्नाय नमः।Om Prachchhinnaya Namah।जो अज्ञान एवं अधर्म का नाश करने वाले हैं।
112प्रबोधॐ प्रबोधाय नमः।Om Prabodhaya Namah।जो ज्ञान एवं आध्यात्मिक जागृति प्रदान करते हैं।
113प्रभुॐ प्रभवे नमः।Om Prabhave Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परम स्वामी एवं स्रोत हैं।
114विभुॐ विभवे नमः।Om Vibhave Namah।जो सर्वव्यापक एवं अनन्त शक्ति वाले हैं।
115प्रभञ्जनॐ प्रभञ्जनाय नमः।Om Prabhanjanaya Namah।जो बाधाओं एवं अधर्म का नाश करने वाले हैं।
116पान्थॐ पान्थाय नमः।Om Panthaya Namah।जो जीवन-पथ के मार्गदर्शक एवं रक्षक हैं।
117प्रमायाप्रमितॐ प्रमायाप्रमिताय नमः।Om Pramayapramitaya Namah।जो सभी प्रमाणों से परे एवं अनन्त स्वरूप वाले हैं।
118प्रकाशॐ प्रकाशाय नमः।Om Prakashaya Namah।जो ज्ञान एवं दिव्य प्रकाश के स्वरूप हैं।
119प्रतापॐ प्रतापाय नमः।Om Pratapaya Namah।जो महान तेज, शक्ति एवं पराक्रम से युक्त हैं।
120प्रज्वलॐ प्रज्वलाय नमः।Om Prajvalaya Namah।जो अग्नि के समान प्रज्वलित एवं तेजस्वी हैं।
121उज्ज्वलॐ उज्ज्वलाय नमः।Om Ujjvalaya Namah।जो अत्यन्त उज्ज्वल एवं दिव्य प्रकाश से युक्त हैं।
122ज्वालामालास्वरूपॐ ज्वालामालास्वरूपाय नमः।Om Jvalamalasvarupaya Namah।जिनका स्वरूप अग्नि की ज्वालाओं की माला के समान है।
123ज्वलज्जिह्वॐ ज्वलज्जिह्वाय नमः।Om Jvalajjihvaya Namah।जिनकी जिह्वा अग्नि की ज्वाला के समान प्रज्वलित है।
124ज्वालिन्ॐ ज्वालिने नमः।Om Jvaline Namah।जो अग्नि की ज्वाला के समान प्रकाशित हैं।
125महोज्ज्वालॐ महोज्ज्वालाय नमः।Om Mahojjvalaya Namah।जो अत्यन्त प्रचण्ड एवं महान तेज से युक्त हैं।
126कालॐ कालाय नमः।Om Kalaya Namah।जो काल एवं समय के परम नियन्ता हैं।
127कालमूर्तिधरॐ कालमूर्तिधराय नमः।Om Kalamurtidharaya Namah।जो काल का दिव्य स्वरूप धारण करने वाले हैं।
128कालान्तकॐ कालान्तकाय नमः।Om Kalantakaya Namah।जो स्वयं काल का भी अंत करने वाले हैं।
129कल्पॐ कल्पाय नमः।Om Kalpaya Namah।जो कल्प एवं सृष्टि-चक्र के आधार हैं।
130कलनॐ कलनाय नमः।Om Kalanaya Namah।जो समय एवं परिवर्तन के नियन्ता हैं।
131कृतॐ कृते नमः।Om Krite Namah।जो समस्त कर्मों के परम कर्ता हैं।
132कालचक्रॐ कालचक्राय नमः।Om Kalachakraya Namah।जो कालचक्र के परम नियन्ता हैं।
133चक्रॐ चक्राय नमः।Om Chakraya Namah।जो दिव्य चक्र के स्वरूप एवं धारक हैं।
134वषट्चक्रॐ वषट्चक्राय नमः।Om Vashatchakraya Namah।जो यज्ञ एवं दिव्य चक्र के स्वरूप हैं।
135चक्रिन्ॐ चक्रिणे नमः।Om Chakrine Namah।जो सुदर्शन चक्र धारण करने वाले हैं।
136अक्रूरॐ अक्रूराय नमः।Om Akruraya Namah।जो क्रूरता से रहित एवं करुणामय हैं।
137कृतान्तॐ कृतान्ताय नमः।Om Kritantaya Namah।जो मृत्यु एवं कर्मों के अंतिम फल के नियन्ता हैं।
138विक्रमॐ विक्रमाय नमः।Om Vikramaya Namah।जो महान पराक्रम एवं शक्ति वाले हैं।
139क्रमॐ क्रमाय नमः।Om Kramaya Namah।जो सृष्टि के क्रम एवं व्यवस्था के आधार हैं।
140कृत्तिन्ॐ कृत्तिने नमः।Om Krittine Namah।जो शत्रुओं एवं अधर्म का संहार करने वाले हैं।
141कृत्तिवासॐ कृत्तिवासाय नमः।Om Krittivasaya Namah।जो दिव्य आवरण एवं तेज से सुशोभित हैं।
142कृतघ्नॐ कृतघ्नाय नमः।Om Kritaghnaya Namah।जो कृतघ्नता का नाश करने वाले हैं।
143कृतात्माॐ कृतात्मने नमः।Om Kritatmane Namah।जो पूर्ण एवं सिद्ध आत्मस्वरूप हैं।
144संक्रमॐ संक्रमणाय नमः।Om Sankramanaya Namah।जो परिवर्तन एवं संक्रमण के नियन्ता हैं।
145क्रुद्धॐ क्रुद्धाय नमः।Om Kruddhaya Namah।जो अधर्म के विनाश के लिए दिव्य क्रोध धारण करते हैं।
146क्रान्तलोकत्रयॐ क्रान्तलोकत्रयाय नमः।Om Krantalokatrayaya Namah।जो तीनों लोकों में व्याप्त एवं विजयी हैं।
147अरूपॐ अरूपाय नमः।Om Arupaya Namah।जो भौतिक रूप से परे निराकार स्वरूप वाले हैं।
148स्वरूपॐ स्वरूपाय नमः।Om Svarupaya Namah।जो अपने परम दिव्य स्वरूप में स्थित हैं।
149हरिॐ हरये नमः।Om Haraye Namah।जो भक्तों के पाप एवं दुःख हर लेते हैं।
150परमात्माॐ परमात्मने नमः।Om Paramatmane Namah।जो सभी प्राणियों के परमात्मा एवं अन्तर्यामी हैं।
151अजयॐ अजयाय नमः।Om Ajayaya Namah।जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता।
152आदिदेवॐ आदिदेवाय नमः।Om Adidevaya Namah।जो समस्त देवताओं के आदि एवं मूल देव हैं।
153अक्षयॐ अक्षयाय नमः।Om Akshayaya Namah।जो कभी क्षय न होने वाले शाश्वत स्वरूप हैं।
154क्षयॐ क्षयाय नमः।Om Kshayaya Namah।जो सृष्टि के क्षय एवं परिवर्तन के नियन्ता हैं।
155अघोरॐ अघोराय नमः।Om Aghoraya Namah।जो भय एवं घोरता से परे शांत स्वरूप हैं।
156सुघोरॐ सुघोराय नमः।Om Sughoraya Namah।जो भक्तों के लिए कल्याणकारी एवं रक्षक हैं।
157घोरघोरतरॐ घोरघोरतराय नमः।Om Ghoraghorataraya Namah।जो अधर्मियों के लिए अत्यन्त उग्र एवं भयङ्कर हैं।
158अघोरवीर्यॐ अघोरवीर्याय नमः।Om Aghoraviryaya Namah।जिनकी शक्ति एवं पराक्रम अद्भुत और असीम है।
159लसद्घोरॐ लसद्घोराय नमः।Om Lasadghoraya Namah।जो अपने उग्र एवं तेजस्वी रूप से प्रकाशित हैं।
160घोराध्यक्षॐ घोराध्यक्षाय नमः।Om Ghoradhyakshaya Namah।जो उग्र शक्तियों के भी परम अधिपति हैं।
161दक्षॐ दक्षाय नमः।Om Dakshaya Namah।जो अत्यन्त कुशल एवं समर्थ हैं।
162दक्षिणॐ दक्षिणाय नमः।Om Dakshinaya Namah।जो दयालु, कुशल एवं दक्षिणा के स्वरूप हैं।
163आर्यॐ आर्याय नमः।Om Aryaya Namah।जो श्रेष्ठ, सम्माननीय एवं धर्मनिष्ठ हैं।
164शम्भुॐ शम्भवे नमः।Om Shambhave Namah।जो कल्याण एवं मंगल के स्रोत हैं।
165अमोघॐ अमोघाय नमः।Om Amoghaya Namah।जिनका कोई भी संकल्प या कार्य निष्फल नहीं होता।
166गुणौघॐ गुणौघाय नमः।Om Gunaughaya Namah।जो अनन्त दिव्य गुणों के भण्डार हैं।
167अनघॐ अनघाय नमः।Om Anaghaya Namah।जो पाप एवं दोषों से पूर्णतः रहित हैं।
168अघहारीॐ अघहारिणे नमः।Om Aghaharine Namah।जो भक्तों के पापों का नाश करने वाले हैं।
169मेघनादॐ मेघनादाय नमः।Om Meghanadaya Namah।जिनकी गर्जना मेघों की गम्भीर ध्वनि के समान है।
170नादॐ नादाय नमः।Om Nadaya Namah।जो दिव्य नाद एवं ब्रह्मध्वनि के स्वरूप हैं।
171मेघात्माॐ मेघात्मने नमः।Om Meghatmane Namah।जिनका स्वरूप मेघ के समान गम्भीर एवं शक्तिशाली है।
172मेघवाहनरूपॐ मेघवाहनरूपाय नमः।Om Meghavahanarupaya Namah।जो मेघ के समान दिव्य एवं गतिशील स्वरूप वाले हैं।
173मेघश्यामॐ मेघश्यामाय नमः।Om Meghashyamaya Namah।जिनका वर्ण वर्षा के मेघ के समान श्याम है।
174मालीॐ मालिने नमः।Om Maline Namah।जो दिव्य माला धारण करने वाले हैं।
175व्यालयज्ञोपवीतॐ व्यालयज्ञोपवीताय नमः।Om Vyalayajnopavitaya Namah।जो सर्प के समान दिव्य यज्ञोपवीत धारण करते हैं।
176व्याघ्रदेहॐ व्याघ्रदेहाय नमः।Om Vyaghradehaya Namah।जिनका शरीर व्याघ्र के समान शक्तिशाली है।
177व्याघ्रपादॐ व्याघ्रपादाय नमः।Om Vyaghrapadaya Namah।जिनके चरण व्याघ्र के समान शक्तिशाली एवं दृढ़ हैं।
178व्याघ्रकर्मिन्ॐ व्याघ्रकर्मिणे नमः।Om Vyaghrakarmine Namah।जो व्याघ्र के समान तीव्र एवं पराक्रमी कर्म करने वाले हैं।
179व्यापकॐ व्यापकाय नमः।Om Vyapakaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं।
180विकटास्यॐ विकटास्याय नमः।Om Vikatasyaya Namah।जिनका मुख अत्यन्त विशाल एवं उग्र है।
181वीरॐ वीराय नमः।Om Viraya Namah।जो महान वीर एवं पराक्रमी हैं।
182विष्टरश्रवस्ॐ विष्टरश्रवसे नमः।Om Vishtarashravase Namah।जिनकी कीर्ति एवं यश सम्पूर्ण दिशाओं में फैला है।
183विकीर्णनखदंष्ट्रॐ विकीर्णनखदंष्ट्राय नमः।Om Vikirnanakhadamshtraya Namah।जिनके फैले हुए नख एवं दाँत अत्यन्त उग्र हैं।
184नखदंष्ट्रायुधॐ नखदंष्ट्रायुधाय नमः।Om Nakhadamshtrayudhaya Namah।जिनके नख एवं दाँत ही दिव्य अस्त्र हैं।
185विष्वक्सेनॐ विष्वक्सेनाय नमः।Om Vishvaksenaya Namah।जो समस्त दिव्य सेनाओं के अधिपति हैं।
186सेनाॐ सेनाय नमः।Om Senaya Namah।जो दिव्य सेना एवं उसकी शक्ति के स्वरूप हैं।
187विह्वलॐ विह्वलाय नमः।Om Vihvalaya Namah।जिनके उग्र स्वरूप से अधर्मी भयभीत हो जाते हैं।
188बलॐ बलाय नमः।Om Balaya Namah।जो स्वयं अनन्त शक्ति एवं बल के स्वरूप हैं।
189विरूपाक्षॐ विरूपाक्षाय नमः।Om Virupakshaya Namah।जिनके नेत्र दिव्य एवं असाधारण स्वरूप वाले हैं।
190वीरॐ वीराय नमः।Om Viraya Namah।जो निर्भीक एवं महान पराक्रमी हैं।
191विशेषाक्षॐ विशेषाक्षाय नमः।Om Visheshakshaya Namah।जिनके नेत्र अद्भुत एवं विशेष दिव्य शक्ति वाले हैं।
192साक्षीॐ साक्षिणे नमः।Om Sakshine Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के साक्षी एवं अन्तर्यामी हैं।
193वीतशोकॐ वीतशोकाय नमः।Om Vitashokaya Namah।जो शोक एवं दुःख से पूर्णतः परे हैं।
194विस्तीर्णवदनॐ विस्तीर्णवदनाय नमः।Om Vistirnavadanaya Namah।जिनका मुख अत्यन्त विशाल एवं प्रभावशाली है।
195विधेयॐ विधेयाय नमः।Om Vidheyaya Namah।जो धर्म एवं दिव्य नियमों के पालनकर्ता हैं।
196विजयॐ विजयाय नमः।Om Vijayaya Namah।जो सदैव विजय प्राप्त करने वाले हैं।
197जयॐ जयाय नमः।Om Jayaya Namah।जो विजय एवं सफलता के परम स्वरूप हैं।
198विबुधॐ विबुधाय नमः।Om Vibudhaya Namah।जो परम ज्ञानी एवं देवताओं द्वारा पूजित हैं।
199विभावॐ विभावाय नमः।Om Vibhavaya Namah।जो दिव्य वैभव एवं प्रकाश के स्वरूप हैं।
200विश्वम्भरॐ विश्वम्भराय नमः।Om Vishvambharaya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व का पालन-पोषण एवं धारण करते हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
301सर्वैश्वर्यप्रदातृॐ सर्वैश्वर्यप्रदात्रे नमः।Om Sarvaishvaryapradatre Namah।जो सभी प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करने वाले हैं।
302सर्वकार्यविधायिन्ॐ सर्वकार्यविधायिने नमः।Om Sarvakaryavidhayine Namah।जो सभी कार्यों को पूर्ण एवं व्यवस्थित करने वाले हैं।
303सर्वज्वरविनाशॐ सर्वज्वरविनाशाय नमः।Om Sarvajvaravinashaya Namah।जो सभी प्रकार के ज्वर और कष्टों का नाश करते हैं।
304सर्वरोगापहारिन्ॐ सर्वरोगापहारिणे नमः।Om Sarvarogapaharine Namah।जो सभी रोगों और पीड़ाओं को दूर करने वाले हैं।
305सर्वाभिचारहन्तृॐ सर्वाभिचारहन्त्रे नमः।Om Sarvabhicharahantre Namah।जो सभी अभिचार एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश करते हैं।
306सर्वैश्वर्यविधायिन्ॐ सर्वैश्वर्यविधायिने नमः।Om Sarvaishvaryavidhayine Namah।जो भक्तों को सभी प्रकार का ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
307पिङ्गाक्षॐ पिङ्गाक्षाय नमः।Om Pingakshaya Namah।जिनके नेत्र पिंगल वर्ण के और तेजस्वी हैं।
308एकशृङ्गॐ एकशृङ्गाय नमः।Om Ekashringaya Namah।जो एक दिव्य शृंग के स्वरूप से युक्त हैं।
309द्विशृङ्गॐ द्विशृङ्गाय नमः।Om Dvishringaya Namah।जो दो दिव्य शृंगों वाले स्वरूप से युक्त हैं।
310मरीचिॐ मरीचये नमः।Om Marichaye Namah।जो दिव्य किरणों और प्रकाश के स्वरूप हैं।
