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हरि ॐ तत्सत्
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Sahasranamavali of Lord Balarama

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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning1बलभद्रॐ बलभद्राय नमः।Om Balabhadraya Namah।जो महान बल एवं मंगल के स्वरूप हैं।2रामभद्रॐ रामभद्राय नमः।Om Ramabhadraya Namah।जो कल्याणकारी एवं आनन्ददायक हैं।3रामॐ रामाय नमः।Om Ramaya Namah।जो सभी को आनन्द प्रदान करने वाले हैं।4सङ्कर्षणॐ सङ्कर्षणाय नमः।Om Sankarshanaya Namah।जो जीवों को अपनी दिव्य शक्ति से आकर्षित करते हैं।5अच्युतॐ अच्युताय नमः।Om Achyutaya Namah।जो कभी अपने स्वरूप से विचलित नहीं होते।6रेवतीरमणॐ रेवतीरमणाय नमः।Om Revatiramanaya...
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
1बलभद्रॐ बलभद्राय नमः।Om Balabhadraya Namah।जो महान बल एवं मंगल के स्वरूप हैं।
2रामभद्रॐ रामभद्राय नमः।Om Ramabhadraya Namah।जो कल्याणकारी एवं आनन्ददायक हैं।
3रामॐ रामाय नमः।Om Ramaya Namah।जो सभी को आनन्द प्रदान करने वाले हैं।
4सङ्कर्षणॐ सङ्कर्षणाय नमः।Om Sankarshanaya Namah।जो जीवों को अपनी दिव्य शक्ति से आकर्षित करते हैं।
5अच्युतॐ अच्युताय नमः।Om Achyutaya Namah।जो कभी अपने स्वरूप से विचलित नहीं होते।
6रेवतीरमणॐ रेवतीरमणाय नमः।Om Revatiramanaya Namah।जो देवी रेवती के प्रिय पति हैं।
7देवॐ देवाय नमः।Om Devaya Namah।जो दिव्य एवं पूजनीय भगवान हैं।
8कामपालॐ कामपालाय नमः।Om Kamapalaya Namah।जो भक्तों की शुभ इच्छाओं की रक्षा एवं पूर्ति करते हैं।
9हलायुधॐ हलायुधाय नमः।Om Halayudhaya Namah।जो हल को अपने दिव्य आयुध के रूप में धारण करते हैं।
10नीलाम्बरॐ नीलाम्बराय नमः।Om Nilambaraya Namah।जो नीले वस्त्र धारण करते हैं।
11श्वेतवर्णॐ श्वेतवर्णाय नमः।Om Shvetavarnaya Namah।जिनका दिव्य वर्ण श्वेत है।
12बलदेवॐ बलदेवाय नमः।Om Baladevaya Namah।जो बलदेव के नाम से प्रसिद्ध हैं।
13अच्युताग्रजॐ अच्युताग्रजाय नमः।Om Achyutagrajaya Namah।जो भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज हैं।
14प्रलम्बघ्नॐ प्रलम्बघ्नाय नमः।Om Pralambaghnaya Namah।जिन्होंने प्रलम्बासुर का वध किया।
15महावीरॐ महावीराय नमः।Om Mahaviraya Namah।जो महान वीर एवं पराक्रमी हैं।
16रौहिणेयॐ रौहिणेयाय नमः।Om Rauhineyaya Namah।जो माता रोहिणी के पुत्र हैं।
17प्रतापवान्ॐ प्रतापवते नमः।Om Pratapavate Namah।जो महान तेज एवं प्रताप से युक्त हैं।
18तालाङ्कॐ तालाङ्काय नमः।Om Talankaya Namah।जिनके ध्वज पर ताल वृक्ष का चिह्न है।
19मुसलीॐ मुसलिने नमः।Om Musaline Namah।जो मुसल धारण करते हैं।
20हलीॐ हलीने नमः।Om Haline Namah।जो हल धारण करने वाले हैं।
21हरिॐ हरये नमः।Om Haraye Namah।जो पाप एवं दुःखों का हरण करते हैं।
22यदुवरॐ यदुवराय नमः।Om Yaduvaraya Namah।जो यदुवंश में श्रेष्ठ हैं।
23बलीॐ बलिने नमः।Om Baline Namah।जो अपार बल से सम्पन्न हैं।
24सीरपाणिॐ सीरपाणये नमः।Om Sirapanaye Namah।जो अपने हाथ में हल धारण करते हैं।
25पद्मपाणिॐ पद्मपाणये नमः।Om Padmapanaye Namah।जो कमल धारण करने वाले हैं।
26लगुडीॐ लगुडिने नमः।Om Lagudine Namah।जो दण्ड धारण करते हैं।
27वेणुवादनॐ वेणुवादनाय नमः।Om Venuvadanaya Namah।जो वेणु वादन करने वाले हैं।
28कालिन्दीभेदनॐ कालिन्दीभेदनाय नमः।Om Kalindibhedanaya Namah।जिन्होंने हल से यमुना की धारा को मोड़ा।
29वीरॐ वीराय नमः।Om Viraya Namah।जो महान वीर एवं साहसी हैं।
30बलॐ बलाय नमः।Om Balaya Namah।जो स्वयं परम बल के स्वरूप हैं।
31प्रबलॐ प्रबलाय नमः।Om Prabalaya Namah।जो अत्यन्त शक्तिशाली हैं।
32ऊर्ध्वगॐ ऊर्ध्वगाय नमः।Om Urdhvagaya Namah।जो उच्च एवं श्रेष्ठ अवस्था में स्थित हैं।
33वासुदेवकलानन्तॐ वासुदेवकलानन्ताय नमः।Om Vasudevakalānantaya Namah।जो वासुदेव की अनन्त दिव्य कला के स्वरूप हैं।
34सहस्रवदनॐ सहस्रवदनाय नमः।Om Sahasravadanaya Namah।जिनका सहस्र मुखों वाला दिव्य स्वरूप है।
35स्वराज्ॐ स्वराजे नमः।Om Svaraje Namah।जो स्वयं के स्वामी एवं स्वतंत्र हैं।
36वसुॐ वसवे नमः।Om Vasave Namah।जो समस्त प्राणियों में निवास करते हैं।
37वसुमतीभर्ताॐ वसुमतीभर्त्रे नमः।Om Vasumatibhartre Namah।जो पृथ्वी का धारण एवं पालन करते हैं।
38वासुदेवॐ वासुदेवाय नमः।Om Vasudevaya Namah।जो वासुदेव के दिव्य स्वरूप हैं।
39वसूत्तमॐ वसूत्तमाय नमः।Om Vasuttamaya Namah।जो सभी वसुओं में श्रेष्ठ हैं।
40यदूत्तमॐ यदूत्तमाय नमः।Om Yaduttamaya Namah।जो यदुवंश में सर्वोत्तम हैं।
41यादवेन्द्रॐ यादवेन्द्राय नमः।Om Yadavendraya Namah।जो यादवों के अधिपति हैं।
42माधवॐ माधवाय नमः।Om Madhavaya Namah।जो दिव्य माधुर्य एवं ज्ञान से युक्त हैं।