311बहुशृङ्गॐ बहुशृङ्गाय नमः।Om Bahushringaya Namah।जो अनेक दिव्य शृंगों के स्वरूप हैं।
312लिङ्गॐ लिङ्गाय नमः।Om Lingaya Namah।जो परम सत्य के दिव्य प्रतीक एवं स्वरूप हैं।
313महाशृङ्गॐ महाशृङ्गाय नमः।Om Mahashringaya Namah।जो महान दिव्य शृंग वाले हैं।
314माङ्गल्यॐ माङ्गल्याय नमः।Om Mangalyaya Namah।जो मंगल एवं कल्याण प्रदान करने वाले हैं।
315मनोज्ञॐ मनोज्ञाय नमः।Om Manojnaya Namah।जो अत्यन्त मनोहर एवं आकर्षक हैं।
316मन्तव्यॐ मन्तव्याय नमः।Om Mantavyaya Namah।जो मनन एवं ध्यान करने योग्य परम स्वरूप हैं।
317महात्माॐ महात्मने नमः।Om Mahatmane Namah।जो महान एवं परम पवित्र आत्मस्वरूप हैं।
318महादेवॐ महादेवाय नमः।Om Mahadevaya Namah।जो महान देव एवं परम पूजनीय हैं।
319देवॐ देवाय नमः।Om Devaya Namah।जो स्वयं परम दिव्य देवता हैं।
320मातुलिङ्गधरॐ मातुलिङ्गधराय नमः।Om Matulingadharaya Namah।जो मातुलिङ्ग फल धारण करने वाले हैं।
321महामायाप्रसूतॐ महामायाप्रसूताय नमः।Om Mahamayaprasutaya Namah।जो महामाया की दिव्य शक्ति से प्रकट होने वाले हैं।
322प्रस्तुतॐ प्रस्तुताय नमः।Om Prastutaya Namah।जो सदैव उपस्थित एवं स्तुति के योग्य हैं।
323मायिन्ॐ मायिने नमः।Om Mayine Namah।जो अपनी दिव्य माया के स्वामी हैं।
324अनन्तॐ अनन्ताय नमः।Om Anantaya Namah।जो अनन्त एवं असीम हैं।
325अनन्तरूपॐ अनन्तरूपाय नमः।Om Anantarupaya Namah।जो अनन्त दिव्य रूप धारण करने वाले हैं।
326मायिन्ॐ मायिने नमः।Om Mayine Namah।जो दिव्य माया के अधिपति हैं।
327जलशायिन्ॐ जलशायिने नमः।Om Jalashayine Namah।जो जल में शयन करने वाले दिव्य स्वरूप हैं।
328महोदरॐ महोदराय नमः।Om Mahodaraya Namah।जिनका उदर विशाल एवं दिव्य है।
329मन्दॐ मन्दाय नमः।Om Mandaya Namah।जो शांत, सौम्य एवं गंभीर स्वरूप वाले हैं।
330मददॐ मददाय नमः।Om Madadaya Namah।जो भक्तों को आनन्द एवं उत्साह प्रदान करते हैं।
331मदॐ मदाय नमः।Om Madaya Namah।जो दिव्य आनन्द एवं शक्ति के स्वरूप हैं।
332मधुकैटभहन्तृॐ मधुकैटभहन्त्रे नमः।Om Madhukaitabhahantre Namah।जो मधु और कैटभ असुरों का संहार करने वाले हैं।
333माधवॐ माधवाय नमः।Om Madhavaya Namah।जो भगवान विष्णु के माधव स्वरूप हैं।
334मुरारिॐ मुरारये नमः।Om Muraraye Namah।जो मुर नामक असुर का संहार करने वाले हैं।
335महावीर्यॐ महावीर्याय नमः।Om Mahaviryaya Namah।जो महान शक्ति एवं पराक्रम से युक्त हैं।
336धैर्यॐ धैर्याय नमः।Om Dhairyaya Namah।जो धैर्य एवं दृढ़ता के स्वरूप हैं।
337चित्रवीर्यॐ चित्रवीर्याय नमः।Om Chitraviryaya Namah।जिनका पराक्रम अद्भुत एवं विलक्षण है।
338चित्रकूर्मॐ चित्रकूर्माय नमः।Om Chitrakurmaya Namah।जो अद्भुत कूर्म स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
339चित्रॐ चित्राय नमः।Om Chitraya Namah।जो अद्भुत एवं विविध दिव्य रूपों वाले हैं।
340चित्रभावनॐ चित्रभावने नमः।Om Chitrabhavane Namah।जो अद्भुत सृष्टि एवं विविध भावों के रचयिता हैं।
341मायातीतॐ मायातीताय नमः।Om Mayatitaya Namah।जो माया से पूर्णतः परे हैं।
342मायाॐ मायाय नमः।Om Mayaya Namah।जो दिव्य माया के परम स्वरूप हैं।
343महावीरॐ महावीराय नमः।Om Mahaviraya Namah।जो महान वीर एवं पराक्रमी हैं।
344महातेजॐ महातेजाय नमः।Om Mahatejaya Namah।जो महान दिव्य तेज से प्रकाशित हैं।
345बीजॐ बीजाय नमः।Om Bijaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के मूल बीज हैं।
346तेजोधामन्ॐ तेजोधाम्ने नमः।Om Tejodhamne Namah।जो समस्त तेज के परम धाम हैं।
347बीजिन्ॐ बीजिने नमः।Om Bijine Namah।जो सृष्टि के मूल बीज के स्वामी हैं।
348तेजोमयनृसिंहॐ तेजोमयनृसिंहाय नमः।Om Tejomayanrisimhaya Namah।जो पूर्णतः दिव्य तेज से बने नरसिंह स्वरूप हैं।
349चित्रभानुॐ चित्रभानवे नमः।Om Chitrabhanave Namah।जो अद्भुत एवं विविध प्रकाश के स्वरूप हैं।
350महादंष्ट्रॐ महादंष्ट्राय नमः।Om Mahadamshtraya Namah।जिनकी दंष्ट्राएँ अत्यन्त विशाल एवं शक्तिशाली हैं।
351तुष्टॐ तुष्टाय नमः।Om Tushtaya Namah।जो सदैव संतुष्ट एवं प्रसन्न रहते हैं।
352पुष्टिकरॐ पुष्टिकराय नमः।Om Pushtikaraya Namah।जो स्वास्थ्य, शक्ति एवं समृद्धि प्रदान करते हैं।
353शिपिविष्टॐ शिपिविष्टाय नमः।Om Shipivishtaya Namah।जो दिव्य प्रकाश में सर्वत्र व्याप्त हैं।
354हृष्टॐ हृष्टाय नमः।Om Hrishtaya Namah।जो आनन्दित एवं प्रसन्न स्वरूप हैं।
355पुष्टॐ पुष्टाय नमः।Om Pushtaya Namah।जो पूर्ण शक्ति एवं पोषण के स्वरूप हैं।
356परमेष्ठिन्ॐ परमेष्ठिने नमः।Om Parameshthine Namah।जो सर्वोच्च दिव्य पद पर विराजमान हैं।
357विशिष्टॐ विशिष्टाय नमः।Om Vishishtaya Namah।जो सभी में विशिष्ट एवं श्रेष्ठ हैं।
358शिष्टॐ शिष्टाय नमः।Om Shishtaya Namah।जो धर्मनिष्ठ एवं सदाचारी स्वरूप हैं।
359गरिष्ठॐ गरिष्ठाय नमः।Om Garishthaya Namah।जो अत्यन्त महान एवं श्रेष्ठ हैं।
360इष्टदायिन्ॐ इष्टदायिने नमः।Om Ishtadayine Namah।जो भक्तों की इच्छित वस्तुएँ प्रदान करते हैं।
361ज्येष्ठॐ ज्येष्ठाय नमः।Om Jyeshthaya Namah।जो सबसे प्राचीन एवं श्रेष्ठ हैं।
362श्रेष्ठॐ श्रेष्ठाय नमः।Om Shreshthaya Namah।जो सभी में सर्वोत्तम एवं श्रेष्ठ हैं।
363तुष्टॐ तुष्टाय नमः।Om Tushtaya Namah।जो पूर्णतः संतुष्ट एवं प्रसन्न हैं।
364अमिततेजस्ॐ अमिततेजसे नमः।Om Amitatejase Namah।जिनका तेज असीम एवं अपरिमित है।
365अष्टाङ्गव्यस्तरूपॐ अष्टाङ्गव्यस्तरूपाय नमः।Om Ashtangavyastarupaya Namah।जो अष्टाङ्ग रूप में व्यापक दिव्य स्वरूप वाले हैं।
366सर्वदुष्टान्तकॐ सर्वदुष्टान्तकाय नमः।Om Sarvadushtantakaya Namah।जो सभी दुष्टों एवं अधर्मियों का अंत करते हैं।
367वैकुण्ठॐ वैकुण्ठाय नमः।Om Vaikunthaya Namah।जो भगवान विष्णु के परम धाम वैकुण्ठ के स्वामी हैं।
368विकुण्ठॐ विकुण्ठाय नमः।Om Vikunthaya Namah।जो सभी बाधाओं से परे परम दिव्य स्वरूप हैं।
369केशिकण्ठॐ केशिकण्ठाय नमः।Om Keshikanthaya Namah।जिनका कण्ठ दिव्य एवं शक्तिशाली है।
370कण्ठीरवॐ कण्ठीरवाय नमः।Om Kanthiravaya Namah।जो सिंह के समान प्रचण्ड गर्जना वाले हैं।
371लुण्ठॐ लुण्ठाय नमः।Om Lunthaya Namah।जो अधर्म एवं बाधाओं का हरण करने वाले हैं।
372निश्शठॐ निश्शठाय नमः।Om Nishshathaya Namah।जो छल-कपट से रहित एवं दृढ़ स्वरूप हैं।
373हठॐ हठाय नमः।Om Hathaya Namah।जो अटल शक्ति एवं दृढ़ संकल्प के स्वरूप हैं।
374सत्वोद्रिक्तॐ सत्वोद्रिक्ताय नमः।Om Satvodriktaya Namah।जिनमें दिव्य सत्त्वगुण की प्रबलता है।
375रुद्रॐ रुद्राय नमः।Om Rudraya Namah।जो उग्र एवं अधर्म-विनाशक रुद्र स्वरूप हैं।
376ऋग्यजुस्सामगॐ ऋग्यजुस्सामगाय नमः।Om Rigyajussamagaya Namah।जो ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के स्वरूप एवं ज्ञाता हैं।
377ऋतुध्वजॐ ऋतुध्वजाय नमः।Om Ritudhvajaya Namah।जो ऋतु एवं सत्य के दिव्य ध्वजस्वरूप हैं।
378वज्रॐ वज्राय नमः।Om Vajraya Namah।जो वज्र के समान अजेय एवं शक्तिशाली हैं।
379मन्त्रराजॐ मन्त्रराजाय नमः।Om Mantrarajaya Namah।जो सभी मन्त्रों के राजा एवं परम शक्ति हैं।
380मन्त्रिन्ॐ मन्त्रिणे नमः।Om Mantrine Namah।जो मन्त्रों के ज्ञाता एवं स्वामी हैं।
381त्रिनेत्रॐ त्रिनेत्राय नमः।Om Trinetraya Namah।जिनके तीन दिव्य नेत्र हैं।
382त्रिवर्गॐ त्रिवर्गाय नमः।Om Trivargaya Namah।जो धर्म, अर्थ और काम के आधार हैं।
383त्रिधामन्ॐ त्रिधाम्ने नमः।Om Tridhamne Namah।जो तीनों दिव्य धामों के आधार हैं।
384त्रिशूलिन्ॐ त्रिशूलिने नमः।Om Trishuline Namah।जो त्रिशूल धारण करने वाले दिव्य स्वरूप हैं।
385त्रिकालज्ञानरूपॐ त्रिकालज्ञानरूपाय नमः।Om Trikalajnanarupaya Namah।जो भूत, वर्तमान और भविष्य का ज्ञान रखने वाले हैं।
386त्रिदेहॐ त्रिदेहाय नमः।Om Tridehaya Namah।जो तीनों प्रकार के दिव्य शरीरों के स्वरूप हैं।
387त्रिधात्माॐ त्रिधात्मने नमः।Om Tridhatmane Namah।जो तीनfold दिव्य तत्त्वों में आत्मस्वरूप हैं।
388त्रिमूर्तिविद्याॐ त्रिमूर्तिविद्याय नमः।Om Trimurtividyaya Namah।जो त्रिमूर्ति के परम ज्ञान के स्वरूप हैं।
389त्रितत्त्वज्ञानीॐ त्रितत्त्वज्ञानिने नमः।Om Tritatvajnanine Namah।जो तीनों प्रमुख तत्त्वों के परम ज्ञाता हैं।
390अक्षोभ्यॐ अक्षोभ्याय नमः।Om Akshobhyaya Namah।जो कभी विचलित या क्षुब्ध नहीं होते।
391अनिरुद्धॐ अनिरुद्धाय नमः।Om Aniruddhaya Namah।जो अजेय एवं किसी से रोके न जा सकने वाले हैं।
392अप्रमेयॐ अप्रमेयाय नमः।Om Aprameyaya Namah।जिन्हें किसी सीमा या प्रमाण से मापा नहीं जा सकता।
393भानुॐ भानवे नमः।Om Bhanave Namah।जो सूर्य के समान प्रकाशमान हैं।
394अमृतॐ अमृताय नमः।Om Amritaya Namah।जो अमरत्व एवं अमृत के स्वरूप हैं।
395अनन्तॐ अनन्ताय नमः।Om Anantaya Namah।जो अनन्त एवं असीम हैं।
396अमितॐ अमिताय नमः।Om Amitaya Namah।जो अपरिमित एवं असीम हैं।
397आमितौजस्ॐ आमितौजसे नमः।Om Amitaujase Namah।जिनका तेज असीम एवं अपरिमित है।
398अपमृत्युविनाशॐ अपमृत्युविनाशाय नमः।Om Apamrityuvinashaya Namah।जो अकाल मृत्यु का नाश करने वाले हैं।
399अपस्मारविघातिन्ॐ अपस्मारविघातिने नमः।Om Apasmaravighatine Namah।जो अपस्मार एवं उससे जुड़े कष्टों का नाश करते हैं।
400अन्नदॐ अन्नदाय नमः।Om Annadaya Namah।जो अन्न एवं जीवन का पोषण प्रदान करते हैं।
401अन्नरूपॐ अन्नरूपाय नमः।Om Annarupaya Namah।जो अन्न के रूप में समस्त प्राणियों का पोषण करते हैं।
402अन्नॐ अन्नाय नमः।Om Annaya Namah।जो स्वयं अन्न एवं जीवन के आधार हैं।
403अन्नभुज्ॐ अन्नभुजे नमः।Om Annabhuje Namah।जो अन्न का ग्रहण एवं यज्ञीय अर्पण स्वीकार करते हैं।
404नाद्यॐ नाद्याय नमः।Om Nadyaya Namah।जो दिव्य नाद के माध्यम से अनुभूत होने वाले हैं।
405निरवद्यॐ निरवद्याय नमः।Om Niravadyaya Namah।जो सभी दोषों से पूर्णतः रहित हैं।
406विद्याॐ विद्याय नमः।Om Vidyaya Namah।जो परम ज्ञान एवं विद्या के स्वरूप हैं।
407अद्भुतकर्मन्ॐ अद्भुतकर्मणे नमः।Om Adbhutakarmane Namah।जो अद्भुत एवं दिव्य कर्म करने वाले हैं।
408सद्योजातॐ सद्योजाताय नमः।Om Sadyojataya Namah।जो तत्काल प्रकट होने वाले दिव्य स्वरूप हैं।
409सङ्घॐ सङ्घाय नमः।Om Sanghaya Namah।जो समस्त शक्तियों एवं जीवों के एकत्व के आधार हैं।
410वैद्युतॐ वैद्युताय नमः।Om Vaidyutaya Namah।जो बिजली के समान तेजस्वी एवं प्रकाशमान हैं।
411अध्वातीतॐ अध्वातीताय नमः।Om Adhvatitaya Namah।जो सभी मार्गों एवं सीमाओं से परे हैं।
412सत्वॐ सत्वाय नमः।Om Satvaya Namah।जो शुद्ध सत्त्व एवं पवित्रता के स्वरूप हैं।
413वागतीतॐ वागतीताय नमः।Om Vagatitaya Namah।जो वाणी और शब्दों से परे हैं।
414वाग्मिन्ॐ वाग्मिने नमः।Om Vagmine Namah।जो दिव्य वाणी के स्वामी एवं वक्ता हैं।
415वागीश्वरॐ वागीश्वराय नमः।Om Vagishvaraya Namah।जो वाणी के परम ईश्वर हैं।
416गोपॐ गोपाय नमः।Om Gopaya Namah।जो प्राणियों एवं धर्म की रक्षा करने वाले हैं।
417गोहितॐ गोहिताय नमः।Om Gohitaya Namah।जो गौ एवं समस्त प्राणियों के हितकारी हैं।
418गवांपतिॐ गवांपतये नमः।Om Gavampataye Namah।जो गौ एवं पृथ्वी के परम स्वामी हैं।
419गन्धर्वॐ गन्धर्वाय नमः।Om Gandharvaya Namah।जो दिव्य संगीत एवं गन्धर्वों से सम्बद्ध हैं।
420गभीरॐ गभीराय नमः।Om Gabhiraya Namah।जो अत्यन्त गम्भीर एवं अगाध स्वरूप वाले हैं।
421गर्जितॐ गर्जिताय नमः।Om Garjitaya Namah।जिनकी गर्जना अत्यन्त शक्तिशाली एवं प्रभावशाली है।
422ऊर्जितॐ ऊर्जिताय नमः।Om Urjitaya Namah।जो महान शक्ति एवं ऊर्जा से युक्त हैं।
423पर्जन्यॐ पर्जन्याय नमः।Om Parjanyaya Namah।जो वर्षा एवं जीवनदायी जल के स्वरूप हैं।
424प्रबुद्धॐ प्रबुद्धाय नमः।Om Prabuddhaya Namah।जो पूर्णतः जागृत एवं ज्ञानस्वरूप हैं।
425प्रधानपुरुषॐ प्रधानपुरुषाय नमः।Om Pradhanapurushaya Namah।जो प्रकृति एवं पुरुष के परम आधार हैं।
426पद्माभॐ पद्माभाय नमः।Om Padmabhaya Namah।जिनकी नाभि एवं स्वरूप कमल के समान दिव्य है।
427सुनाभॐ सुनाभाय नमः।Om Sunabhaya Namah।जिनकी नाभि अत्यन्त सुन्दर एवं दिव्य है।
428पद्मनाभॐ पद्मनाभाय नमः।Om Padmanabhaya Namah।जिनकी नाभि से कमल का दिव्य प्राकट्य हुआ।
429पद्मनाभॐ पद्मनाभाय नमः।Om Padmanabhaya Namah।जो कमलनाभ भगवान के दिव्य स्वरूप हैं।
430मानीॐ मानिने नमः।Om Manine Namah।जो दिव्य गौरव एवं सम्मान से युक्त हैं।
431पद्मनेत्रॐ पद्मनेत्राय नमः।Om Padmanetraya Namah।जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं।
432पद्मॐ पद्माय नमः।Om Padmaya Namah।जो कमल के समान पवित्र एवं निर्मल हैं।
433पद्मायाःपतिॐ पद्मायाः पतये नमः।Om Padmayah Pataye Namah।जो देवी लक्ष्मी के परम पति एवं स्वामी हैं।
434पद्मोदरॐ पद्मोदराय नमः।Om Padmodaraya Namah।जिनका उदर कमल के समान दिव्य एवं सुन्दर है।
435पूतॐ पूताय नमः।Om Putaya Namah।जो पूर्णतः पवित्र एवं शुद्ध हैं।
436पद्मकल्पोद्भवॐ पद्मकल्पोद्भवाय नमः।Om Padmakalpodbhavaya Namah।जो कमल से उत्पन्न सृष्टि के दिव्य आधार हैं।
437हृत्पद्मवासॐ हृत्पद्मवासाय नमः।Om Hritpadmavasaya Namah।जो भक्तों के हृदय-कमल में निवास करते हैं।
438भूपद्मोद्धरणॐ भूपद्मोद्धरणाय नमः।Om Bhupadmoddharanaya Namah।जो पृथ्वी-कमल का उद्धार एवं संरक्षण करने वाले हैं।
439शब्दब्रह्मस्वरूपॐ शब्दब्रह्मस्वरूपाय नमः।Om Shabdabrahmasvarupaya Namah।जो शब्द-ब्रह्म के परम स्वरूप हैं।
440ब्रह्मरूपधरॐ ब्रह्मरूपधराय नमः।Om Brahmarupadharaya Namah।जो ब्रह्म का दिव्य रूप धारण करने वाले हैं।
441ब्रह्मन्ॐ ब्रह्मणे नमः।Om Brahmane Namah।जो परम ब्रह्म के स्वरूप हैं।
442ब्रह्मरूपॐ ब्रह्मरूपाय नमः।Om Brahmarupaya Namah।जो स्वयं ब्रह्म के दिव्य स्वरूप हैं।
443पद्मनेत्रॐ पद्मनेत्राय नमः।Om Padmanetraya Namah।जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं।
444ब्रह्मादिॐ ब्रह्मादये नमः।Om Brahmadaye Namah।जो ब्रह्मा आदि देवताओं के मूल एवं आधार हैं।
445ब्राह्मणॐ ब्राह्मणाय नमः।Om Brahmanaya Namah।जो ब्रह्मविद्या एवं ब्राह्मणत्व के परम स्वरूप हैं।
446ब्रह्मन्ॐ ब्रह्मणे नमः।Om Brahmane Namah।जो अनन्त परम ब्रह्म के स्वरूप हैं।
447ब्रह्मात्माॐ ब्रह्मात्मने नमः।Om Brahmatmane Namah।जो ब्रह्मस्वरूप आत्मा के रूप में स्थित हैं।
448सुब्रह्मण्यॐ सुब्रह्मण्याय नमः।Om Subrahmanyaya Namah।जो परम पवित्र ब्रह्मज्ञान के स्वरूप हैं।
449देवॐ देवाय नमः।Om Devaya Namah।जो परम दिव्य देवता हैं।
450ब्रह्मण्यॐ ब्रह्मण्याय नमः।Om Brahmanyaya Namah।जो ब्रह्म एवं धर्म के परम संरक्षक हैं।
451त्रिवेदिन्ॐ त्रिवेदिने नमः।Om Trivedine Namah।जो तीनों वेदों के ज्ञाता हैं।
452परब्रह्मस्वरूपॐ परब्रह्मस्वरूपाय नमः।Om Parabrahmasvarupaya Namah।जो परम ब्रह्म के साक्षात् स्वरूप हैं।
453पञ्चब्रह्मात्माॐ पञ्चब्रह्मात्मने नमः।Om Panchabrahmatmane Namah।जो पंचब्रह्म के परम आत्मस्वरूप हैं।
454ब्रह्मशिरस्ॐ ब्रह्मशिरसे नमः।Om Brahmashirase Namah।जो ब्रह्म के दिव्य मस्तकस्वरूप हैं।
455अश्वशिरस्ॐ अश्वशिरसे नमः।Om Ashvashirase Namah।जो अश्व के दिव्य मस्तकस्वरूप से सम्बद्ध हैं।
456अधर्वशिरस्ॐ अधर्वशिरसे नमः।Om Adharvashirase Namah।जो अथर्ववेद के दिव्य ज्ञान के स्वरूप हैं।
457नित्यमशनिप्रमितॐ नित्यमशनिप्रमिताय नमः।Om Nityamashanipramitaya Namah।जो नित्य एवं वज्र के समान असीम शक्ति वाले हैं।
458तीक्ष्णदंष्ट्रॐ तीक्षण दंष्ट्राय नमः।Om Tikshana Damshtraya Namah।जिनकी दंष्ट्राएँ अत्यन्त तीक्ष्ण एवं शक्तिशाली हैं।
459लोलॐ लोलाय नमः।Om Lolaya Namah।जो गतिशील एवं चंचल दिव्य शक्ति वाले हैं।
460ललितॐ ललिताय नमः।Om Lalitaya Namah।जो सुन्दर, कोमल एवं मनोहर हैं।
461लावण्यॐ लावण्याय नमः।Om Lavanyaya Namah।जो दिव्य सौन्दर्य एवं लावण्य के स्वरूप हैं।
462लवित्रॐ लवित्राय नमः।Om Lavitraya Namah।जो पवित्र एवं शुद्ध करने वाले हैं।
463भासकॐ भासकाय नमः।Om Bhasakaya Namah।जो प्रकाश प्रदान करने वाले हैं।
464लक्षणज्ञॐ लक्षणज्ञाय नमः।Om Lakshanajnaya Namah।जो सभी शुभ लक्षणों के ज्ञाता हैं।
465लसद्दीप्तॐ लसद्दीप्ताय नमः।Om Lasaddiptaya Namah।जो चमकते हुए दिव्य तेज से प्रकाशित हैं।
466लिप्तॐ लिप्ताय नमः।Om Liptaya Namah।जो दिव्य शक्ति एवं तेज से आवृत हैं।
467विष्णुॐ विष्णवे नमः।Om Vishnave Namah।जो सर्वव्यापक भगवान विष्णु के स्वरूप हैं।
468प्रभविष्णुॐ प्रभविष्णवे नमः।Om Prabhavishnave Namah।जो महान शक्ति से सर्वत्र व्याप्त हैं।
469वृष्णिमूलॐ वृष्णिमूलाय नमः।Om Vrishnimulaya Namah।जो वृष्णि वंश के मूल एवं परम आधार हैं।
470कृष्णॐ कृष्णाय नमः।Om Krishnaya Namah।जो भगवान कृष्ण के परम दिव्य स्वरूप हैं।
471श्रीमहाविष्णुॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।Om Shrimahavishnave Namah।जो श्रीमहाविष्णु के परम स्वरूप हैं।
472महासिंहॐ महासिंहाय नमः।Om Mahasimhaya Namah।जो महान एवं प्रचण्ड सिंह स्वरूप वाले हैं।
473हारिन्ॐ हारिणे नमः।Om Harine Namah।जो भक्तों के दुःख एवं पाप हर लेते हैं।
474वनमालिन्ॐ वनमालिने नमः।Om Vanamaline Namah।जो वनमाला धारण करने वाले हैं।
475किरीटिन्ॐ किरीटिने नमः।Om Kiritine Namah।जो दिव्य मुकुट धारण करने वाले हैं।
476कुण्डलिन्ॐ कुण्डलिने नमः।Om Kundaline Namah।जो दिव्य कुण्डल धारण करने वाले हैं।
477सर्वाङ्गॐ सर्वाङ्गाय नमः।Om Sarvangaya Namah।जिनके सभी अंग दिव्य एवं पूर्ण हैं।
478सर्वतोमुखॐ सर्वतोमुखाय नमः।Om Sarvatomukhaya Namah।जिनके मुख सभी दिशाओं में विद्यमान हैं।
479सर्वतःपाणिपादोरस्ॐ सर्वतः पाणिपादोरसे नमः।Om Sarvatah Panipadorase Namah।जिनके हाथ, चरण और वक्ष सर्वत्र व्याप्त हैं।
480सर्वतोऽक्षिशिरोमुखॐ सर्वतोऽक्षिशिरोमुखाय नमः।Om Sarvatoakshishiromukhaya Namah।जिनकी आँखें, मस्तक और मुख सभी दिशाओं में हैं।
481सर्वेश्वरॐ सर्वेश्वराय नमः।Om Sarveshvaraya Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परमेश्वर हैं।
482सदातुष्टॐ सदातुष्टाय नमः।Om Sadatushtaya Namah।जो सदैव संतुष्ट एवं प्रसन्न रहते हैं।
483समर्थॐ समर्थाय नमः।Om Samarthaya Namah।जो सर्वशक्तिमान एवं सभी कार्यों में समर्थ हैं।
484समरप्रियॐ समरप्रियाय नमः।Om Samarapriyaya Namah।जो धर्म की रक्षा के लिए युद्ध में प्रवृत्त होने वाले हैं।
485बहुयोजनविस्तीर्णॐ बहुयोजनविस्तीर्णाय नमः।Om Bahuyojanavistirnaya Namah।जिनका दिव्य स्वरूप अनेक योजन तक विस्तृत है।
486बहुयोजनमायतॐ बहुयोजनमायताय नमः।Om Bahuyojanamayataya Namah।जो अत्यन्त विशाल एवं विस्तृत स्वरूप वाले हैं।
487बहुयोजनहस्ताङ्घ्रिॐ बहुयोजनहस्ताङ्घ्रये नमः।Om Bahuyojanahastanghraye Namah।जिनके हाथ और चरण अत्यन्त विशाल एवं व्यापक हैं।
488बहुयोजननासिकॐ बहुयोजननासिकाय नमः।Om Bahuyojananasikaya Namah।जिनकी दिव्य नासिका अत्यन्त विशाल स्वरूप वाली है।
489महारूपॐ महारूपाय नमः।Om Maharupaya Namah।जो महान एवं विराट दिव्य रूप वाले हैं।
490महावक्रॐ महावक्राय नमः।Om Mahavakraya Namah।जिनका दिव्य स्वरूप अत्यन्त प्रभावशाली एवं उग्र है।
491महादंष्ट्रॐ महादंष्ट्राय नमः।Om Mahadamshtraya Namah।जिनकी दंष्ट्राएँ विशाल एवं प्रचण्ड हैं।
492महाबलॐ महाबलाय नमः।Om Mahabalaya Namah।जो अत्यन्त शक्तिशाली एवं बलवान हैं।
493महाभुजॐ महाभुजाय नमः।Om Mahabhujaya Namah।जिनकी भुजाएँ विशाल एवं शक्तिशाली हैं।
494महानादॐ महानादाय नमः।Om Mahanadaya Namah।जिनका दिव्य नाद अत्यन्त गम्भीर एवं शक्तिशाली है।
495महारौद्रॐ महारौद्राय नमः।Om Maharaudraya Namah।जो अधर्म के विनाश के लिए अत्यन्त उग्र हैं।
496महाकायॐ महाकायाय नमः।Om Mahakayaya Namah।जिनका दिव्य शरीर अत्यन्त विशाल एवं विराट है।
497अनाभेर्ब्रह्मणोरूपॐ अनाभेर्ब्रह्मणोरूपाय नमः।Om Anabherbrahmanorupaya Namah।जो नाभि से ब्रह्माण्डीय ब्रह्मस्वरूप तक व्याप्त हैं।
498आगलाद्वैष्णवॐ आगलाद्वैष्णवाय नमः।Om Agaladvaishnavaya Namah।जो पूर्णतः वैष्णव दिव्य स्वरूप से युक्त हैं।
499आशीर्षाद्रन्ध्रमीशानॐ आशीर्षाद्रन्ध्रमीशानाय नमः।Om Ashirshadrandhramishanaya Namah।जो मस्तक से समस्त सूक्ष्म मार्गों तक ईशान रूप में व्याप्त हैं।
500अग्रेसर्वतश्शिवॐ अग्रेसर्वतश्शिवाय नमः।Om Agresarvatashshivaya Namah।जो सर्वत्र, सदैव आगे रहने वाले एवं मंगलमय शिवस्वरूप हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
501नारायणनारसिंहॐ नारायणनारसिंहाय नमः।Om Narayananarasimhaya Namah।जो नारायण एवं नरसिंह के दिव्य संयुक्त स्वरूप हैं।
502नारायणवीरसिंहॐ नारायणवीरसिंहाय नमः।Om Narayanavirasinghaya Namah।जो नारायण के वीर नरसिंह स्वरूप हैं।
503नारायणक्रूरसिंहॐ नारायणक्रूरसिंहाय नमः।Om Narayanakrusimhayai Namah।जो अधर्मियों के लिए अत्यन्त उग्र नरसिंह स्वरूप हैं।
504नारायणदिव्यसिंहॐ नारायणदिव्यसिंहाय नमः।Om Narayanadivyasimhaya Namah।जो नारायण के दिव्य सिंह स्वरूप हैं।
505नारायणव्याघ्रसिंहॐ नारायणव्याघ्रसिंहाय नमः।Om Narayanavyaghrasimhaya Namah।जो व्याघ्र के समान शक्तिशाली नारायण स्वरूप हैं।
506नारायणपुच्छसिंहॐ नारायणपुच्छसिंहाय नमः।Om Narayanapuchchhasimhaya Namah।जो दिव्य सिंह के पूर्ण स्वरूप से युक्त नारायण हैं।
507नारायणपूर्णसिंहॐ नारायणपूर्णसिंहाय नमः।Om Narayanapurnasimhaya Namah।जो पूर्ण एवं सम्पूर्ण नरसिंह स्वरूप हैं।
508नारायणरौद्रसिंहॐ नारायणरौद्रसिंहाय नमः।Om Narayanaraudrasimhaya Namah।जो नारायण के अत्यन्त उग्र एवं रौद्र सिंह स्वरूप हैं।
509भीषणभद्रसिंहॐ भीषणभद्रसिंहाय नमः।Om Bhishanabhadrasimhaya Namah।जो भयंकर होते हुए भी भक्तों के लिए मंगलकारी हैं।
510विह्वलनेत्रसिंहॐ विह्वलनेत्रसिंहाय नमः।Om Vihvalanetra-simhaya Namah।जिनके नेत्र अत्यन्त प्रभावशाली एवं उग्र सिंह स्वरूप हैं।
511बृंहितभूतसिंहॐ बृंहितभूतसिंहाय नमः।Om Brimhitabhutasimhaya Namah।जो अपनी दिव्य गर्जना से समस्त भूतों को प्रभावित करते हैं।