43वृष्णिवल्लभॐ वृष्णिवल्लभाय नमः।Om Vrishnivallabhaya Namah।जो वृष्णिवंश के प्रिय हैं।
44द्वारकेशॐ द्वारकेशाय नमः।Om Dvarakeshaya Namah।जो द्वारका के स्वामी हैं।
45माथुरेशॐ माथुरेशाय नमः।Om Mathureshaya Namah।जो मथुरा के अधिपति हैं।
46दानीॐ दानिने नमः।Om Danine Namah।जो महान दानी हैं।
47मानीॐ मानिने नमः।Om Manine Namah।जो गौरव एवं सम्मान से युक्त हैं।
48महामनस्ॐ महामनसे नमः।Om Mahamanase Namah।जिनका मन महान एवं उदार है।
49पूर्णॐ पूर्णाय नमः।Om Purnaya Namah।जो पूर्ण एवं सम्पूर्ण हैं।
50पुराणॐ पुराणाय नमः।Om Puranaya Namah।जो सनातन एवं प्राचीन पुरुष हैं।
51पुरुषॐ पुरुषाय नमः।Om Purushaya Namah।जो परम पुरुष स्वरूप हैं।
52परेशॐ परेशाय नमः।Om Pareshaya Namah।जो परम ईश्वर हैं।
53परमेश्वरॐ परमेश्वराय नमः।Om Parameshvaraya Namah।जो सर्वोच्च परमेश्वर हैं।
54परिपूर्णतमॐ परिपूर्णतमाय नमः।Om Paripurnatamaya Namah।जो पूर्णता में सर्वोच्च हैं।
55साक्षात्परॐ साक्षात्पराय नमः।Om Sakshatparaya Namah।जो साक्षात् परम सत्य के स्वरूप हैं।
56पुरुषोत्तमॐ पुरुषोत्तमाय नमः।Om Purushottamaya Namah।जो परम पुरुषोत्तम हैं।
57अनन्तॐ अनन्ताय नमः।Om Anantaya Namah।जिनका आदि और अन्त नहीं है।
58शाश्वतॐ शाश्वताय नमः।Om Shashvataya Namah।जो नित्य एवं सनातन हैं।
59शेषॐ शेषाय नमः।Om Sheshaya Namah।जो भगवान शेषनाग के दिव्य स्वरूप हैं।
60भगवान्ॐ भगवते नमः।Om Bhagavate Namah।जो सम्पूर्ण दिव्य ऐश्वर्यों से सम्पन्न भगवान हैं।
61प्रकृतेः परॐ प्रकृतेः पराय नमः।Om Prakriteh Paraya Namah।जो प्रकृति से परे हैं।
62जीवात्माॐ जीवात्मने नमः।Om Jivatmane Namah।जो समस्त जीवों में आत्मस्वरूप हैं।
63परमात्माॐ परमात्मने नमः।Om Paramatmane Namah।जो परमात्मा के स्वरूप हैं।
64अन्तरात्माॐ अन्तरात्मने नमः।Om Antaratmane Namah।जो सभी के हृदय में अन्तरात्मा रूप से स्थित हैं।
65ध्रुवॐ ध्रुवाय नमः।Om Dhruvaya Namah।जो स्थिर एवं अचल हैं।
66अव्ययॐ अव्ययाय नमः।Om Avyayaya Namah।जो अविनाशी एवं अक्षय हैं।
67चतुर्व्यूहॐ चतुर्व्यूहाय नमः।Om Chaturvyuhaya Namah।जो चार दिव्य व्यूह स्वरूपों से युक्त हैं।
68चतुर्वेदॐ चतुर्वेदाय नमः।Om Chaturvedaya Namah।जिनमें चारों वेदों का ज्ञान निहित है।
69चतुर्मूर्तिॐ चतुर्मूर्तिने नमः।Om Chaturmurtine Namah।जो चार दिव्य मूर्तियों के स्वरूप हैं।
70चतुष्पदॐ चतुष्पदाय नमः।Om Chatushpadaya Namah।जो चार पादों से युक्त दिव्य स्वरूप हैं।
71प्रधानॐ प्रधानाय नमः।Om Pradhanaya Namah।जो सृष्टि के मूल प्रधान तत्त्व हैं।
72प्रकृतिॐ प्रकृतये नमः।Om Prakritaye Namah।जो प्रकृति के मूल स्वरूप हैं।
73साक्षीॐ साक्षिणे नमः।Om Sakshine Namah।जो समस्त कर्मों के साक्षी हैं।
74सङ्घातॐ सङ्घाताय नमः।Om Sanghataya Namah।जो सभी तत्त्वों के समुच्चय स्वरूप हैं।
75सङ्घवान्ॐ सङ्घवते नमः।Om Sanghavate Namah।जो समस्त समूहों के अधिपति हैं।
76सखाॐ सख्ये नमः।Om Sakhye Namah।जो सच्चे मित्र एवं सहचर हैं।
77महामनस्ॐ महामनसे नमः।Om Mahamanase Namah।जो महान एवं विशाल मन वाले हैं।
78बुद्धिसखाॐ बुद्धिसखाय नमः।Om Buddhisakhaya Namah।जो बुद्धि के सखा एवं मार्गदर्शक हैं।
79चेतस्ॐ चेतसे नमः।Om Chetase Namah।जो चेतना के स्वरूप हैं।
80अहङ्कारावृतॐ अहङ्कारावृताय नमः।Om Ahankaravritaya Namah।जो अहंकार से परे एवं उसके साक्षी हैं।
81इन्द्रियेशॐ इन्द्रियेशाय नमः।Om Indriyeshaya Namah।जो समस्त इन्द्रियों के स्वामी हैं।
82देवतात्माॐ देवतात्मने नमः।Om Devatatmane Namah।जो देवताओं के अन्तरात्मा स्वरूप हैं।
83ज्ञानॐ ज्ञानाय नमः।Om Jnanaya Namah।जो स्वयं दिव्य ज्ञान के स्वरूप हैं।
84कर्मॐ कर्मणे नमः।Om Karmane Namah।जो समस्त कर्मों के आधार एवं नियन्ता हैं।
85शर्मॐ शर्मणे नमः।Om Sharmane Namah।जो शान्ति एवं सुख प्रदान करते हैं।
86अद्वितीयॐ अद्वितीयाय नमः।Om Advitiyaya Namah।जिनके समान कोई दूसरा नहीं है।
87द्वितीयॐ द्वितीयाय नमः।Om Dvitiyaya Namah।जो दिव्य द्वैत स्वरूप में भी प्रतिष्ठित हैं।
88निराकारॐ निराकाराय नमः।Om Nirakaraya Namah।जो निराकार एवं रूप से परे हैं।
89निरञ्जनॐ निरञ्जनाय नमः।Om Niranjanaya Namah।जो पूर्णतः निष्कलंक एवं निर्मल हैं।
90विराज्ॐ विराजे नमः।Om Viraje Namah।जो दिव्य तेज से प्रकाशित हैं।
91सम्राट्ॐ साम्राजे नमः।Om Samraje Namah।जो सम्पूर्ण साम्राज्य के अधिपति हैं।
92महौघॐ महौघाय नमः।Om Mahaughaya Namah।जो महान एवं असीम शक्ति के स्वरूप हैं।
93धाराॐ धाराय नमः।Om Dharaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत को धारण करते हैं।
94स्थास्नुॐ स्थास्नवे नमः।Om Sthasnave Namah।जो स्थिर एवं अचल हैं।
95चरिष्णुमान्ॐ चरिष्णुमते नमः।Om Charishnumate Namah।जो सर्वत्र गतिशील एवं व्याप्त हैं।
96फणीन्द्रॐ फणीन्द्राय नमः।Om Phanindraya Namah।जो सर्पराज के रूप में विराजमान हैं।
97फणिराजॐ फणिराजाय नमः।Om Phanirajaya Namah।जो फणिधारी नागों के राजा हैं।
98सहस्रफणमण्डितॐ सहस्रफणमण्डिताय नमः।Om Sahasraphanamanditaya Namah।जो सहस्र नागफणों से सुशोभ
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
101फणीश्वरॐ फणीश्वराय नमः।Om Phanishvaraya Namah।जो नागों के परमेश्वर हैं।
102फणीॐ फणिने नमः।Om Phanine Namah।जो दिव्य फणिधारी स्वरूप हैं।
103स्फूर्तिॐ स्फूर्तये नमः।Om Sphurtaye Namah।जो दिव्य चेतना एवं ऊर्जा के स्वरूप हैं।
104फुत्कारीॐ फुत्कारिणे नमः।Om Phutkarine Namah।जो सर्प के समान दिव्य फुत्कार करने वाले हैं।
105चित्करॐ चित्कराय नमः।Om Chitkaraya Namah।जो चेतना एवं दिव्य ज्ञान को प्रकट करने वाले हैं।
106प्रभुॐ प्रभवे नमः।Om Prabhave Namah।जो समस्त जगत के परम स्वामी हैं।
107मणिहारॐ मणिहाराय नमः।Om Maniharaya Namah।जो मणियों की माला धारण करते हैं।
108मणिधरॐ मणिधराय नमः।Om Manidharaya Namah।जो दिव्य मणि धारण करते हैं।
109वितलीॐ वितल्यै नमः।Om Vitalyai Namah।जो वितल लोक में दिव्य रूप से स्थित हैं।
110सुतलीॐ सुतल्यै नमः।Om Sutalyai Namah।जो सुतल लोक में विराजमान हैं।
111तलीॐ तल्यै नमः।Om Talyai Namah।जो तल लोक में स्थित हैं।
112अतलीॐ अतल्यै नमः।Om Atalyai Namah।जो अतल लोक में विराजमान हैं।
113सुतलेशॐ सुतलेशाय नमः।Om Sutaleshaya Namah।जो सुतल लोक के अधिपति हैं।
114पातालॐ पातालाय नमः।Om Patalaya Namah।जो पाताल लोक में भी व्याप्त हैं।
115तलातलॐ तलातलाय नमः।Om Talatalaya Namah।जो तलातल लोक में स्थित हैं।
116रसातलॐ रसातलाय नमः।Om Rasatalaya Namah।जो रसातल लोक में भी विराजमान हैं।
117भोगितलॐ भोगितलाय नमः।Om Bhogitalaya Namah।जो नागों के भोग एवं निवास के लोक से सम्बद्ध हैं।
118स्फुरद्दन्तॐ स्फुरद्दन्ताय नमः।Om Sphuraddantaya Namah।जिनके दिव्य दाँत तेजस्वी एवं चमकदार हैं।
119महातलॐ महातलाय नमः।Om Mahatalaya Namah।जो महातल लोक में भी व्याप्त हैं।
120वासुकिॐ वासुकये नमः।Om Vasukaye Namah।जो नागराज वासुकि के स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
121शङ्खचूडाभॐ शङ्खचूडाभाय नमः।Om Shankhachudabhaya Namah।जिनकी आभा शंख-मणि के समान उज्ज्वल है।
122देवदत्तॐ देवदत्ताय नमः।Om Devadattaya Namah।जो देवताओं के हितकारी एवं कल्याणकारी हैं।
123धनञ्जयॐ धनञ्जयाय नमः।Om Dhananjayaya Namah।जो धन एवं विजय प्राप्त करने वाले हैं।
124कम्बलाश्वॐ कम्बलाश्वाय नमः।Om Kambalashvaya Namah।जो कम्बलाश्व नामक दिव्य नाग स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
125वेगतरोॐ वेगतरे नमः।Om Vegataraya Namah।जो अत्यन्त तीव्र गति वाले हैं।
126धृतराष्ट्रॐ धृतराष्ट्राय नमः।Om Dhritarashtraya Namah।जो धारण एवं संरक्षण करने वाले हैं।
127महाभुजॐ महाभुजाय नमः।Om Mahabhujaya Namah।जिनकी भुजाएँ अत्यन्त शक्तिशाली हैं।
128वारुणीमदमत्ताङ्गॐ वारुणीमदमत्ताङ्गाय नमः।Om Varunimadamattangaya Namah।जो वारुणी के दिव्य आनन्द में मग्न हैं।
129मदघूर्णितलोचनॐ मदघूर्णितलोचनाय नमः।Om Madaghurnitalochanaya Namah।जिनके नेत्र दिव्य आनन्द से झूमते हुए प्रतीत होते हैं।
130पद्माक्षॐ पद्माक्षाय नमः।Om Padmakshaya Namah।जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं।
131पद्ममालीॐ पद्ममालिने नमः।Om Padmamaline Namah।जो कमलों की माला धारण करते हैं।
132वनमालीॐ वनमालिने नमः।Om Vanamaline Namah।जो वनमाला धारण करते हैं।
133मधुश्रवाॐ मधुश्रवसे नमः।Om Madhushravase Namah।जिनकी कीर्ति एवं वाणी मधुर है।
134कोटिकन्दर्पलावण्यॐ कोटिकन्दर्पलावण्याय नमः।Om KotikandarpaLavanyaya Namah।जिनका सौन्दर्य करोड़ों कामदेवों के समान मनोहर है।
135नागकन्यासमार्चितॐ नागकन्यासमार्चिताय नमः।Om Nagakanyasamarcitaya Namah।जिनकी नागकन्याएँ श्रद्धापूर्वक पूजा करती हैं।
136नूपुरीॐ नूपुरिणे नमः।Om Nupurine Namah।जो दिव्य नूपुर धारण करते हैं।
137कटिसूत्रीॐ कटिसूत्रिणे नमः।Om Katisutrinе Namah।जो कमर में दिव्य कटिसूत्र धारण करते हैं।
138कटकीॐ कटकिने नमः।Om Katakine Namah।जो दिव्य कंगन एवं आभूषण धारण करते हैं।
139कनकाङ्गदीॐ कनकाङ्गदिने नमः।Om Kanakangadine Namah।जो स्वर्ण के बाजूबन्द धारण करते हैं।
140मुकुटीॐ मुकुटिने नमः।Om Mukutine Namah।जो दिव्य मुकुट धारण करते हैं।
141कुण्डलीॐ कुण्डलिने नमः।Om Kundaline Namah।जो दिव्य कुण्डल धारण करते हैं।
142दण्डीॐ दण्डिने नमः।Om Dandine Namah।जो दण्ड धारण करते हैं।
143शिखण्डीॐ शिखण्डिने नमः।Om Shikhandine Namah।जो मस्तक पर मोरपंख धारण करते हैं।