512निर्मलचित्रसिंहॐ निर्मलचित्रसिंहाय नमः।Om Nirmalachitrasimhaya Namah।जो निर्मल एवं अद्भुत सिंह स्वरूप हैं।
513निर्जितकालसिंहॐ निर्जितकालसिंहाय नमः।Om Nirjitakalasimhaya Namah।जो काल को भी जीतने वाले सिंह स्वरूप हैं।
514कल्पितकल्पसिंहॐ कल्पितकल्पसिंहाय नमः।Om Kalpitakalpasimhaya Namah।जो कल्पों के नियन्ता एवं दिव्य सिंह स्वरूप हैं।
515कामदकामसिंहॐ कामदकामसिंहाय नमः।Om Kamadakamasimhaya Namah।जो भक्तों की शुभ इच्छाएँ पूर्ण करने वाले हैं।
516भुवनैकसिंहॐ भुवनैकसिंहाय नमः।Om Bhuvanaikasimhaya Namah।जो समस्त भुवनों में अद्वितीय सिंह स्वरूप हैं।
517विष्णुॐ विष्णवे नमः।Om Vishnave Namah।जो सर्वव्यापक भगवान विष्णु के स्वरूप हैं।
518भविष्णुॐ भविष्णवे नमः।Om Bhavishnave Namah।जो सृष्टि के भविष्य एवं निरन्तर अस्तित्व के आधार हैं।
519सहिष्णुॐ सहिष्णवे नमः।Om Sahishnave Namah।जो अत्यन्त सहनशील एवं धैर्यवान हैं।
520भ्राजिष्णुॐ भ्राजिष्णवे नमः।Om Bhrajishnave Namah।जो अत्यन्त तेजस्वी एवं प्रकाशमान हैं।
521जिष्णुॐ जिष्णवे नमः।Om Jishnave Namah।जो सदैव विजयी एवं अजेय हैं।
522पृथिवीॐ पृथिव्यै नमः।Om Prithivyai Namah।जो पृथ्वी के आधार एवं धारक हैं।
523अन्तरिक्षॐ अन्तरिक्षाय नमः।Om Antarikshaya Namah।जो अन्तरिक्ष में सर्वव्यापक रूप से स्थित हैं।
524पर्वतॐ पर्वताय नमः।Om Parvataya Namah।जो पर्वत के समान स्थिर एवं अचल हैं।
525अरण्यॐ अरण्याय नमः।Om Aranyaya Namah।जो वन एवं प्रकृति में भी व्याप्त हैं।
526कलाकाष्ठाविलिप्तॐ कलाकाष्ठाविलिप्ताय नमः।Om Kalakashtaviliptaya Namah।जो समय की सूक्ष्मतम इकाइयों से परे एवं उनके नियन्ता हैं।
527मुहूर्तप्रहरादिकॐ मुहूर्तप्रहरादिकाय नमः।Om Muhurtapraharadikaya Namah।जो मुहूर्त, प्रहर आदि काल-विभागों के आधार हैं।
528अहोरात्रॐ अहोरात्राय नमः।Om Ahoratraya Namah।जो दिन और रात के परम नियन्ता हैं।
529त्रिसन्ध्याॐ त्रिसन्ध्याय नमः।Om Trisandhyaya Namah।जो तीनों संध्याओं के पवित्र स्वरूप हैं।
530पक्षॐ पक्षाय नमः।Om Pakshaya Namah।जो काल के पक्ष-विभाग के आधार हैं।
531मासॐ मासाय नमः।Om Masaya Namah।जो मास एवं समय के स्वरूप हैं।
532ऋतुॐ ऋतवे नमः।Om Ritave Namah।जो सभी ऋतुओं के नियन्ता एवं आधार हैं।
533वत्सरॐ वत्सराय नमः।Om Vatsaraya Namah।जो वर्ष एवं वार्षिक कालचक्र के स्वरूप हैं।
534युगादिॐ युगादये नमः।Om Yugadaye Namah।जो युगों के आदि एवं मूल कारण हैं।
535युगभेदॐ युगभेदाय नमः।Om Yugabhedaya Namah।जो विभिन्न युगों के विभाजन एवं परिवर्तन के आधार हैं।
536संयुगे युगसन्धिॐ संयुगे युगसन्धिभ्यो नमः।Om Samyuge Yugasandhibhyo Namah।जो युगों के संधिकाल एवं उनके परिवर्तन के नियन्ता हैं।
537नित्यॐ नित्याय नमः।Om Nityaya Namah।जो शाश्वत एवं सदैव विद्यमान हैं।
538नैमित्तिकॐ नैमित्तिकाय नमः।Om Naimittikaya Namah।जो नैमित्तिक सृष्टि एवं परिवर्तन के आधार हैं।
539दैनॐ दैनाय नमः।Om Dainaya Namah।जो दैनिक जीवन एवं कर्मों के आधार हैं।
540महाप्रलयॐ महाप्रलयाय नमः।Om Mahapralayaya Namah।जो महाप्रलय के परम नियन्ता हैं।
541करणॐ करणाय नमः।Om Karanaya Namah।जो समस्त कार्यों के साधन एवं कारण हैं।
542कारणॐ कारणाय नमः।Om Karanaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के मूल कारण हैं।
543कर्तृॐ कर्त्रे नमः।Om Kartre Namah।जो समस्त कर्मों के परम कर्ता हैं।
544भर्तृॐ भर्त्रे नमः।Om Bhartre Namah।जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण करते हैं।
545हर्तृॐ हर्त्रे नमः।Om Hartre Namah।जो अधर्म एवं दुःख का हरण करने वाले हैं।
546ईश्वरॐ ईश्वराय नमः।Om Ishvaraya Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परमेश्वर हैं।
547सत्कर्तृॐ सत्कर्त्रे नमः।Om Satkartre Namah।जो शुभ एवं धर्ममय कर्मों के कर्ता हैं।
548सत्कृतिॐ सत्कृतये नमः।Om Satkritaye Namah।जो पवित्र एवं श्रेष्ठ कर्मों के स्वरूप हैं।
549गोप्तृॐ गोप्त्रे नमः।Om Goptre Namah।जो सम्पूर्ण प्राणियों के रक्षक हैं।
550सच्चिदानन्दविग्रहॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः।Om Sachchidanandavigrahaya Namah।जिनका दिव्य स्वरूप सत्, चित् और आनन्दमय है।
551प्राणिनां प्राणॐ प्राणिनां प्राणाय नमः।Om Praninam Pranaya Namah।जो सभी प्राणियों के जीवन एवं प्राण हैं।
552सर्वदेहिनां प्रत्यगात्माॐ सर्वदेहिनां प्रत्यगात्मने नमः।Om Sarvadehinam Pratyagatmane Namah।जो सभी देहधारियों के अन्तरात्मा हैं।
553सुज्योतिस्ॐ सुज्योतिषे नमः।Om Sujyotishe Namah।जो दिव्य एवं शुभ प्रकाश के स्वरूप हैं।
554परंज्योतिॐ परंज्योतिषे नमः।Om Paramjyotishe Namah।जो परम दिव्य प्रकाश हैं।
555आत्मज्योतिॐ आत्मज्योतिषे नमः।Om Atmajyotishe Namah।जो आत्मा के भीतर स्थित परम प्रकाश हैं।
556सनातनॐ सनातनाय नमः।Om Sanatanaya Namah।जो सनातन एवं शाश्वत हैं।
557ज्योतिस्ॐ ज्योतिषे नमः।Om Jyotishe Namah।जो स्वयं दिव्य ज्योति के स्वरूप हैं।
558लोकस्वरूपॐ लोकस्वरूपाय नमः।Om Lokasvarupaya Namah।जो समस्त लोकों के स्वरूप में विद्यमान हैं।
559ज्योतिॐ ज्योतिषे नमः।Om Jyotishe Namah।जो अज्ञान का नाश करने वाली ज्योति हैं।
560ज्योतिषांपतिॐ ज्योतिषां पतये नमः।Om Jyotisham Pataye Namah।जो सभी ज्योतियों एवं प्रकाशों के स्वामी हैं।
561स्वाहाकारॐ स्वाहाकाराय नमः।Om Svahakaraya Namah।जो यज्ञ में स्वाहा के रूप में पूजित हैं।
562स्वधाकरॐ स्वधाकराय नमः।Om Svadhakaraya Namah।जो पितृयज्ञ में स्वधा के स्वरूप हैं।
563वषट्कारॐ वषट्काराय नमः।Om Vashatkaraya Namah।जो यज्ञ के वषट्कार मंत्र के स्वरूप हैं।
564कृपाकरॐ कृपाकराय नमः।Om Kripakaraya Namah।जो कृपा एवं करुणा के परम स्रोत हैं।
565हन्तकारॐ हन्तकाराय नमः।Om Hantakaraya Namah।जो अधर्म एवं दुष्ट शक्तियों का संहार करते हैं।
566निराकारॐ निराकाराय नमः।Om Nirakaraya Namah।जो भौतिक आकार से परे निराकार परम सत्य हैं।
567वेगाकारॐ वेगाकाराय नमः।Om Vegakaraya Namah।जो अत्यन्त तीव्र गति एवं शक्ति के स्वरूप हैं।
568शङ्करॐ शङ्कराय नमः।Om Shankaraya Namah।जो कल्याण एवं मंगल प्रदान करने वाले हैं।
569अकारादिहकारान्तॐ अकारादिहकारान्ताय नमः।Om Akaradihakarantaya Namah।जो सम्पूर्ण वर्णमाला एवं शब्दतत्त्व में व्याप्त हैं।
570कारॐ काराय नमः।Om Karaya Namah।जो दिव्य अक्षर एवं शब्द के मूल स्वरूप हैं।
571लोककारकॐ लोककारकाय नमः।Om Lokakarakaya Namah।जो लोकों की रचना एवं व्यवस्था करने वाले हैं।
572एकात्माॐ एकात्मने नमः।Om Ekatmane Namah।जो एक परम आत्मस्वरूप हैं।
573अनेकात्माॐ अनेकात्मने नमः।Om Anekatmane Namah।जो अनेक जीवों में आत्मस्वरूप होकर स्थित हैं।
574चतुरात्माॐ चतुरात्मने नमः।Om Chaturatmane Namah।जो चतुर्विध दिव्य आत्मस्वरूप से युक्त हैं।
575चतुर्भुजॐ चतुर्भुजाय नमः।Om Chaturbhujaya Namah।जो चार भुजाओं वाले दिव्य स्वरूप हैं।
576चतुर्मूर्तिॐ चतुर्मूर्तये नमः।Om Chaturmurtaye Namah।जो चार दिव्य रूपों में प्रकट होने वाले हैं।
577चतुर्दंष्ट्रॐ चतुर्दंष्ट्राय नमः।Om Chaturdamshtraya Namah।जो चार दिव्य दंष्ट्राओं वाले उग्र स्वरूप हैं।
578चतुर्वेदमयॐ चतुर्वेदमयाय नमः।Om Chaturvedamayaya Namah।जो चारों वेदों के ज्ञान से पूर्ण हैं।
579उत्तमॐ उत्तमाय नमः।Om Uttamaya Namah।जो सभी में सर्वोत्तम एवं श्रेष्ठ हैं।
580लोकप्रियॐ लोकप्रियाय नमः।Om Lokapriyaya Namah।जो समस्त लोकों में प्रिय एवं पूजनीय हैं।
581लोकगुरुॐ लोकगुरवे नमः।Om Lokagurave Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परम गुरु एवं मार्गदर्शक हैं।
582लोकेशॐ लोकेशाय नमः।Om Lokeshaya Namah।जो सभी लोकों के स्वामी हैं।
583लोकनायकॐ लोकनायकाय नमः।Om Lokanayakaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परम नायक हैं।
584लोकसाक्षीॐ लोकसाक्षिणे नमः।Om Lokasakshine Namah।जो सभी लोकों के साक्षी हैं।
585लोकपतिॐ लोकपतये नमः।Om Lokapataye Namah।जो सम्पूर्ण लोकों के स्वामी एवं रक्षक हैं।
586लोकात्माॐ लोकात्मने नमः।Om Lokatmane Namah।जो सभी लोकों की अन्तरात्मा हैं।
587लोकलोचनॐ लोकलोचनाय नमः।Om Lokalochanaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत के दिव्य नेत्र एवं दृष्टा हैं।
588लोकाधारॐ लोकाधाराय नमः।Om Lokadharaya Namah।जो समस्त लोकों के आधार हैं।
589बृहल्लोकॐ बृहल्लोकाय नमः।Om Brihallokaya Namah।जो विराट एवं विशाल लोकस्वरूप हैं।
590लोकालोकमयॐ लोकालोकमयाय नमः।Om Lokalokamayaya Namah।जो लोक और अलोक दोनों में व्याप्त हैं।
591विभुॐ विभवे नमः।Om Vibhave Namah।जो सर्वव्यापक एवं अनन्त हैं।
592लोककर्ताॐ लोककर्त्रे नमः।Om Lokakartre Namah।जो समस्त लोकों की रचना करने वाले हैं।
593विश्वकर्ताॐ विश्वकर्त्रे नमः।Om Vishvakartre Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के रचयिता हैं।
594कृतावर्तॐ कृतावर्ताय नमः।Om Kritavartaya Namah।जो सृष्टि के चक्र एवं घटनाओं के नियन्ता हैं।
595कृतागमॐ कृतागमाय नमः।Om Kritagamaya Namah।जो शास्त्रों एवं आगमों के आधार एवं रचयिता हैं।
596अनादिॐ अनादये नमः।Om Anadaye Namah।जिनका कोई आदि या प्रारम्भ नहीं है।
597अनन्तॐ अनन्ताय नमः।Om Anantaya Namah।जो अनन्त एवं असीम हैं।
598अभूतॐ अभूताय नमः।Om Abhutaya Namah।जो भौतिक उत्पत्ति से परे परम स्वरूप हैं।
599भूतविग्रहॐ भूतविग्रहाय नमः।Om Bhutavigrahaya Namah।जो समस्त भूत एवं तत्त्वों के दिव्य स्वरूप हैं।
600स्तुतिॐ स्तुतये नमः।Om Stutaye Namah।जो स्वयं स्तुति एवं आराधना के योग्य हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
601स्तुत्यॐ स्तुत्याय नमः।Om Stutyaya Namah।जो स्तुति एवं आराधना के योग्य हैं।
602स्तवप्रीतॐ स्तवप्रीताय नमः।Om Stavapritaya Namah।जो भक्तों की स्तुति से प्रसन्न होते हैं।
603स्तोत्रॐ स्तोत्रे नमः।Om Stotre Namah।जो स्वयं पवित्र स्तोत्र के स्वरूप हैं।
604नेत्रॐ नेत्रे नमः।Om Netre Namah।जो सभी का मार्गदर्शन एवं नेतृत्व करने वाले हैं।
605नियामकॐ नियामकाय नमः।Om Niyamakaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के परम नियन्ता हैं।
606गतिॐ गतये नमः।Om Gataye Namah।जो सभी जीवों की परम गति एवं लक्ष्य हैं।
607मतिॐ मतये नमः।Om Mataye Namah।जो बुद्धि एवं विवेक के स्वरूप हैं।
608पितृॐ पित्रे नमः।Om Pitre Namah।जो समस्त प्राणियों के परम पिता हैं।
609मातृॐ मात्रे नमः।Om Matre Namah।जो समस्त जगत की परम माता के समान पालन करते हैं।
610गुरुॐ गुरुवे नमः।Om Guruve Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परम गुरु एवं मार्गदर्शक हैं।
611सखिॐ सख्ये नमः।Om Sakhye Namah।जो भक्तों के सच्चे मित्र एवं सहायक हैं।
612सुहृदात्मरूपॐ सुहृदश्चात्मरूपाय नमः।Om Suhridashchatmarupaya Namah।जो सभी प्राणियों के आत्मरूप एवं परम हितैषी हैं।
613मन्त्ररूपॐ मन्त्ररूपाय नमः।Om Mantrarupaya Namah।जो पवित्र मन्त्रों के दिव्य स्वरूप हैं।