144खण्डमण्डलीॐ खण्डमण्डलिने नमः।Om Khandamandaline Namah।जो दिव्य खण्ड-मण्डल से सुशोभित हैं।
145कलिॐ कलये नमः।Om Kalaye Namah।जो कलह एवं संघर्ष के भी नियन्ता हैं।
146कलिप्रियॐ कलिप्रियाय नमः।Om Kalipriyaya Namah।जो कलियुग में भी भक्तों पर कृपा करते हैं।
147कालॐ कालाय नमः।Om Kalaya Namah।जो स्वयं काल एवं समय के स्वरूप हैं।
148निवातकवचेश्वरॐ निवातकवचेश्वराय नमः।Om Nivatakavacheshvaraya Namah।जो शक्तिशाली रक्षात्मक कवच के स्वामी हैं।
149संहारकृत्ॐ संहारकृते नमः।Om Samharakrite Namah।जो अधर्म एवं दुष्ट शक्तियों का संहार करते हैं।
150रुद्रवपुॐ रुद्रवपुषे नमः।Om Rudravapushe Namah।जिनका एक दिव्य स्वरूप रुद्र के समान उग्र है।
151कालाग्निॐ कालाग्नये नमः।Om Kalagnaye Namah।जो काल की अग्नि के समान प्रचण्ड हैं।
152प्रलयॐ प्रलयाय नमः।Om Pralayaya Namah।जो प्रलय के परम नियन्ता हैं।
153लयॐ लयाय नमः।Om Layaya Namah।जिनमें सम्पूर्ण सृष्टि अन्ततः विलीन होती है।
154महाहिॐ महाहये नमः।Om Mahahaye Namah।जो महान दिव्य सर्प स्वरूप हैं।
155पाणिनिॐ पाणिनये नमः।Om Paninaye Namah।जो व्याकरण एवं भाषा के दिव्य ज्ञान से सम्बद्ध हैं।
156शास्त्रभाष्यकारॐ शास्त्रभाष्यकाराय नमः।Om Shastrabhashyakaraya Namah।जो शास्त्रों के गूढ़ अर्थ को स्पष्ट करने वाले हैं।
157पतञ्जलिॐ पतञ्जलये नमः।Om Patanjalaye Namah।जो पतञ्जलि के दिव्य ज्ञानस्वरूप से सम्बद्ध हैं।
158कात्यायनॐ कात्यायनाय नमः।Om Katyayanaya Namah।जो ऋषि कात्यायन के ज्ञानस्वरूप हैं।
159पक्विमाभॐ पक्विमाभाय नमः।Om Pakvimabhaya Namah।जो दिव्य तेज एवं आभा से युक्त हैं।
160स्फोटायनॐ स्फोटायनाय नमः।Om Sphotayanaya Namah।जो शब्द एवं भाषा के दिव्य तत्त्व से सम्बद्ध हैं।
161उरङ्गमॐ उरङ्गमाय नमः।Om Urangamaya Namah।जो अनन्त नाग के समान दिव्य स्वरूप हैं।
162वैकुण्ठॐ वैकुण्ठाय नमः।Om Vaikunthaya Namah।जो परम दिव्य धाम के स्वामी हैं।
163याज्ञिकॐ याज्ञिकाय नमः।Om Yajnikaya Namah।जो यज्ञों के ज्ञाता एवं यज्ञकर्ता हैं।
164यज्ञॐ यज्ञाय नमः।Om Yajnaya Namah।जो स्वयं यज्ञस्वरूप हैं।
165वामनॐ वामनाय नमः।Om Vamanaya Namah।जो वामन के दिव्य स्वरूप से अभिन्न हैं।
166हरिणॐ हरिणाय नमः।Om Harinaya Namah।जो कोमल एवं मनोहर स्वरूप वाले हैं।
167हरिॐ हरये नमः।Om Haraye Namah।जो पाप एवं दुःखों का हरण करते हैं।
168कृष्णॐ कृष्णाय नमः।Om Krishnaya Namah।जो भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप से अभिन्न हैं।
169विष्णुॐ विष्णवे नमः।Om Vishnave Namah।जो सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं।
170महाविष्णुॐ महाविष्णवे नमः।Om Mahavishnave Namah।जो महाविष्णु के परम दिव्य स्वरूप हैं।
171प्रभविष्णुॐ प्रभविष्णवे नमः।Om Prabhavishnave Namah।जो सर्वशक्तिमान एवं प्रभावशाली हैं।
172विशेषवित्ॐ विशेषविते नमः।Om Visheshavite Namah।जो समस्त विशेष तत्त्वों के ज्ञाता हैं।
173हंसॐ हंसाय नमः।Om Hamsaya Namah।जो परम ज्ञान एवं विवेक के प्रतीक हंसस्वरूप हैं।
174योगेश्वरॐ योगेश्वराय नमः।Om Yogeshvaraya Namah।जो समस्त योगों के परमेश्वर हैं।
175कूर्मॐ कूर्माय नमः।Om Kurmaya Namah।जो कूर्म के दिव्य अवतार स्वरूप हैं।
176वराहॐ वराहाय नमः।Om Varahaya Namah।जो वराह के दिव्य स्वरूप से अभिन्न हैं।
177नारदॐ नारदाय नमः।Om Naradaya Namah।जो नारद के दिव्य ज्ञान एवं भक्ति से सम्बद्ध हैं।
178मुनिॐ मुनये नमः।Om Munaye Namah।जो महान ऋषियों एवं मुनियों के स्वरूप हैं।
179सनकॐ सनकाय नमः।Om Sanakaya Namah।जो सनक ऋषि के दिव्य ज्ञानस्वरूप हैं।
180कपिलॐ कपिलाय नमः।Om Kapilaya Namah।जो कपिल मुनि के ज्ञानस्वरूप हैं।
181मत्स्यॐ मत्स्याय नमः।Om Matsyaya Namah।जो मत्स्य के दिव्य अवतार स्वरूप हैं।
182कमठॐ कमठाय नमः।Om Kamathaya Namah।जो कूर्म अर्थात् कमठ स्वरूप हैं।
183देवमङ्गलॐ देवमङ्गलाय नमः।Om Devamangalaya Namah।जो देवताओं के लिए मंगल एवं कल्याणकारी हैं।
184दत्तात्रेयॐ दत्तात्रेयाय नमः।Om Dattatreyaya Namah।जो दत्तात्रेय के दिव्य ज्ञानस्वरूप हैं।
185पृथुॐ पृथवे नमः।Om Prithave Namah।जो पृथु महाराज के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
186वृद्धॐ वृद्धाय नमः।Om Vriddhaya Namah।जो प्राचीन, अनुभवी एवं सनातन हैं।
187ऋषभॐ ऋषभाय नमः।Om Rishabhaya Namah।जो श्रेष्ठ एवं धर्मस्वरूप हैं।
188भार्गवोत्तमॐ भार्गवोत्तमाय नमः।Om Bhargavottamaya Namah।जो भार्गव वंश में श्रेष्ठ स्वरूप हैं।
189धन्वन्तरिॐ धन्वन्तरये नमः।Om Dhanvantaraye Namah।जो आरोग्य एवं दिव्य चिकित्सा के अधिष्ठाता हैं।
190नृसिंहॐ नृसिंहाय नमः।Om Nrisimhaya Namah।जो भगवान नृसिंह के दिव्य स्वरूप से अभिन्न हैं।
191कल्किॐ कल्किने नमः।Om Kalkine Namah।जो कल्कि के दिव्य अवतार स्वरूप हैं।