614अस्त्ररूपॐ अस्त्ररूपाय नमः।Om Astrarupaya Namah।जो दिव्य अस्त्रों के स्वरूप होकर अधर्म का नाश करते हैं।
615बहुरूपॐ बहुरूपाय नमः।Om Bahurupaya Namah।जो अनेक दिव्य रूप धारण करने वाले हैं।
616रूपॐ रूपाय नमः।Om Rupaya Namah।जो समस्त दिव्य रूपों के मूल स्वरूप हैं।
617पञ्चरूपधरॐ पञ्चरूपधराय नमः।Om Pancharupadharaya Namah।जो पाँच दिव्य रूप धारण करने वाले हैं।
618भद्ररूपॐ भद्ररूपाय नमः।Om Bhadrarupaya Namah।जो मंगलमय एवं कल्याणकारी स्वरूप हैं।
619रूढॐ रूढाय नमः।Om Rudhaya Namah।जो दृढ़ता से सर्वत्र प्रतिष्ठित हैं।
620योगरूपॐ योगरूपाय नमः।Om Yogarupaya Namah।जो योग एवं आध्यात्मिक एकत्व के स्वरूप हैं।
621योगीॐ योगिने नमः।Om Yogine Namah।जो परम योगी एवं आत्मसंयमी हैं।
622समरूपॐ समरूपाय नमः।Om Samarupaya Namah।जो सभी में समान रूप से विद्यमान हैं।
623योगॐ योगाय नमः।Om Yogaya Namah।जो परम योग एवं आत्मा-परमात्मा के मिलन के स्वरूप हैं।
624योगपीठस्थितॐ योगपीठस्थिताय नमः।Om Yogapithasthitaya Namah।जो योगपीठ में दिव्य रूप से स्थित हैं।
625योगगम्यॐ योगगम्याय नमः।Om Yogagamyaya Namah।जिन्हें योग एवं साधना द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
626सौम्यॐ सौम्याय नमः।Om Saumyaya Namah।जो शान्त, कोमल एवं सौम्य स्वरूप हैं।
627ध्यानगम्यॐ ध्यानगम्याय नमः।Om Dhyanagamyaya Namah।जिन्हें ध्यान एवं एकाग्रता द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
628ध्यायिन्ॐ ध्यायिने नमः।Om Dhyayine Namah।जो स्वयं ध्यानमग्न एवं ध्यान के स्वरूप हैं।
629ध्येयगम्यॐ ध्येयगम्याय नमः।Om Dhyeyagamyaya Namah।जो ध्यान के परम लक्ष्य के रूप में प्राप्त होते हैं।
630धामन्ॐ धाम्ने नमः।Om Dhamne Namah।जो परम दिव्य धाम एवं प्रकाश के स्वरूप हैं।
631धामाधिपतिॐ धामाधिपतये नमः।Om Dhamadhipataye Namah।जो सभी दिव्य धामों के स्वामी हैं।
632धराधरॐ धराधराय नमः।Om Dharadharaya Namah।जो पृथ्वी एवं समस्त जगत को धारण करने वाले हैं।
633धर्मॐ धर्माय नमः।Om Dharmaya Namah।जो स्वयं धर्म एवं धार्मिकता के स्वरूप हैं।
634धारणाभिरतॐ धारणाभिरताय नमः।Om Dharanabhirataya Namah।जो धारण, पालन एवं संरक्षण में सदैव तत्पर हैं।
635धाताॐ धात्रे नमः।Om Dhatre Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के धारणकर्ता हैं।
636सन्धाताॐ सन्धात्रे नमः।Om Sandhatre Namah।जो सभी तत्वों एवं शक्तियों को जोड़ने वाले हैं।
637विधाताॐ विधात्रे नमः।Om Vidhatre Namah।जो सृष्टि की व्यवस्था एवं विधि निर्धारित करने वाले हैं।
638धरॐ धराय नमः।Om Dharaya Namah।जो समस्त जगत को धारण करने वाले हैं।
639दामोदरॐ दामोदराय नमः।Om Damodaraya Namah।जो भगवान विष्णु के दामोदर स्वरूप हैं।
640दान्तॐ दान्ताय नमः।Om Dantaya Namah।जो पूर्ण इन्द्रियसंयम एवं आत्मसंयम वाले हैं।
641दानवान्तकरॐ दानवांतकराय नमः।Om Danavamtakaraya Namah।जो दानवों एवं अधर्मियों का संहार करने वाले हैं।
642संसारवैद्यॐ संसारवैद्याय नमः।Om Samsaravaidyaya Namah।जो संसाररूपी रोग के परम चिकित्सक हैं।
643भेषजॐ भेषजाय नमः।Om Bheshajaya Namah।जो दुःख एवं संसाररूपी रोग की औषधि हैं।
644सीरध्वजॐ सीरध्वजाय नमः।Om Siradhvajaya Namah।जो दिव्य ध्वज एवं शक्ति के स्वरूप हैं।
645शीतॐ शीताय नमः।Om Shitaya Namah।जो शीतलता एवं शान्ति प्रदान करने वाले हैं।
646वातॐ वाताय नमः।Om Vataya Namah।जो वायु एवं प्राणशक्ति के स्वरूप हैं।
647प्रमितॐ प्रमिताय नमः।Om Pramitaya Namah।जो पूर्ण ज्ञान एवं प्रमाण से युक्त हैं।
648सारस्वतॐ सारस्वताय नमः।Om Sarasvataya Namah।जो ज्ञान, विद्या एवं वाणी के स्वरूप हैं।
649संसारनाशनॐ संसारनाशनाय नमः।Om Samsaranashanaya Namah।जो संसार के बन्धन एवं दुःख का नाश करते हैं।
650अक्षमालिन्ॐ अक्षमालिने नमः।Om Akshamaline Namah।जो पवित्र अक्ष-माला धारण करने वाले हैं।
651असिधर्मधरॐ असिधर्मधराय नमः।Om Asidharmadharaya Namah।जो धर्म की रक्षा हेतु दिव्य अस्त्र धारण करते हैं।
652षट्कर्मनिरतॐ षट्कर्मनिरताय नमः।Om Shatkarmanirataya Namah।जो छह प्रकार के पवित्र कर्मों में स्थित हैं।
653विकर्मॐ विकर्माय नमः।Om Vikarmaya Namah।जो कर्म के सूक्ष्म एवं गूढ़ स्वरूप के ज्ञाता हैं।
654सुकर्मॐ सुकर्माय नमः।Om Sukarmaya Namah।जो शुभ एवं पुण्य कर्मों के स्वरूप हैं।
655परकर्मविधायिन्ॐ परकर्मविधायिने नमः।Om Parakarmavidhayine Namah।जो दूसरों के कर्मों के फल एवं व्यवस्था के नियन्ता हैं।
656सुशर्मन्ॐ सुशर्मणे नमः।Om Susharmane Namah।जो परम सुख, शान्ति एवं कल्याण प्रदान करते हैं।
657मन्मथॐ मन्मथाय नमः।Om Manmathaya Namah।जो मन को आकर्षित करने वाली दिव्य शक्ति के स्वरूप हैं।
658वर्मन्ॐ वर्माय नमः।Om Varmaya Namah।जो भक्तों के दिव्य कवच एवं रक्षक हैं।
659वर्मिन्ॐ वर्मिणे नमः।Om Varmine Namah।जो दिव्य कवच से युक्त एवं संरक्षक हैं।
660करिचर्मवसनॐ करिचर्मवसनाय नमः।Om Karicharmavasanaya Namah।जो गजरूपी चर्म धारण करने वाले दिव्य स्वरूप हैं।
661करालवदनॐ करालवदनाय नमः।Om Karalavadanaya Namah।जिनका मुख अत्यन्त उग्र एवं भयङ्कर है।
662कविॐ कवये नमः।Om Kavaye Namah।जो सर्वज्ञ एवं दिव्य दृष्टि वाले कवि हैं।
663पद्मगर्भॐ पद्मगर्भाय नमः।Om Padmagarbhaya Namah।जो कमल के समान पवित्र एवं सृष्टि के आधार हैं।
664भूतगर्भॐ भूतगर्भाय नमः।Om Bhutagarbhaya Namah।जिनमें समस्त भूत एवं प्राणी स्थित हैं।
665घृणानिधिॐ घृणानिधये नमः।Om Ghrinanidhaye Namah।जो करुणा एवं दया के परम भण्डार हैं।
666ब्रह्मगर्भॐ ब्रह्मगर्भाय नमः।Om Brahmagarbhaya Namah।जिनमें परम ब्रह्म का दिव्य तत्त्व स्थित है।
667गर्भॐ गर्भाय नमः।Om Garbhaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के मूल गर्भ एवं आधार हैं।
668बृहद्गर्भॐ बृहद्गर्भाय नमः।Om Brihadgarbhaya Namah।जिनमें सम्पूर्ण विशाल ब्रह्माण्ड समाहित है।
669धूर्जटॐ धूर्जटाय नमः।Om Dhurjataya Namah।जो जटाधारी दिव्य एवं उग्र स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
670विश्वगर्भॐ विश्वगर्भाय नमः।Om Vishvagarbhaya Namah।जिनमें सम्पूर्ण विश्व गर्भस्थ एवं स्थित है।
671श्रीगर्भॐ श्रीगर्भाय नमः।Om Shrigarbhaya Namah।जो श्री, समृद्धि एवं लक्ष्मी के परम आधार हैं।
672जितारिॐ जितारये नमः।Om Jitaraye Namah।जो सभी शत्रुओं एवं अधर्म पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
673हिरण्यगर्भॐ हिरण्यगर्भाय नमः।Om Hiranyagarbhaya Namah।जो स्वर्णमय ब्रह्माण्डीय गर्भ एवं सृष्टि के मूल हैं।
674हिरण्यकवचॐ हिरण्यकवचाय नमः।Om Hiranyakavachaya Namah।जो स्वर्णमय दिव्य कवच से सुरक्षित एवं तेजस्वी हैं।
675हिरण्यवर्णदेहॐ हिरण्यवर्णदेहाय नमः।Om Hiranyavarnadehaya Namah।जिनका दिव्य शरीर स्वर्ण के समान तेजस्वी है।
676हिरण्याक्षविनाशिन्ॐ हिरण्याक्षविनाशिने नमः।Om Hiranyakshavinashine Namah।जो हिरण्याक्ष जैसे असुरों का विनाश करने वाले हैं।
677हिरण्यकशिपोर्हन्तृॐ हिरण्यकशिपोर्हन्त्रे नमः।Om Hiranyakashiporhantre Namah।जो हिरण्यकशिपु का संहार करने वाले भगवान नरसिंह हैं।
678हिरण्यनयनॐ हिरण्यनयनाय नमः।Om Hiranyanayanaya Namah।जिनके नेत्र स्वर्ण के समान दिव्य एवं तेजस्वी हैं।
679हिरण्यरेतस्ॐ हिरण्यरेतसे नमः।Om Hiranyaretase Namah।जो दिव्य सृजनशक्ति एवं तेज के स्वरूप हैं।
680हिरण्यवदनॐ हिरण्यवदनाय नमः।Om Hiranyavadanaya Namah।जिनका मुख स्वर्ण के समान दिव्य तेज से युक्त है।
681हिरण्यशृङ्गॐ हिरण्यशृङ्गाय नमः।Om Hiranyashringaya Namah।जो स्वर्णमय एवं दिव्य शृंग वाले स्वरूप हैं।
682निश्शृङ्गॐ निश्शृङ्गाय नमः।Om Nishshringaya Namah।जो शृंग से रहित परम निराकार तत्त्व के स्वरूप हैं।
683शृङ्गिन्ॐ शृङ्गिणे नमः।Om Shringine Namah।जो दिव्य शृंग से युक्त एवं शक्तिशाली हैं।
684भैरवॐ भैरवाय नमः।Om Bhairavaya Namah।जो अत्यन्त उग्र एवं भय का नाश करने वाले हैं।
685सुकेशॐ सुकेशाय नमः।Om Sukeshaya Namah।जिनके दिव्य एवं सुन्दर केश हैं।
686भीषणॐ भीषणाय नमः।Om Bhishanaya Namah।जो अधर्मियों के लिए अत्यन्त भयंकर हैं।
687आन्त्रमालिन्ॐ आन्त्रमालिने नमः।Om Antramaline Namah।जो उग्र नरसिंह रूप में आन्त्र-माला धारण करने वाले हैं।
688चण्डॐ चण्डाय नमः।Om Chandaya Namah।जो अत्यन्त प्रचण्ड एवं उग्र स्वरूप हैं।
689रुण्डमालॐ रुण्डमालाय नमः।Om Rundamalaya Namah।जो उग्र रूप में रुण्डमाला धारण करने वाले हैं।
690दण्डधरॐ दण्डधराय नमः।Om Dandadharaya Namah।जो दण्ड धारण करके अधर्म का नाश करते हैं।
691अखण्डतत्वरूपॐ अखण्डतत्वरूपाय नमः।Om Akhandatatvarupaya Namah।जो अखण्ड एवं परम सत्य के स्वरूप हैं।
692कमण्डलुधरॐ कमण्डलुधराय नमः।Om Kamandaludharaya Namah।जो कमण्डलु धारण करने वाले दिव्य स्वरूप हैं।
693खण्डसिंहॐ खण्डसिंहाय नमः।Om Khandasimhaya Namah।जो उग्र एवं विशिष्ट सिंह स्वरूप हैं।
694सत्यसिंहॐ सत्यसिंहाय नमः।Om Satyasimhaya Namah।जो सत्य के रक्षक एवं सत्यस्वरूप सिंह हैं।
695श्वेतसिंहॐ श्वेतसिंहाय नमः।Om Shvetasimhaya Namah।जो श्वेत एवं पवित्र सिंह स्वरूप हैं।
696पीतसिंहॐ पीतसिंहाय नमः।Om Pitasimhaya Namah।जो पीतवर्ण दिव्य सिंह स्वरूप हैं।
697नीलसिंहॐ नीलसिंहाय नमः।Om Nilasimhaya Namah।जो नीलवर्ण एवं दिव्य सिंह स्वरूप हैं।
698नीलॐ नीलाय नमः।Om Nilaya Namah।जो नीलवर्ण एवं गम्भीर दिव्य स्वरूप वाले हैं।
699रक्तसिंहॐ रक्तसिंहाय नमः।Om Raktasimhaya Namah।जो रक्तवर्ण एवं उग्र सिंह स्वरूप हैं।
700हारिद्रसिंहॐ हारिद्रसिंहाय नमः।Om Haridrasimhaya Namah।जो हरिद्रा अर्थात पीतवर्ण के दिव्य सिंह स्वरूप हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
701हारिद्रॐ हारिद्राय नमः।Om Haridraya Namah।जो हरिद्रा के समान पवित्र एवं मंगलमय हैं।
702कृष्णसिंहॐ कृष्णसिंहाय नमः।Om Krishnasimhaya Namah।जो कृष्णवर्ण एवं दिव्य सिंह स्वरूप हैं।
703धूम्रसिंहॐ धूम्रसिंहाय नमः।Om Dhumrasimhaya Namah।जो धूम्रवर्ण एवं उग्र सिंह स्वरूप हैं।
704मञ्जुसिंहॐ मञ्जुसिंहाय नमः।Om Manjusimhaya Namah।जो सुन्दर एवं मनोहर सिंह स्वरूप हैं।
705महारूपॐ महारूपाय नमः।Om Maharupaya Namah।जो विराट एवं महान दिव्य स्वरूप वाले हैं।
706दिव्यरूपॐ दिव्यरूपाय नमः।Om Divyarupaya Namah।जो अत्यन्त दिव्य एवं अलौकिक स्वरूप वाले हैं।
707सर्वरूपॐ सर्वरूपाय नमः।Om Sarvarupaya Namah।जो सभी रूपों में विद्यमान हैं।
708बहुरूपॐ बहुरूपाय नमः।Om Bahurupaya Namah।जो अनेक दिव्य रूप धारण करते हैं।
709विश्वरूपॐ विश्वरूपाय नमः।Om Vishvarupaya Namah।जिनका स्वरूप सम्पूर्ण विश्व के समान विराट है।
710विरूपॐ विरूपाय नमः।Om Virupaya Namah।जो सामान्य रूपों से परे अद्भुत स्वरूप वाले हैं।
711सुरूपॐ सुरूपाय नमः।Om Surupaya Namah।जो अत्यन्त सुन्दर एवं दिव्य स्वरूप वाले हैं।
712उग्ररूपॐ उग्ररूपाय नमः।Om Ugrarupaya Namah।जो अधर्म के विनाश के लिए उग्र रूप धारण करते हैं।
713सौम्यरूपॐ सौम्यरूपाय नमः।Om Saumyarupaya Namah।जो भक्तों के लिए शान्त एवं सौम्य स्वरूप हैं।
714घोररूपॐ घोररूपाय नमः।Om Ghorarupaya Namah।जो दुष्टों के लिए अत्यन्त भयङ्कर स्वरूप हैं।
715शान्तिरूपॐ शान्तिरूपाय नमः।Om Shantirupaya Namah।जो परम शान्ति के स्वरूप हैं।
716ज्ञानरूपॐ ज्ञानरूपाय नमः।Om Jnanarupaya Namah।जो परम ज्ञान एवं आत्मबोध के स्वरूप हैं।
717आनन्दरूपॐ आनन्दरूपाय नमः।Om Anandarupaya Namah।जो परम आनन्द के स्वरूप हैं।
718ब्रह्मरूपॐ ब्रह्मरूपाय नमः।Om Brahmarupaya Namah।जो परम ब्रह्म के दिव्य स्वरूप हैं।
719विष्णुरूपॐ विष्णुरूपाय नमः।Om Vishnurupaya Namah।जो भगवान विष्णु के स्वरूप हैं।
720रुद्ररूपॐ रुद्ररूपाय नमः।Om Rudrarupaya Namah।जो रुद्र के उग्र एवं शक्तिशाली स्वरूप हैं।
721शिवरूपॐ शिवरूपाय नमः।Om Shivarupaya Namah।जो मंगल एवं कल्याण के शिवस्वरूप हैं।
722शक्तिरूपॐ शक्तिरूपाय नमः।Om Shaktirupaya Namah।जो समस्त दिव्य शक्ति के स्वरूप हैं।
723कालरूपॐ कालरूपाय नमः।Om Kalarupaya Namah।जो काल के परम एवं अजेय स्वरूप हैं।
724महाकालरूपॐ महाकालरूपाय नमः।Om Mahakalarupaya Namah।जो महाकाल के समान प्रचण्ड एवं शक्तिशाली हैं।
725मृत्युञ्जयॐ मृत्युञ्जयाय नमः।Om Mrityunjayaya Namah।जो मृत्यु पर विजय प्रदान करने वाले हैं।
726अमृतरूपॐ अमृतरूपाय नमः।Om Amritarupaya Namah।जो अमरत्व एवं अमृत के स्वरूप हैं।
727अक्षरॐ अक्षराय नमः।Om Aksharaya Namah।जो अविनाशी एवं शाश्वत हैं।
728अव्ययॐ अव्ययाय नमः।Om Avyayaya Namah।जिनका कभी क्षय नहीं होता।
729अविनाशीॐ अविनाशिने नमः।Om Avinashine Namah।जो पूर्णतः अविनाशी एवं शाश्वत हैं।
730अचलॐ अचलाय नमः।Om Achalaya Namah।जो अचल, स्थिर एवं अडिग हैं।
731स्थिरॐ स्थिराय नमः।Om Sthiraya Namah।जो सदैव स्थिर एवं दृढ़ रहते हैं।
732ध्रुवॐ ध्रुवाय नमः।Om Dhruvaya Namah।जो ध्रुव के समान स्थिर एवं शाश्वत हैं।
733नित्यॐ नित्याय नमः।Om Nityaya Namah।जो सदैव विद्यमान एवं सनातन हैं।
734शाश्वतॐ शाश्वताय नमः।Om Shashvataya Namah।जो सदा रहने वाले एवं अविनाशी हैं।
735सनातनॐ सनातनाय नमः।Om Sanatanaya Namah।जो अनादि एवं सनातन परम सत्य हैं।
736पुरातनॐ पुरातनाय नमः।Om Puratanaya Namah।जो सृष्टि से भी प्राचीन एवं आदि स्वरूप हैं।
737आदिपुरुषॐ आदिपुरुषाय नमः।Om Adipurushaya Namah।जो समस्त सृष्टि के आदि पुरुष हैं।
738पुरुषोत्तमॐ पुरुषोत्तमाय नमः।Om Purushottamaya Namah।जो सभी पुरुषों में सर्वोत्तम परम पुरुष हैं।
739परमपुरुषॐ परमपुरुषाय नमः।Om Paramapurushaya Namah।जो परम दिव्य पुरुष के स्वरूप हैं।
740महापुरुषॐ महापुरुषाय नमः।Om Mahapurushaya Namah।जो महान दिव्य पुरुष एवं परमात्मा हैं।
741पुरुषसिंहॐ पुरुषसिंहाय नमः।Om Purushasimhaya Namah।जो पुरुषों में सिंह के समान श्रेष्ठ एवं पराक्रमी हैं।
742नृकेसरीॐ नृकेसरिणे नमः।Om Nrikesarine Namah।जो नर एवं सिंह के अद्भुत संयुक्त स्वरूप हैं।
743नरसिंहॐ नरसिंहाय नमः।Om Narasimhaya Namah।जो भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार हैं।
744सिंहवक्त्रॐ सिंहवक्त्राय नमः।Om Simhavaktraya Namah।जिनका मुख सिंह के समान उग्र एवं शक्तिशाली है।
745सिंहनादॐ सिंहनादाय नमः।Om Simhanadaya Namah।जिनकी गर्जना सिंह के समान प्रचण्ड है।
746सिंहदंष्ट्रॐ सिंहदंष्ट्राय नमः।Om Simhadamshtraya Namah।जिनकी दंष्ट्राएँ सिंह के समान तीक्ष्ण हैं।
747सिंहनखॐ सिंहनखाय नमः।Om Simhanakhaya Namah।जिनके नख सिंह के समान शक्तिशाली हैं।
748सिंहकेशरॐ सिंहकेशराय नमः।Om Simhakesharaya Namah।जिनके केश सिंह की अयाल के समान हैं।
749सिंहकन्धरॐ सिंहकन्धराय नमः।Om Simhakandharaya Namah।जिनके कन्धे सिंह के समान शक्तिशाली हैं।
750सिंहस्कन्धॐ सिंहस्कन्धाय नमः।Om Simhaskandhaya Namah।जिनके स्कन्ध अत्यन्त विशाल एवं बलवान हैं।
751सिंहभुजॐ सिंहभुजाय नमः।Om Simhabhujaya Namah।जिनकी भुजाएँ सिंह के समान शक्तिशाली हैं।
752सिंहपादॐ सिंहपादाय नमः।Om Simhapadaya Namah।जिनके चरण सिंह के समान दृढ़ एवं शक्तिशाली हैं।
753सिंहगतिॐ सिंहगतये नमः।Om Simhagataye Namah।जिनकी गति सिंह के समान तीव्र एवं प्रभावशाली है।
754सिंहवीर्यॐ सिंहवीर्याय नमः।Om Simhaviryaya Namah।जिनका पराक्रम सिंह के समान महान है।
755सिंहबलॐ सिंहबलाय नमः।Om Simhabalaya Namah।जो सिंह के समान महान बल वाले हैं।
756सिंहतेजस्ॐ सिंहतेजसे नमः।Om Simhatejase Namah।जिनका तेज सिंह के समान प्रचण्ड है।
757सिंहप्रभॐ सिंहप्रभाय नमः।Om Simhaprabhaya Namah।जो सिंह के समान दिव्य प्रभा से युक्त हैं।
758सिंहस्वरॐ सिंहस्वराय नमः।Om Simhasvaraya Namah।जिनकी वाणी सिंह की गर्जना के समान गम्भीर है।
759सिंहवाहनॐ सिंहवाहनाय नमः।Om Simhavahanaya Namah।जो सिंह के समान दिव्य वाहन एवं गति के स्वरूप हैं।
760सिंहासनस्थितॐ सिंहासनस्थिताय नमः।Om Simhasanasthitaya Namah।जो दिव्य सिंहासन पर विराजमान हैं।
761सिंहेश्वरॐ सिंहेश्वराय नमः।Om Simheshvaraya Namah।जो सिंहस्वरूप शक्तियों के परमेश्वर हैं।
762सिंहराजॐ सिंहराजाय नमः।Om Simharajaya Namah।जो सिंहों के राजा के समान सर्वोच्च हैं।
763सिंहाधिपॐ सिंहाधिपाय नमः।Om Simhadhipaya Namah।जो सिंहस्वरूप शक्तियों के अधिपति हैं।
764सिंहवीरॐ सिंहवीराय नमः।Om Simhaviraya Namah।जो महान सिंह-वीर एवं पराक्रमी हैं।
765सिंहकेतुॐ सिंहकेतवे नमः।Om Simhaketave Namah।जो सिंह के समान विजय एवं पराक्रम के प्रतीक हैं।
766सिंहध्वजॐ सिंहध्वजाय नमः।Om Simhadhvajaya Namah।जिनका ध्वज सिंह के समान विजय का प्रतीक है।
767सिंहस्वरूपॐ सिंहस्वरूपाय नमः।Om Simhasvarupaya Namah।जो स्वयं परम सिंह स्वरूप हैं।
768सिंहमूर्तिॐ सिंहमूर्तये नमः।Om Simhamurtaye Namah।जो दिव्य सिंह मूर्ति के रूप में पूजित हैं।
769सिंहात्माॐ सिंहात्मने नमः।Om Simhatmane Namah।जिनमें सिंह की दिव्य शक्ति आत्मरूप से स्थित है।
770सिंहभावनॐ सिंहभावनाय नमः।Om Simhabhavanaya Namah।जो सिंहस्वरूप दिव्य शक्ति को धारण एवं प्रकट करते हैं।
771सिंहप्राणॐ सिंहप्राणाय नमः।Om Simhapranaya Namah।जो सिंह के समान प्रचण्ड जीवनशक्ति वाले हैं।
772सिंहचित्तॐ सिंहचित्ताय नमः।Om Simhachittaya Namah।जिनका चित्त सिंह के समान निर्भीक एवं दृढ़ है।
773सिंहधैर्यॐ सिंहधैर्याय नमः।Om Simhadhairyaya Namah।जो सिंह के समान असीम धैर्य रखते हैं।
774सिंहपराक्रमॐ सिंहपराक्रमाय नमः।Om Simhaparakramaya Namah।जिनका पराक्रम सिंह के समान अद्भुत है।
775सिंहविक्रमॐ सिंहविक्रमाय नमः।Om Simhavikramaya Namah।जो सिंह के समान महान विक्रम एवं वीरता वाले हैं।
776सिंहजयॐ सिंहजयाय नमः।Om Simhajayaya Namah।जो सदैव विजयी एवं अजेय हैं।
777सिंहभद्रॐ सिंहभद्राय नमः।Om Simhabhadraya Namah।जो सिंह के उग्र रूप में भी भक्तों के लिए मंगलकारी हैं।
778सिंहमङ्गलॐ सिंहमङ्गलाय नमः।Om Simhamangalaya Namah।जो भक्तों के लिए परम मंगल एवं कल्याणकारी हैं।
779सिंहशरणॐ सिंहशरणाय नमः।Om Simhasharanaya Namah।जो भयभीत भक्तों के परम आश्रय हैं।
780सिंहाभयप्रदॐ सिंहाभयप्रदाय नमः।Om Simhabhayapradaya Namah।जो भक्तों को निर्भयता प्रदान करते हैं।
781सिंहदुःखहरॐ सिंहदुःखहराय नमः।Om Simhaduhkhaharaya Namah।जो भक्तों के दुःखों का नाश करते हैं।
782सिंहपापनाशनॐ सिंहपापनाशनाय नमः।Om Simhapapanashanaya Namah।जो पाप एवं अधर्म का नाश करते हैं।
783सिंहमोक्षदॐ सिंहमोक्षदाय नमः।Om Simhamokshadaya Namah।जो भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं।
784सिंहज्ञानदॐ सिंहज्ञानदाय नमः।Om Simhajnanadaya Namah।जो दिव्य ज्ञान एवं आत्मबोध प्रदान करते हैं।
785सिंहसिद्धिदॐ सिंहसिद्धिदाय नमः।Om Simhasiddhidaya Namah।जो भक्तों को सिद्धियाँ प्रदान करने वाले हैं।
786सिंहवरदॐ सिंहवरदाय नमः।Om Simhavaradaya Namah।जो भक्तों को शुभ वरदान प्रदान करते हैं।
787सिंहकामदॐ सिंहकामदाय नमः।Om Simhakamadaya Namah।जो भक्तों की शुभ इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।
788सिंहसम्पत्प्रदॐ सिंहसम्पत्प्रदाय नमः।Om Simhasampatpradaya Namah।जो धन, समृद्धि एवं ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
789सिंहश्रीप्रदॐ सिंहश्रीप्रदाय नमः।Om Simhashripradaya Namah।जो श्री एवं सौभाग्य प्रदान करने वाले हैं।
790सिंहसौख्यप्रदॐ सिंहसौख्यप्रदाय नमः।Om Simhasaukhyapradaya Namah।जो सुख एवं शान्ति प्रदान करते हैं।
791सिंहआरोग्यदॐ सिंहआरोग्यदाय नमः।Om Simha-arogyadaya Namah।जो आरोग्य एवं स्वास्थ्य प्रदान करने वाले हैं।
792सिंहबलप्रदॐ सिंहबलप्रदाय नमः।Om Simhabalapradaya Namah।जो शक्ति एवं साहस प्रदान करते हैं।
793सिंहधैर्यप्रदॐ सिंहधैर्यप्रदाय नमः।Om Simhadhairyapradaya Namah।जो भक्तों को धैर्य एवं निर्भीकता प्रदान करते हैं।
794सिंहविजयप्रदॐ सिंहविजयप्रदाय नमः।Om Simhavijayapradaya Namah।जो विजय एवं सफलता प्रदान करते हैं।
795सिंहयशप्रदॐ सिंहयशप्रदाय नमः।Om Simhayashapradaya Namah।जो यश एवं कीर्ति प्रदान करते हैं।
796सिंहकीर्तिप्रदॐ सिंहकीर्तिप्रदाय नमः।Om Simhakirtipradaya Namah।जो भक्तों को प्रसिद्धि एवं कीर्ति प्रदान करते हैं।
797सिंहमङ्गलप्रदॐ सिंहमङ्गलप्रदाय नमः।Om Simhamangalapradaya Namah।जो सभी प्रकार का मंगल प्रदान करते हैं।
798सिंहकल्याणदॐ सिंहकल्याणदाय नमः।Om Simhakalyanadaya Namah।जो भक्तों का कल्याण करने वाले हैं।
799सिंहशान्तिदॐ सिंहशान्तिदाय नमः।Om Simhashantidaya Namah।जो मन एवं जीवन में शान्ति प्रदान करते हैं।
800सिंहप्रसन्नॐ सिंहप्रसन्नाय नमः।Om Simhaprasannaya Namah।जो भक्तों पर प्रसन्न होकर कृपा करने वाले हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
801प्रसन्नवदनॐ प्रसन्नवदनाय नमः।Om Prasannavadanaya Namah।जिनका मुख सदैव प्रसन्न एवं दिव्य है।
802प्रसन्नात्माॐ प्रसन्नात्मने नमः।Om Prasannatmane Namah।जो निर्मल एवं प्रसन्न आत्मस्वरूप हैं।
803प्रसादॐ प्रसादाय नमः।Om Prasadaya Namah।जो भक्तों पर कृपा एवं अनुग्रह करने वाले हैं।
804प्रसादकरॐ प्रसादकराय नमः।Om Prasadakaraya Namah।जो दिव्य कृपा एवं प्रसन्नता प्रदान करते हैं।
805करुणाकरॐ करुणाकराय नमः।Om Karunakaraya Namah।जो करुणा एवं दया के परम स्रोत हैं।
806दयामयॐ दयामयाय नमः।Om Dayamayaya Namah।जो पूर्णतः दया एवं करुणा से परिपूर्ण हैं।
807दयासागरॐ दयासागराय नमः।Om Dayasagaraya Namah।जो असीम करुणा के सागर हैं।
808भक्तवत्सलॐ भक्तवत्सलाय नमः।Om Bhaktavatsalaya Namah।जो अपने भक्तों से अत्यन्त प्रेम करते हैं।
809भक्तप्रियॐ भक्तप्रियाय नमः।Om Bhaktapriyaya Namah।जो भक्तों को अत्यन्त प्रिय मानते हैं।
810भक्तपालकॐ भक्तपालकाय नमः।Om Bhaktapalakaya Namah।जो अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं।
811भक्तरक्षकॐ भक्तरक्षकाय नमः।Om Bhaktarakshakaya Namah।जो भक्तों को सभी संकटों से बचाते हैं।