192नारायणॐ नारायणाय नमः।Om Narayanaya Namah।जो समस्त जीवों के परम आश्रय हैं।
193नरॐ नराय नमः।Om Naraya Namah।जो परम पुरुष एवं दिव्य नर स्वरूप हैं।
194रामचन्द्रॐ रामचन्द्राय नमः।Om Ramachandraya Namah।जो भगवान श्रीरामचन्द्र के दिव्य स्वरूप से अभिन्न हैं।
195राघवेन्द्रॐ राघवेन्द्राय नमः।Om Raghavendraya Namah।जो रघुवंश में श्रेष्ठ एवं पूजनीय हैं।
196कोशलेन्द्रॐ कोशलेन्द्राय नमः।Om Koshalendraya Namah।जो कोशल राज्य के अधिपति स्वरूप हैं।
197रघूद्वहॐ रघूद्वहाय नमः।Om Raghudvahaha Namah।जो रघुवंश की महान परम्परा को धारण करने वाले हैं।
198काकुत्स्थॐ काकुत्स्थाय नमः।Om Kakutsthaya Namah।जो काकुत्स्थ वंश के परम गौरव हैं।
199करुणासिन्धुॐ करुणासिन्धवे नमः।Om Karunasindhave Namah।जो असीम करुणा के महासागर हैं।
200राजेन्द्रॐ राजेन्द्राय नमः।Om Rajendraya Namah।जो राजाओं में श्रेष्ठ एवं परम अधिपति हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
201दाशरथिॐ दाशरथये नमः।Om Dasharathaye Namah।जो राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम के स्वरूप हैं।
202स्त्राताॐ स्त्रात्रे नमः।Om Stratre Namah।जो भक्तों की रक्षा एवं उद्धार करने वाले हैं।
203कौसल्यानन्दवर्धनॐ कौसल्यानन्दवर्धनाय नमः।Om Kausalyanandavardhanaya Namah।जो माता कौसल्या के आनन्द को बढ़ाने वाले हैं।
204सौमित्रिॐ सौमित्रये नमः।Om Saumitraye Namah।जो लक्ष्मण के स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
205भरतॐ भरताय नमः।Om Bharataya Namah।जो भरत के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
206धन्वीॐ धन्विने नमः।Om Dhanvine Namah।जो धनुष धारण करने वाले हैं।
207शत्रुघ्नॐ शत्रुघ्नाय नमः।Om Shatrughnaya Namah।जो शत्रुओं का संहार करने वाले हैं।
208शत्रुतापनॐ शत्रुतापनाय नमः।Om Shatrutapanaya Namah।जो शत्रुओं को संतप्त एवं पराजित करते हैं।
209निषङ्गीॐ निषङ्गीने नमः।Om Nishangine Namah।जो तरकश धारण करने वाले हैं।
210कवचीॐ कवचिने नमः।Om Kavachine Namah।जो युद्ध में दिव्य कवच धारण करते हैं।
211खड्गीॐ खड्गिने नमः।Om Khadgine Namah।जो तलवार धारण करने वाले हैं।
212शरीॐ शरिणे नमः।Om Sharine Namah।जो बाण धारण करने वाले महान धनुर्धर हैं।
213ज्याहतकोष्टकॐ ज्याहतकोष्टकाय नमः।Om Jyahatakoshtakaya Namah।जिनके धनुष की टंकार से तरकश गुंजायमान होता है।
214बद्धगोधाङ्गुलित्राणॐ बद्धगोधाङ्गुलित्राणाय नमः।Om Baddhagodhangulitranaya Namah।जो धनुर्विद्या के लिए अंगुलित्राण धारण करते हैं।
215शम्भुकोदण्डभञ्जनॐ शम्भुकोदण्डभञ्जनाय नमः।Om Shambhukodandabhanjanaya Namah।जिन्होंने भगवान शिव के महान धनुष को तोड़ा।
216यज्ञत्राताॐ यज्ञत्रात्रे नमः।Om Yajnatratre Namah।जो ऋषियों के यज्ञों की रक्षा करते हैं।
217यज्ञभर्ताॐ यज्ञभर्त्रे नमः।Om Yajnabhartre Namah।जो यज्ञ का पालन एवं संरक्षण करते हैं।
218मारीचवधकारकॐ मारीचवधकारकाय नमः।Om Marichavadhakarakaya Namah।जिन्होंने मारीच का वध किया।
219असुरारिॐ असुरारये नमः।Om Asuraraye Namah।जो असुरों के शत्रु एवं संहारक हैं।
220ताटकारिॐ ताटकारये नमः।Om Tatakaraye Namah।जिन्होंने ताड़का का वध किया।
221विभीषणसहायकृत्ॐ विभीषणसहायकृते नमः।Om Vibhishanasahayakrite Namah।जिन्होंने विभीषण की सहायता की।
222पितृवाक्यकरॐ पितृवाक्यकाराय नमः।Om Pitrivakyakaraya Namah।जो पिता के वचन का पालन करने वाले हैं।
223हर्षीॐ हर्षिणे नमः।Om Harshine Namah।जो भक्तों को आनन्द एवं प्रसन्नता प्रदान करते हैं।
224विराधारिॐ विराधारये नमः।Om Viradharaye Namah।जिन्होंने विराध का संहार किया।
225वनेचरॐ वनेचराय नमः।Om Vanecharaya Namah।जो वन में विचरण करने वाले हैं।
226मुनिॐ मुनये नमः।Om Munaye Namah।जो मुनियों के समान तपस्वी एवं शांत हैं।
227मुनिप्रियॐ मुनिप्रियाय नमः।Om Munipriyaya Namah।जो ऋषि-मुनियों को अत्यन्त प्रिय हैं।
228चित्रकूटारण्यनिवासकृत्ॐ चित्रकूटारण्यनिवासकृते नमः।Om Chitrakutaranyanivasakrite Namah।जो चित्रकूट वन में निवास करने वाले हैं।
229कबन्धघ्नॐ कबन्धघ्ने नमः।Om Kabandhaghne Namah।जिन्होंने कबन्ध नामक असुर का वध किया।
230दण्डकेशॐ दण्डकेशाय नमः।Om Dandakeshaya Namah।जो दण्डकारण्य के अधिपति हैं।
231रामॐ रामाय नमः।Om Ramaya Namah।जो सभी को आनन्द प्रदान करने वाले हैं।
232राजीवलोचनॐ राजीवलोचनाय नमः।Om Rajivalochanaya Namah।जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं।
233मतङ्गवनसञ्चारीॐ मतङ्गवनसञ्चारिणे नमः।Om Matangavanasancharine Namah।जो मतंग ऋषि के वन में विचरण करने वाले हैं।
234नेताॐ नेत्रे नमः।Om Netre Namah।जो मार्गदर्शन एवं नेतृत्व करने वाले हैं।
235पञ्चवटीपतिॐ पञ्चवटीपतये नमः।Om Panchavatipataye Namah।जो पंचवटी के अधिपति हैं।
236सुग्रीवॐ सुग्रीवाय नमः।Om Sugrivaya Namah।जो सुग्रीव के साथ मैत्री एवं सहयोग से सम्बद्ध हैं।
237सुग्रीवसखाॐ सुग्रीवसखाय नमः।Om Sugrivasakhaya Namah।जो सुग्रीव के प्रिय मित्र हैं।
238हनुमत्प्रीतमानसॐ हनुमत्प्रीतमानसाय नमः।Om Hanumatpritamanasaya Namah।जिन्हें हनुमान की भक्ति अत्यन्त प्रिय है।
239सेतुबन्धॐ सेतुबन्धाय नमः।Om Setubandhaya Namah।जिन्होंने समुद्र पर सेतु का निर्माण कराया।
240रावणारिॐ रावणारये नमः।Om Ravanaraye Namah।जो रावण के शत्रु एवं संहारक हैं।
241लङ्कादहनतत्परॐ लङ्कादहनतत्पराय नमः।Om Lankadahanatatparaya Namah।जो लंका के दहन में तत्पर थे।
242रावण्यारिॐ रावण्यरये नमः।Om Ravanyaraye Namah।जो रावण के पुत्र इन्द्रजीत के शत्रु हैं।
243पुष्पकस्थॐ पुष्पकस्थाय नमः।Om Pushpakasthaya Namah।जो पुष्पक विमान पर आरूढ़ हुए।
244जानकीविरहातुरॐ जानकीविरहातुराय नमः।Om Janakivirahaturaya Namah।जो माता सीता के वियोग में व्याकुल हुए।
245अयोध्याधिपतिॐ अयोध्याधिपतये नमः।Om Ayodhyadhipataye Namah।जो अयोध्या के अधिपति हैं।
246श्रीमल्लवणारिॐ श्रीमल्लवणारये नमः।Om Shrimallavanaraye Namah।जिन्होंने लवणासुर का संहार किया।
247सुरार्चितॐ सुरार्चिताय नमः।Om Surarchitaya Namah।जिनकी देवता भी पूजा करते हैं।
248सूर्यवंशीॐ सूर्यवंशिने नमः।Om Suryavamshine Namah।जो सूर्यवंश से सम्बद्ध हैं।
249चन्द्रवंशीॐ चन्द्रवंशिने नमः।Om Chandravamshine Namah।जो चन्द्रवंश से सम्बद्ध दिव्य स्वरूप हैं।
250वंशीवाद्यविशारदॐ वंशीवाद्यविशारदाय नमः।Om Vamshivadyavisharadaya Namah।जो वंशी वादन में निपुण हैं।
251गोपतिॐ गोपतये नमः।Om Gopataye Namah।जो गौओं के रक्षक एवं स्वामी हैं।
252गोपवृन्देशॐ गोपवृन्देशाय नमः।Om Gopavrindeshaya Namah।जो गोप समुदाय के अधिपति हैं।
253गोपॐ गोपाय नमः।Om Gopaya Namah।जो गौओं एवं गोपों की रक्षा करते हैं।
254गोपिशतावृतॐ गोपिशतावृताय नमः।Om Gopishatavritaya Namah।जो सैकड़ों गोपियों से घिरे रहते हैं।
255गोकुलेशॐ गोकुलेशाय नमः।Om Gokuleshaya Namah।जो गोकुल के स्वामी हैं।
256गोपपुत्रॐ गोपपुत्राय नमः।Om Gopaputraya Namah।जो गोप परिवार में पुत्र रूप में प्रकट हुए।
257गोपालॐ गोपालाय नमः।Om Gopalaya Namah।जो गौओं एवं गोपों के पालनकर्ता हैं।
258गोगणाश्रयॐ गोगणाश्रयाय नमः।Om Goganashrayaya Namah।जो गौसमुदाय के आश्रय एवं रक्षक हैं।
259पूतनारिॐ पूतनारये नमः।Om Putanaraye Namah।जो पूतना की शत्रु शक्ति के रूप में पूजित हैं।
260बकारिॐ बकारये नमः।Om Bakaraye Namah।जिन्होंने बकासुर का संहार किया।
261तृणावर्तनिपातकॐ तृणावर्तनिपातकाय नमः।Om Trinavartanipatakaya Namah।जिन्होंने तृणावर्त का विनाश किया।
262अघारिॐ अघारये नमः।Om Agharaye Namah।जिन्होंने अघासुर का संहार किया।
263धेनुकारिॐ धेनुकारये नमः।Om Dhenukaraye Namah।जिन्होंने धेनुकासुर का वध किया।
264प्रलम्बारिॐ प्रलम्बारये नमः।Om Pralambaraye Namah।जिन्होंने प्रलम्बासुर का संहार किया।
265व्रजेश्वरॐ व्रजेश्वराय नमः।Om Vrajeshvaraya Namah।जो व्रज के अधिपति एवं रक्षक हैं।
266अरिष्टघ्नॐ अरिष्टघ्ने नमः।Om Arishtaghne Namah।जिन्होंने अरिष्टासुर का वध किया।
267केशिशत्रुॐ केशिशत्रवे नमः।Om Keshishatrave Namah।जिन्होंने केशी असुर का सामना एवं संहार किया।
268व्योमासुरविनाशकृत्ॐ व्योमासुरविनाशकृते नमः।Om Vyomasuravinashakrite Namah।जिन्होंने व्योमासुर का विनाश किया।
269अग्निपानॐ अग्निपानाय नमः।Om Agnipanaya Namah।जो अग्नि को भी अपने दिव्य स्वरूप में धारण करने वाले हैं।
270दुग्धपानॐ दुग्धपानाय नमः।Om Dugdhapanaya Namah।जिन्हें दूध अत्यन्त प्रिय है।
271वृन्दावनलताश्रितॐ वृन्दावनलताश्रिताय नमः।Om Vrindavanalatashritaya Namah।जो वृन्दावन की लताओं के मध्य निवास करते हैं।
272यशोमतिसुतॐ यशोमतिसुताय नमः।Om Yashomatisutaya Namah।जो माता यशोदा के प्रिय पुत्र स्वरूप हैं।
273भव्यॐ भव्याय नमः।Om Bhavyaya Namah।जो मंगलमय एवं गौरवशाली हैं।
274रोहिणीलालितॐ रोहिणीलालिताय नमः।Om Rohinilalitaya Namah।जिन्हें माता रोहिणी ने स्नेहपूर्वक पाला।
275शिशुॐ शिशवे नमः।Om Shishave Namah।जो दिव्य बालस्वरूप में विराजमान हैं।
276रासमण्डलमध्यस्थॐ रासमण्डलमध्यस्थाय नमः।Om Rasamandalamadhyasthaya Namah।जो रासमण्डल के मध्य विराजमान हैं।
277रासमण्डलमण्डनॐ रासमण्डलमण्डनाय नमः।Om Rasamandalamandanaya Namah।जो रासमण्डल की शोभा बढ़ाने वाले हैं।
278गोपिकाशतयूथार्थीॐ गोपिकाशतयूथार्थिने नमः।Om Gopikashatayutharthine Namah।जिन्हें अनेक गोपियों का समूह प्रेमपूर्वक चाहता है।
279शङ्खचूडवधोद्यतॐ शङ्खचूडावधोद्यताय नमः।Om Shankhachudavadhodyataya Namah।जो शंखचूड़ के वध के लिए उद्यत हुए।