812भक्ताभयप्रदॐ भक्ताभयप्रदाय नमः।Om Bhaktabhayapradaya Namah।जो भक्तों को निर्भयता प्रदान करते हैं।
813भक्तकामदॐ भक्तकामदाय नमः।Om Bhaktakamadaya Namah।जो भक्तों की शुभ इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।
814भक्तसिद्धिप्रदॐ भक्तसिद्धिप्रदाय नमः।Om Bhaktasiddhipradaya Namah।जो भक्तों को सिद्धि एवं सफलता प्रदान करते हैं।
815भक्तमोक्षदॐ भक्तमोक्षदाय नमः।Om Bhaktamokshadaya Namah।जो भक्तों को मोक्ष प्रदान करने वाले हैं।
816भक्तज्ञानप्रदॐ भक्तज्ञानप्रदाय नमः।Om Bhaktajnanapradaya Namah।जो भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं।
817भक्तानुग्रहकर्ताॐ भक्तानुग्रहकर्त्रे नमः।Om Bhaktanugrahakartre Namah।जो भक्तों पर विशेष कृपा एवं अनुग्रह करते हैं।
818शरणागतवत्सलॐ शरणागतवत्सलाय नमः।Om Sharanagatavatsalaya Namah।जो शरण में आए भक्तों पर प्रेमपूर्वक कृपा करते हैं।
819शरण्यॐ शरण्याय नमः।Om Sharanyaya Namah।जो सभी प्राणियों के परम आश्रय हैं।
820शरणप्रदॐ शरणप्रदाय नमः।Om Sharanapradaya Namah।जो भक्तों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं।
821अनाथनाथॐ अनाथनाथाय नमः।Om Anathanathaya Namah।जो असहाय एवं अनाथों के परम नाथ हैं।
822दीनबन्धुॐ दीनबन्धवे नमः।Om Dinabandhave Namah।जो दीन एवं दुःखी प्राणियों के सच्चे बन्धु हैं।
823दीनदयालुॐ दीनदयालवे नमः।Om Dinadayalave Namah।जो दीनों पर विशेष दया करने वाले हैं।
824अनाथरक्षकॐ अनाथरक्षकाय नमः।Om Anatharakshakaya Namah।जो असहायों एवं अनाथों की रक्षा करते हैं।
825आपदुद्धारकॐ आपदुद्धारकाय नमः।Om Apaduddharakaya Namah।जो संकट में पड़े भक्तों का उद्धार करते हैं।
826संकटमोचनॐ संकटमोचनाय नमः।Om Sankatamochanaya Namah।जो सभी संकटों और बाधाओं को दूर करते हैं।
827भयनाशनॐ भयनाशनाय नमः।Om Bhayanashanaya Namah।जो सभी प्रकार के भय का नाश करते हैं।
828शोकनाशनॐ शोकनाशनाय नमः।Om Shokanashanaya Namah।जो दुःख एवं शोक को दूर करने वाले हैं।
829दुःखहर्ताॐ दुःखहर्त्रे नमः।Om Duhkhahartre Namah।जो भक्तों के दुःखों को हर लेते हैं।
830क्लेशनाशकॐ क्लेशनाशकाय नमः।Om Kleshanashakaya Namah।जो जीवन के सभी क्लेशों का नाश करते हैं।
831पापनाशनॐ पापनाशनाय नमः।Om Papanashanaya Namah।जो सभी पापों का नाश करने वाले हैं।
832पापहारीॐ पापहारिणे नमः।Om Papaharine Namah।जो भक्तों के पाप एवं दोष हर लेते हैं।
833दोषहारीॐ दोषहारिणे नमः।Om Doshaharine Namah।जो सभी दोषों एवं अशुद्धियों को दूर करते हैं।
834अघहारीॐ अघहारिणे नमः।Om Aghaharine Namah।जो पाप एवं अघ का नाश करने वाले हैं।
835पुण्यप्रदॐ पुण्यप्रदाय नमः।Om Punyapradaya Namah।जो भक्तों को पुण्य एवं शुभ फल प्रदान करते हैं।
836मङ्गलप्रदॐ मङ्गलप्रदाय नमः।Om Mangalapradaya Namah।जो सभी प्रकार का मंगल प्रदान करते हैं।
837कल्याणप्रदॐ कल्याणप्रदाय नमः।Om Kalyanapradaya Namah।जो भक्तों का कल्याण करने वाले हैं।
838सौभाग्यदॐ सौभाग्यदाय नमः।Om Saubhagyadaya Namah।जो सौभाग्य एवं शुभता प्रदान करते हैं।
839समृद्धिदॐ समृद्धिदाय नमः।Om Samriddhidaya Namah।जो समृद्धि एवं उन्नति प्रदान करते हैं।
840ऐश्वर्यदॐ ऐश्वर्यदाय नमः।Om Aishvaryadaya Namah।जो ऐश्वर्य एवं वैभव प्रदान करते हैं।
841धनदॐ धनदाय नमः।Om Dhanadaya Namah।जो धन एवं समृद्धि प्रदान करते हैं।
842धान्यदॐ धान्यदाय नमः।Om Dhanyadaya Namah।जो अन्न एवं धान्य की समृद्धि प्रदान करते हैं।
843सन्तानदॐ सन्तानदाय नमः।Om Santanadaya Namah।जो भक्तों को सन्तान एवं वंशवृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
844आयुष्प्रदॐ आयुष्प्रदाय नमः।Om Ayushpradaya Namah।जो दीर्घायु एवं जीवनशक्ति प्रदान करते हैं।
845आरोग्यदॐ आरोग्यदाय नमः।Om Arogyadaya Namah।जो आरोग्य एवं स्वास्थ्य प्रदान करने वाले हैं।
846बलदॐ बलदाय नमः।Om Baladaya Namah।जो शक्ति एवं सामर्थ्य प्रदान करते हैं।
847वीर्यदॐ वीर्यदाय नमः।Om Viryadaya Namah।जो पराक्रम एवं ऊर्जा प्रदान करते हैं।
848धैर्यदॐ धैर्यदाय नमः।Om Dhairyadaya Namah।जो भक्तों को धैर्य एवं साहस देते हैं।
849बुद्धिदॐ बुद्धिदाय नमः।Om Buddhidaya Namah।जो बुद्धि एवं विवेक प्रदान करते हैं।
850विद्यादॐ विद्यादाय नमः।Om Vidyadaya Namah।जो ज्ञान एवं विद्या प्रदान करने वाले हैं।
851मेधादॐ मेधादाय नमः।Om Medhadaya Namah।जो मेधा एवं स्मरणशक्ति प्रदान करते हैं।
852प्रज्ञादॐ प्रज्ञादाय नमः।Om Prajnadaya Namah।जो उच्च बुद्धि एवं प्रज्ञा प्रदान करते हैं।
853विवेकदॐ विवेकदाय नमः।Om Vivekadaya Namah।जो सत्य और असत्य का विवेक प्रदान करते हैं।
854ज्ञानमूर्तिॐ ज्ञानमूर्तये नमः।Om Jnanamurtaye Namah।जो स्वयं परम ज्ञान की मूर्ति हैं।
855ज्ञानगम्यॐ ज्ञानगम्याय नमः।Om Jnanagamyaya Namah।जिन्हें ज्ञान एवं साधना द्वारा प्राप्त किया जाता है।
856ज्ञानदाताॐ ज्ञानदात्रे नमः।Om Jnanadatre Namah।जो परम ज्ञान प्रदान करने वाले हैं।
857वेदमूर्तिॐ वेदमूर्तये नमः।Om Vedamurtaye Namah।जो चारों वेदों के दिव्य स्वरूप हैं।
858वेदविद्ॐ वेदविदे नमः।Om Vedavide Namah।जो सम्पूर्ण वेदों के परम ज्ञाता हैं।
859वेदान्तवेद्यॐ वेदान्तवेद्याय नमः।Om Vedantavedyaya Namah।जिन्हें वेदान्त के ज्ञान द्वारा जाना जा सकता है।
860वेदान्तस्वरूपॐ वेदान्तस्वरूपाय नमः।Om Vedantasvarupaya Namah।जो वेदान्त के परम तत्त्व के स्वरूप हैं।
861उपनिषद्वेद्यॐ उपनिषद्वेद्याय नमः।Om Upanishadvedyaya Namah।जिन्हें उपनिषदों के ज्ञान द्वारा जाना जाता है।
862ब्रह्मविद्याप्रदॐ ब्रह्मविद्याप्रदाय नमः।Om Brahmavidyapradaya Namah।जो ब्रह्मविद्या का परम ज्ञान प्रदान करते हैं।
863तत्त्वज्ञॐ तत्त्वज्ञाय नमः।Om Tattvajnaya Namah।जो समस्त तत्त्वों के परम ज्ञाता हैं।
864तत्त्वमयॐ तत्त्वमयाय नमः।Om Tattvamayaya Namah।जो परम तत्त्व से पूर्णतः युक्त हैं।
865परतत्त्वॐ परतत्त्वाय नमः।Om Paratattvaya Namah।जो परम सत्य एवं सर्वोच्च तत्त्व हैं।
866परब्रह्मॐ परब्रह्मणे नमः।Om Parabrahmane Namah।जो सर्वोच्च एवं निरपेक्ष ब्रह्म हैं।
867परमात्माॐ परमात्मने नमः।Om Paramatmane Namah।जो सभी जीवों के परमात्मा हैं।
868अन्तर्यामीॐ अन्तर्यामिणे नमः।Om Antaryamine Namah।जो सभी प्राणियों के भीतर अन्तर्यामी रूप से स्थित हैं।
869साक्षीॐ साक्षिणे नमः।Om Sakshine Namah।जो समस्त कर्मों एवं घटनाओं के साक्षी हैं।
870चैतन्यॐ चैतन्याय नमः।Om Chaitanyaya Namah।जो सम्पूर्ण चेतना के मूल स्रोत हैं।
871सच्चिदानन्दॐ सच्चिदानन्दाय नमः।Om Sachchidanandaya Namah।जो सत्, चित् और आनन्द के परम स्वरूप हैं।
872निर्गुणॐ निर्गुणाय नमः।Om Nirgunaya Namah।जो भौतिक गुणों से पूर्णतः परे हैं।
873सगुणॐ सगुणाय नमः।Om Sagunaya Namah।जो भक्तों के लिए दिव्य गुणों सहित प्रकट होते हैं।
874निर्विकारॐ निर्विकाराय नमः।Om Nirvikaraya Namah।जो किसी परिवर्तन एवं विकार से रहित हैं।
875निष्कलॐ निष्कलाय नमः।Om Nishkalaya Namah।जो सभी भौतिक अंशों एवं सीमाओं से रहित हैं।
876निष्प्रपञ्चॐ निष्प्रपञ्चाय नमः।Om Nishprapanchaya Namah।जो सांसारिक प्रपञ्च से परे हैं।
877निष्कामॐ निष्कामाय नमः।Om Nishkamaya Namah।जो सभी सांसारिक इच्छाओं से रहित हैं।
878निष्पापॐ निष्पापाय नमः।Om Nishpapaya Namah।जो सभी पापों एवं दोषों से रहित हैं।
879निर्मलॐ निर्मलाय नमः।Om Nirmalaya Namah।जो पूर्णतः पवित्र एवं निर्मल हैं।
880निरञ्जनॐ निरञ्जनाय नमः।Om Niranjanaya Namah।जो माया एवं दोषों से पूर्णतः अछूते हैं।
881निर्लेपॐ निर्लेपाय नमः।Om Nirlepaya Namah।जो संसार में रहते हुए भी उससे निर्लिप्त हैं।
882निरामयॐ निरामयाय नमः।Om Niramayaya Namah।जो सभी रोग एवं दुःखों से परे हैं।
883निर्भयॐ निर्भयाय नमः।Om Nirbhayaya Namah।जो स्वयं निर्भय एवं अभय के स्रोत हैं।
884निर्द्वन्द्वॐ निर्द्वन्द्वाय नमः।Om Nirdvandvaya Namah।जो सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों से परे हैं।
885निरुपाधिकॐ निरुपाधिकाय नमः।Om Nirupadhikaya Namah।जो सभी उपाधियों एवं सीमाओं से रहित हैं।
886निरालम्बॐ निरालम्बाय नमः।Om Niralambaya Namah।जो किसी बाहरी आधार के बिना स्वयं स्थित हैं।
887निराधारॐ निराधाराय नमः।Om Niradharaya Namah।जो स्वयं किसी आधार पर निर्भर नहीं हैं।
888स्वयम्भूॐ स्वयम्भुवे नमः।Om Svayambhuve Namah।जो स्वयं प्रकट एवं स्वयंभू हैं।
889स्वयंज्योतिॐ स्वयंज्योतिषे नमः।Om Svayamjyotishe Namah।जो स्वयं प्रकाशित परम ज्योति हैं।
890स्वयंसिद्धॐ स्वयंसिद्धाय नमः।Om Svayamsiddhaya Namah।जो स्वयं पूर्ण एवं सिद्ध स्वरूप हैं।
891स्वयम्प्रकाशॐ स्वयम्प्रकाशाय नमः।Om Svayamprakashaya Namah।जो किसी अन्य प्रकाश के बिना स्वयं प्रकाशित हैं।
892स्वतन्त्रॐ स्वतन्त्राय नमः।Om Svatantraya Namah।जो पूर्णतः स्वतंत्र एवं सर्वाधिकार सम्पन्न हैं।
893स्वाधीनॐ स्वाधीनाय नमः।Om Svadhinaya Namah।जो स्वयं अपने परम स्वामी हैं।
894स्वराट्ॐ स्वराटे नमः।Om Svarate Namah।जो स्वयंभू एवं स्वतंत्र सम्राट हैं।
895परमेश्वरॐ परमेश्वराय नमः।Om Parameshvaraya Namah।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के परमेश्वर हैं।
896जगदीश्वरॐ जगदीश्वराय नमः।Om Jagadishvaraya Namah।जो सम्पूर्ण जगत के ईश्वर एवं नियन्ता हैं।
897जगन्नाथॐ जगन्नाथाय नमः।Om Jagannathaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत के नाथ एवं स्वामी हैं।
898जगद्गुरुॐ जगद्गुरवे नमः।Om Jagadgurave Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के परम गुरु हैं।
899जगद्बन्धुॐ जगद्बन्धवे नमः।Om Jagadbandhave Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परम बन्धु एवं हितैषी हैं।
900जगदाधारॐ जगदाधाराय नमः।Om Jagadadharaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत के परम आधार हैं।
No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
901जगद्गोप्ताॐ जगद्गोप्त्रे नमः।Om Jagadgoptre Namah।जो सम्पूर्ण जगत की रक्षा करने वाले हैं।
902जगद्वन्द्यॐ जगद्वन्द्याय नमः।Om Jagadvandyaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत द्वारा पूजनीय हैं।
903जगन्मयॐ जगन्मयाय नमः।Om Jaganmayaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं।
904जगत्पतिॐ जगत्पतये नमः।Om Jagatpataye Namah।जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं।
905जगदीशॐ जगदीशाय नमः।Om Jagadishaya Namah।जो सम्पूर्ण संसार के परम ईश्वर हैं।
906विश्वम्भरॐ विश्वम्भराय नमः।Om Vishvambharaya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व का पालन-पोषण करते हैं।
907विश्वेश्वरॐ विश्वेश्वराय नमः।Om Vishveshvaraya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के परमेश्वर हैं।
908विश्वनाथॐ विश्वनाथाय नमः।Om Vishvanathaya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के नाथ हैं।