280गोवर्धनसमुद्धर्ताॐ गोवर्धनसमुद्धर्त्रे नमः।Om Govardhanasamuddhartre Namah।जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठाया।
281शक्रजित्ॐ शक्रजिते नमः।Om Shakrajite Namah।जिन्होंने इन्द्र के अभिमान को पराजित किया।
282व्रजरक्षकॐ व्रजरक्षकाय नमः।Om Vrajarakshakaya Namah।जो व्रजवासियों के रक्षक हैं।
283वृषभानुवरॐ वृषभानुवराय नमः।Om Vrishabhanuvaraya Namah।जो वृषभानु कुल में श्रेष्ठ एवं प्रिय हैं।
284नन्दॐ नन्दाय नमः।Om Nandaya Namah।जो आनन्द प्रदान करने वाले हैं।
285आनन्दॐ आनन्दाय नमः।Om Anandaya Namah।जो स्वयं परम आनन्द के स्वरूप हैं।
286नन्दवर्धनॐ नन्दवर्धनाय नमः।Om Nandavardhanaya Namah।जो नन्द के आनन्द एवं समृद्धि को बढ़ाने वाले हैं।
287नन्दरजसुतॐ नन्दराजसुताय नमः।Om Nandarajasutaya Namah।जो नन्दराज के प्रिय पुत्र हैं।
288श्रीशॐ श्रीशाय नमः।Om Shrishaya Namah।जो श्री अर्थात् लक्ष्मी के स्वामी हैं।
289कंसारिॐ कंसारये नमः।Om Kamsaraye Namah।जो कंस के शत्रु एवं संहारक हैं।
290कालियान्तकॐ कालियान्तकाय नमः।Om Kaliyantakaya Namah।जिन्होंने कालिय नाग का दमन किया।
291रजकारिॐ रजकारये नमः।Om Rajakaraye Namah।जिन्होंने दुष्ट रजक के अभिमान को नष्ट किया।
292मुष्टिकारिॐ मुष्टिकारये नमः।Om Mushtikaraye Namah।जिन्होंने मुष्टिक पहलवान का वध किया।
293कंसकोदण्डभञ्जनॐ कंसकोदण्डभञ्जनाय नमः।Om Kamsakodandabhanjanaya Namah।जिन्होंने कंस के महान धनुष को तोड़ा।
294चाणूरारिॐ चाणूरारये नमः।Om Chanuraraye Namah।जिन्होंने चाणूर पहलवान को पराजित किया।
295कूटहन्तृॐ कूटहन्त्रे नमः।Om Kutahantre Namah।जो छल एवं कपट का नाश करने वाले हैं।
296शलारिॐ शलारिणे नमः।Om Shalarine Namah।जो शल नामक योद्धा के शत्रु हैं।
297तोशलान्तकॐ तोशलान्तकाय नमः।Om Toshalantakaya Namah।जिन्होंने तोशल नामक पहलवान का अंत किया।
298कंसभ्रातृनिहन्तृॐ कंसभ्रातृनिहन्त्रे नमः।Om Kamsabhratrinihantre Namah।जिन्होंने कंस के भाइयों का संहार किया।
299मल्लयुद्धप्रवर्तकॐ मल्लयुद्धप्रवर्तकाय नमः।Om Mallayuddhapravartakaya Namah।जिन्होंने मल्लयुद्ध का आरम्भ एवं संचालन किया।
300गजहन्तृॐ गजहन्त्रे नमः।Om Gajahantre Namah।जिन्होंने मदमस्त हाथी कुवलयापीड का संहार किया।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
301कंसहन्तृॐ कंसहन्त्रे नमः।Om Kamsahantre Namah।जो कंस का संहार करने वाले हैं।
302कालहन्तृॐ कालहन्त्रे नमः।Om Kalahantre Namah।जो काल एवं मृत्यु के भी नियन्ता हैं।
303कलङ्कघ्नॐ कलङ्कघ्ने नमः।Om Kalankaghne Namah।जो सभी कलंक एवं दोषों का नाश करते हैं।
304मागधारिॐ मागधारये नमः।Om Magadharaye Namah।जो मगध के शत्रुओं का विनाश करने वाले हैं।
305यवनघ्नॐ यवनघ्ने नमः।Om Yavanaghne Namah।जो यवन शक्तियों का संहार करने वाले हैं।
306पाण्डुपुत्रसहायकृत्ॐ पाण्डुपुत्रसहायकृते नमः।Om Panduputrasahayakrite Namah।जो पाण्डवों की सहायता करने वाले हैं।
307चतुर्भुजॐ चतुर्भुजाय नमः।Om Chaturbhujaya Namah।जो चार भुजाओं वाले दिव्य स्वरूप हैं।
308श्यामलाङ्गॐ श्यामलाङ्गाय नमः।Om Shyamalangaya Namah।जिनका दिव्य शरीर श्याम वर्ण का है।
309सौम्यॐ सौम्याय नमः।Om Saumyaya Namah।जो शांत, कोमल एवं मनोहर स्वरूप वाले हैं।
310औपगाविप्रियॐ औपगाविप्रियाय नमः।Om Aupagavipriyaya Namah।जो औपगवि वंश एवं भक्तों को प्रिय हैं।
311युद्धभृत्ॐ युद्धभृते नमः।Om Yuddhabhrite Namah।जो धर्मयुद्ध में समर्थ एवं रक्षक हैं।
312उद्धवसखिॐ उद्धवसख्ये नमः।Om Uddhavasakhye Namah।जो उद्धव के प्रिय सखा हैं।
313मन्त्रीॐ मन्त्रिणे नमः।Om Mantrine Namah।जो नीति एवं मन्त्र के ज्ञाता हैं।
314मन्त्रविशारदॐ मन्त्रविशारदाय नमः।Om Mantravisharadaya Namah।जो मन्त्र एवं नीति में अत्यन्त कुशल हैं।
315वीरघ्नॐ वीरघ्ने नमः।Om Viraghne Namah।जो दुष्ट वीरों का संहार करने वाले हैं।
316वीरमथनॐ वीरमथनाय नमः।Om Viramathanaya Namah।जो शक्तिशाली योद्धाओं का दमन करते हैं।
317शङ्खचक्रगदाधरॐ शङ्खचक्रगदाधराय नमः।Om Shankhachakragadadharaya Namah।जो शंख, चक्र एवं गदा धारण करते हैं।
318रेवतीचित्तहर्तृॐ रेवतीचित्तहर्त्रे नमः।Om Revatichittahartre Namah।जिन्होंने देवी रेवती के हृदय को अपने प्रेम से जीत लिया।
319रेवतीहर्षवर्धनॐ रेवतीहर्षवर्धनाय नमः।Om Revatiharshavardhanaya Namah।जो देवी रेवती के आनन्द को बढ़ाने वाले हैं।
320रेवतीप्राणनाथॐ रेवतीप्राणनाथाय नमः।Om Revatiprananathaya Namah।जो देवी रेवती के प्राणप्रिय पति हैं।
321रेवतीप्रियकारकॐ रेवतीप्रियकारकाय नमः।Om Revatipriyakarakaya Namah।जो रेवती को सदैव प्रसन्न करने वाले हैं।
322ज्योतिस्ॐ ज्योतिषे नमः।Om Jyotishe Namah।जो दिव्य प्रकाश एवं ज्योति के स्वरूप हैं।