909विश्वात्माॐ विश्वात्मने नमः।Om Vishvatmane Namah।जो सम्पूर्ण विश्व की अन्तरात्मा हैं।
910विश्वमूर्तिॐ विश्वमूर्तये नमः।Om Vishvamurtaye Namah।जिनका स्वरूप सम्पूर्ण विश्व के समान विराट है।
911विश्वकर्ताॐ विश्वकर्त्रे नमः।Om Vishvakartre Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के रचयिता हैं।
912विश्वभर्ताॐ विश्वभर्त्रे नमः।Om Vishvabhartre Namah।जो सम्पूर्ण विश्व का पालन करते हैं।
913विश्वहर्ताॐ विश्वहर्त्रे नमः।Om Vishvahartre Namah।जो प्रलयकाल में विश्व का संहार करते हैं।
914विश्वसाक्षीॐ विश्वसाक्षिणे नमः।Om Vishvasakshine Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के साक्षी हैं।
915विश्वाधारॐ विश्वाधाराय नमः।Om Vishvadharaya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के आधार हैं।
916विश्वगोप्ताॐ विश्वगोप्त्रे नमः।Om Vishvagoptre Namah।जो सम्पूर्ण विश्व की रक्षा करते हैं।
917विश्वपालकॐ विश्वपालकाय नमः।Om Vishvapalakaya Namah।जो सभी लोकों एवं प्राणियों का पालन करते हैं।
918विश्वनायकॐ विश्वनायकाय नमः।Om Vishvanayakaya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के परम नायक हैं।
919विश्वगुरुॐ विश्वगुरवे नमः।Om Vishvagurave Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के परम गुरु हैं।
920विश्वबन्धुॐ विश्वबन्धवे नमः।Om Vishvabandhave Namah।जो सम्पूर्ण प्राणियों के परम हितैषी हैं।
921विश्वप्रियॐ विश्वप्रियाय नमः।Om Vishvapriyaya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व को प्रिय हैं।
922विश्वमङ्गलॐ विश्वमङ्गलाय नमः।Om Vishvamangalaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत का मंगल करने वाले हैं।
923विश्वकल्याणदॐ विश्वकल्याणदाय नमः।Om Vishvakalyanadaya Namah।जो सम्पूर्ण विश्व का कल्याण करते हैं।
924विश्वशान्तिप्रदॐ विश्वशान्तिप्रदाय नमः।Om Vishvashantipradaya Namah।जो जगत में शान्ति प्रदान करने वाले हैं।
925विश्वमोक्षप्रदॐ विश्वमोक्षप्रदाय नमः।Om Vishvamokshapradaya Namah।जो जीवों को मोक्ष का मार्ग प्रदान करते हैं।
926विश्वज्ञानप्रदॐ विश्वज्ञानप्रदाय नमः।Om Vishvajnanapradaya Namah।जो दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं।
927विश्वसिद्धिदॐ विश्वसिद्धिदाय नमः।Om Vishvasiddhidaya Namah।जो सिद्धि एवं आध्यात्मिक सफलता प्रदान करते हैं।
928विश्ववरदॐ विश्ववरदाय नमः।Om Vishvavaradaya Namah।जो भक्तों को श्रेष्ठ वरदान प्रदान करते हैं।
929विश्वकामदॐ विश्वकामदाय नमः।Om Vishvakamadaya Namah।जो शुभ इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं।
930विश्वाभयप्रदॐ विश्वाभयप्रदाय नमः।Om Vishvabhayapradaya Namah।जो भय से मुक्ति एवं अभय प्रदान करते हैं।
931लोकत्रयस्वामीॐ लोकत्रयस्वामिने नमः।Om Lokatrayasvamine Namah।जो तीनों लोकों के परम स्वामी हैं।
932त्रैलोक्यनाथॐ त्रैलोक्यनाथाय नमः।Om Trailokyanathaya Namah।जो तीनों लोकों के नाथ हैं।
933त्रैलोक्यपालकॐ त्रैलोक्यपालकाय नमः।Om Trailokyapalakaya Namah।जो तीनों लोकों का पालन करते हैं।
934त्रैलोक्यरक्षकॐ त्रैलोकरक्षकाय नमः।Om Trailokyarakshakaya Namah।जो तीनों लोकों की रक्षा करते हैं।
935त्रैलोक्यमङ्गलॐ त्रैलोक्यमङ्गलाय नमः।Om Trailokyamangalaya Namah।जो तीनों लोकों का मंगल करने वाले हैं।
936त्रैलोक्यवन्दितॐ त्रैलोक्यवन्दिताय नमः।Om Trailokyavanditaya Namah।जिनकी तीनों लोकों में वन्दना की जाती है।
937त्रैलोक्यदीपॐ त्रैलोक्यदीपाय नमः।Om Trailokyadipaya Namah।जो तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले दिव्य प्रकाश हैं।
938त्रैलोक्यप्रभुॐ त्रैलोक्यप्रभवे नमः।Om Trailokyaprabhave Namah।जो तीनों लोकों के परम प्रभु हैं।
939त्रैलोक्येशॐ त्रैलोक्येशाय नमः।Om Trailokyeshaya Namah।जो तीनों लोकों के ईश्वर हैं।
940त्रैलोक्यात्माॐ त्रैलोक्यात्मने नमः।Om Trailokyatmane Namah।जो तीनों लोकों की अन्तरात्मा हैं।
941देवदेवॐ देवदेवाय नमः।Om Devadevaya Namah।जो सभी देवताओं के भी परम देव हैं।
942देवेशॐ देवेशाय नमः।Om Deveshaya Namah।जो समस्त देवताओं के स्वामी हैं।
943देववरदॐ देववरदाय नमः।Om Devavaradaya Namah।जो देवताओं को भी वरदान प्रदान करते हैं।
944देवपूजितॐ देवपूजिताय नमः।Om Devapujitaya Namah।जिनकी देवता भी पूजा करते हैं।
945देववन्दितॐ देववन्दिताय नमः।Om Devavanditaya Namah।जिनकी देवगण श्रद्धापूर्वक वन्दना करते हैं।
946देवश्रेष्ठॐ देवश्रेष्ठाय नमः।Om Devasreshthaya Namah।जो देवताओं में भी श्रेष्ठ एवं परम हैं।
947देवाधिदेवॐ देवाधिदेवाय नमः।Om Devadidevaya Namah।जो देवताओं के भी अधिदेव हैं।
948देवात्माॐ देवात्मने नमः।Om Devatmane Namah।जो देवताओं की परम आत्मशक्ति हैं।
949देवमयॐ देवमयाय नमः।Om Devamayaya Namah।जो समस्त देवशक्तियों से परिपूर्ण हैं।
950देवेश्वरॐ देवेश्वराय नमः।Om Deveshvaraya Namah।जो सभी देवताओं के परमेश्वर हैं।
951ऋषिवन्दितॐ ऋषिवन्दिताय नमः।Om Rishivanditaya Namah।जिनकी ऋषिगण श्रद्धापूर्वक वन्दना करते हैं।
952मुनिपूजितॐ मुनिपूजिताय नमः।Om Munipujitaya Namah।जिनकी मुनि एवं तपस्वी पूजा करते हैं।
953सिद्धसेवितॐ सिद्धसेविताय नमः।Om Siddhasevitaya Namah।जिनकी सिद्ध पुरुष सेवा एवं आराधना करते हैं।
954योगिसेवितॐ योगिसेविताय नमः।Om Yogisevitaya Namah।जिनकी योगीजन भक्ति एवं ध्यान से सेवा करते हैं।
955योगीन्द्रवन्दितॐ योगीन्द्रवन्दिताय नमः।Om Yogindravanditaya Namah।जिनकी श्रेष्ठ योगीजन वन्दना करते हैं।
956तपस्वीपूजितॐ तपस्वीपूजिताय नमः।Om Tapasvipujitaya Namah।जिनकी तपस्वीजन श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं।
957भक्तसंसेवितॐ भक्तसंसेविताय नमः।Om Bhaktasamsevitaya Namah।जिनकी भक्तजन प्रेमपूर्वक सेवा करते हैं।
958ऋषिगम्यॐ ऋषिगम्याय नमः।Om Rishigamyaya Namah।जिन्हें ऋषियों ने तप एवं ज्ञान से जाना है।
959मुनिगम्यॐ मुनिगम्याय नमः।Om Munigamyaya Namah।जिन्हें मुनिजन ध्यान एवं साधना से प्राप्त करते हैं।
960योगिगम्यॐ योगिगम्याय नमः।Om Yogigamyaya Namah।जिन्हें योगीजन योगसाधना द्वारा प्राप्त करते हैं।
961वेदगम्यॐ वेदगम्याय नमः।Om Vedagamyaya Namah।जिन्हें वेदों के ज्ञान द्वारा जाना जाता है।
962शास्त्रगम्यॐ शास्त्रगम्याय नमः।Om Shastragamyaya Namah।जिन्हें शास्त्रों के अध्ययन एवं ज्ञान से जाना जाता है।
963भक्तिगम्यॐ भक्तिगम्याय नमः।Om Bhaktigamyaya Namah।जिन्हें सच्ची भक्ति के द्वारा प्राप्त किया जाता है।
964प्रेमगम्यॐ प्रेमगम्याय नमः।Om Premagamyaya Namah।जिन्हें निर्मल प्रेम एवं समर्पण से प्राप्त किया जाता है।
965ध्यानगम्यॐ ध्यानगम्याय नमः।Om Dhyanagamyaya Namah।जिन्हें ध्यान एवं एकाग्रता द्वारा प्राप्त किया जाता है।
966ज्ञानगम्यॐ ज्ञानगम्याय नमः।Om Jnanagamyaya Namah।जिन्हें आत्मज्ञान द्वारा प्राप्त किया जाता है।
967तपोगम्यॐ तपोगम्याय नमः।Om Tapogamyaya Namah।जिन्हें तपस्या एवं साधना द्वारा प्राप्त किया जाता है।
968सत्यगम्यॐ सत्यगम्याय नमः।Om Satyagamyaya Namah।जिन्हें सत्य एवं धर्म के मार्ग से प्राप्त किया जाता है।
969धर्मगम्यॐ धर्मगम्याय नमः।Om Dharmagamyaya Namah।जिन्हें धर्माचरण एवं सद्कर्म द्वारा प्राप्त किया जाता है।
970मोक्षगम्यॐ मोक्षगम्याय नमः।Om Mokshagamyaya Namah।जो मोक्ष के परम लक्ष्य के रूप में प्राप्त होते हैं।
971परमानन्दॐ परमानन्दाय नमः।Om Paramanandaya Namah।जो परम एवं अनन्त आनन्द के स्वरूप हैं।
972ब्रह्मानन्दॐ ब्रह्मानन्दाय नमः।Om Brahmanandaya Namah।जो ब्रह्मस्वरूप परम आनन्द हैं।
973नित्यानन्दॐ नित्यानन्दाय नमः।Om Nityanandaya Namah।जो शाश्वत आनन्द के स्वरूप हैं।
974चिदानन्दॐ चिदानन्दाय नमः।Om Chidanandaya Namah।जो चेतना एवं आनन्द के परम स्वरूप हैं।
975सुखस्वरूपॐ सुखस्वरूपाय नमः।Om Sukhasvarupaya Namah।जो परम सुख एवं शान्ति के स्वरूप हैं।
976शान्तस्वरूपॐ शान्तस्वरूपाय नमः।Om Shantasvarupaya Namah।जो पूर्ण शान्ति एवं स्थिरता के स्वरूप हैं।
977मङ्गलस्वरूपॐ मङ्गलस्वरूपाय नमः।Om Mangalasvarupaya Namah।जो स्वयं परम मंगल एवं शुभता के स्वरूप हैं।
978कल्याणस्वरूपॐ कल्याणस्वरूपाय नमः।Om Kalyanasvarupaya Namah।जो पूर्ण कल्याण एवं शुभता के स्वरूप हैं।
979करुणास्वरूपॐ करुणास्वरूपाय नमः।Om Karunasvarupaya Namah।जो परम करुणा एवं दया के स्वरूप हैं।
980प्रेमस्वरूपॐ प्रेमस्वरूपाय नमः।Om Premasvarupaya Namah।जो दिव्य एवं निर्मल प्रेम के स्वरूप हैं।
981भक्तिस्वरूपॐ भक्तिस्वरूपाय नमः।Om Bhaktisvarupaya Namah।जो शुद्ध भक्ति के परम स्वरूप हैं।
982श्रद्धास्वरूपॐ श्रद्धास्वरूपाय नमः।Om Shraddhasvarupaya Namah।जो श्रद्धा एवं विश्वास के स्वरूप हैं।
983सत्यस्वरूपॐ सत्यस्वरूपाय नमः।Om Satyasvarupaya Namah।जो परम सत्य के स्वरूप हैं।
984धर्मस्वरूपॐ धर्मस्वरूपाय नमः।Om Dharmasvarupaya Namah।जो सनातन धर्म के परम स्वरूप हैं।
985ज्ञानस्वरूपॐ ज्ञानस्वरूपाय नमः।Om Jnanasvarupaya Namah।जो परम ज्ञान के स्वरूप हैं।
986वैराग्यस्वरूपॐ वैराग्यस्वरूपाय नमः।Om Vairagyasvarupaya Namah।जो संसार से अनासक्ति एवं वैराग्य के स्वरूप हैं।
987ऐश्वर्यस्वरूपॐ ऐश्वर्यस्वरूपाय नमः।Om Aishvaryasvarupaya Namah।जो परम ऐश्वर्य एवं दिव्य शक्ति के स्वरूप हैं।
988शक्तिस्वरूपॐ शक्तिस्वरूपाय नमः।Om Shaktisvarupaya Namah।जो समस्त दिव्य शक्तियों के मूल स्वरूप हैं।
989तेजःस्वरूपॐ तेजःस्वरूपाय नमः।Om Tejahsvarupaya Namah।जो अनन्त दिव्य तेज के स्वरूप हैं।
990ज्योतिस्वरूपॐ ज्योतिस्वरूपाय नमः।Om Jyotisvarupaya Namah।जो परम प्रकाश एवं दिव्य ज्योति के स्वरूप हैं।
991मुक्तिदाताॐ मुक्तिदात्रे नमः।Om Muktidatre Namah।जो भक्तों को मुक्ति एवं मोक्ष प्रदान करते हैं।
992मोक्षदाताॐ मोक्षदात्रे नमः।Om Mokshadatre Namah।जो संसार के बन्धन से मुक्त कर मोक्ष देते हैं।
993कैवल्यदाताॐ कैवल्यदात्रे नमः।Om Kaivalyadatre Namah।जो परम कैवल्य एवं आत्ममुक्ति प्रदान करते हैं।
994परमगतिॐ परमगतये नमः।Om Paramagataye Namah।जो जीवों की परम एवं अंतिम गति हैं।
995परमधामॐ परमधाम्ने नमः।Om Paramadhamne Namah।जो परम दिव्य धाम एवं सर्वोच्च आश्रय हैं।
996श्रीवत्सलाञ्छनॐ श्रीवत्सलाञ्छनाय नमः।Om Shrivatsalanchhanaya Namah।जिनके वक्षस्थल पर श्रीवत्स का दिव्य चिह्न सुशोभित है।
997श्रीपतिॐ श्रीपतये नमः।Om Shripataye Namah।जो देवी लक्ष्मी के परम पति हैं।
998लक्ष्मीनृसिंहॐ लक्ष्मीनृसिंहाय नमः।Om Lakshminarasimhaya Namah।जो देवी लक्ष्मी सहित विराजमान भगवान नरसिंह हैं।
999महानृसिंहॐ महानृसिंहाय नमः।Om Mahanarasimhaya Namah।जो महान एवं परम शक्तिशाली नरसिंह स्वरूप हैं।
1000श्रीनरसिंहॐ श्रीनरसिंहाय नमः।Om Shrinarasimhaya Namah।जो श्री सहित विराजमान भगवान नरसिंह के परम दिव्य स्वरूप हैं।

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