323ज्योतिष्मतिभर्तृॐ ज्योतिष्मतिभर्त्रे नमः।Om Jyotishmatibhartre Namah।जो ज्योतिर्मयी शक्ति के स्वामी हैं।
324रैवताद्रिविहारकृत्ॐ रैवताद्रिविहारकृते नमः।Om Raivatadriviharakrite Namah।जो रैवत पर्वत पर विहार करने वाले हैं।
325धृतिनाथॐ धृतिनाथाय नमः।Om Dhritinathaya Namah।जो धैर्य एवं स्थिरता के स्वामी हैं।
326धनाध्यक्षॐ धनाध्यक्षाय नमः।Om Dhanadhyakshaya Namah।जो धन-संपदा के अधिपति हैं।
327दानाध्यक्षॐ दानाध्यक्षाय नमः।Om Danadhyakshaya Namah।जो दान एवं उदारता के नियन्ता हैं।
328धनेश्वरॐ धनेश्वराय नमः।Om Dhaneshvaraya Namah।जो धन एवं ऐश्वर्य के परम स्वामी हैं।
329मैथिलार्चितपादाब्जॐ मैथिलार्चितपादाब्जाय नमः।Om Maithilarchitapadabjaya Namah।जिनके कमल समान चरणों की मैथिलों ने पूजा की।
330मानदॐ मानदाय नमः।Om Manadaya Namah।जो सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं।
331भक्तवत्सलॐ भक्तवत्सलाय नमः।Om Bhaktavatsalaya Namah।जो अपने भक्तों से अत्यन्त प्रेम करते हैं।
332दुर्योधनगुरुॐ दुर्योधनगुरवे नमः।Om Duryodhanagurave Namah।जो दुर्योधन के गदा-युद्ध के गुरु थे।
333गुर्विन्ॐ गुर्विने नमः।Om Gurvine Namah।जो महान गुरु एवं मार्गदर्शक हैं।
334गदाशिक्षकरॐ गदाशिक्षकराय नमः।Om Gadashikshakaraya Namah।जो गदा-युद्ध की शिक्षा देने वाले हैं।
335क्षमिन्ॐ क्षमिणे नमः।Om Kshamine Namah।जो अत्यन्त क्षमाशील हैं।
336मुरारिॐ मुरारये नमः।Om Muraraye Namah।जो मुर नामक असुर के शत्रु हैं।
337मदनॐ मदनाय नमः।Om Madanaya Namah।जो अत्यन्त मनोहर एवं आकर्षक हैं।
338मन्दॐ मन्दाय नमः।Om Mandaya Namah।जो शांत एवं सौम्य गति वाले हैं।
339अनिरुद्धॐ अनिरुद्धाय नमः।Om Aniruddhaya Namah।जो अजेय एवं अवरोध से परे हैं।
340धन्विनां वरॐ धन्विनां वराय नमः।Om Dhanvinam Varaya Namah।जो धनुर्धरों में श्रेष्ठ हैं।
341कल्पवृक्षॐ कल्पवृक्षाय नमः।Om Kalpavrikshaya Namah।जो कल्पवृक्ष के समान सभी इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।
342कल्पवृक्षीॐ कल्पवृक्षिणे नमः।Om Kalpavrikshine Namah।जो कल्पवृक्ष के समान आश्रय एवं वरदान प्रदान करते हैं।
343कल्पवृक्षॐ कल्पवृक्षाय नमः।Om Kalpavrikshaya Namah।जो भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले हैं।
344कल्पवृक्षवनप्रभुॐ कल्पवृक्षवनप्रभवे नमः।Om Kalpavrikshavanaprabhave Namah।जो कल्पवृक्षों के दिव्य वन के स्वामी हैं।
345स्यमन्तकमणिॐ स्यमन्तकमणये नमः।Om Syamantakamanaye Namah।जो स्यमन्तक मणि से सम्बद्ध दिव्य स्वरूप हैं।
346मान्यॐ मान्याय नमः।Om Manyaya Namah।जो सभी के लिए सम्माननीय एवं पूजनीय हैं।
347गाण्डीविन्ॐ गाण्डीविने नमः।Om Gandivine Namah।जो दिव्य धनुष एवं शस्त्र-विद्या से सम्बद्ध हैं।
348कौरवेश्वरॐ कौरवेश्वराय नमः।Om Kauraveshvaraya Namah।जो कौरवों के बीच भी परम सम्मानित हैं।
349कुम्भाण्डखण्डनकरॐ कुम्भाण्डखण्डनकराय नमः।Om Kumbhandakhandanakaraya Namah।जो कुम्भाण्ड आदि दुष्ट शक्तियों का विनाश करते हैं।
350कूपकर्णप्रहारकृत्ॐ कूपकर्णप्रहारकृते नमः।Om Kupakarnapraharakrite Namah।जो कूपकर्ण पर प्रहार करने वाले हैं।
351सेव्यॐ सेव्याय नमः।Om Sevyaya Namah।जिनकी भक्तिपूर्वक सेवा की जाती है।
352रैवतजामातृॐ रैवतजामात्रे नमः।Om Raivatajamatre Namah।जो राजा रैवत के दामाद हैं।
353मधुमाधवसेवितॐ मधुमाधवसेविताय नमः।Om Madhumadhavasevitaya Namah।जिनकी मधु एवं माधव स्वरूपों द्वारा सेवा की जाती है।
354बलिष्ठपुष्टसर्वाङ्गॐ बलिष्ठपुष्टसर्वाङ्गाय नमः।Om Balishthapushtasarvangaya Namah।जिनका सम्पूर्ण शरीर अत्यन्त बलवान एवं पुष्ट है।
355हृष्टॐ हृष्टाय नमः।Om Hrishtaya Namah।जो सदैव प्रसन्न एवं हर्षित रहते हैं।
356पुष्टॐ पुष्टाय नमः।Om Pushtaya Namah।जो शक्ति, समृद्धि एवं पोषण के स्वरूप हैं।
357प्रहर्षितॐ प्रहर्षिताय नमः।Om Praharshitaya Namah।जो परम आनन्द से सदैव प्रफुल्लित रहते हैं।
358वाराणसीगतॐ वाराणसीगताय नमः।Om Varanasigataya Namah।जो वाराणसी में पधारने वाले हैं।
359क्रुद्धॐ क्रुद्धाय नमः।Om Kruddhaya Namah।जो अधर्म के विरुद्ध उग्र स्वरूप धारण करते हैं।
360सर्वॐ सर्वाय नमः।Om Sarvaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं।
361पौण्ड्रकघातकॐ पौण्ड्रकघातकाय नमः।Om Paundrakaghatakaya Namah।जो पौण्ड्रक के विनाश से सम्बद्ध हैं।
362सुनन्दिन्ॐ सुनन्दिने नमः।Om Sunandine Namah।जो आनन्द एवं शुभता प्रदान करते हैं।
363शिखरिन्ॐ शिखरिणे नमः।Om Shikharine Namah।जो पर्वत के शिखर के समान उच्च एवं श्रेष्ठ हैं।
364शिल्पिन्ॐ शिल्पिने नमः।Om Shilpine Namah।जो दिव्य कला एवं कौशल के ज्ञाता हैं।
365द्विविदाङ्गनिषूदनॐ द्विविदाङ्गनिषूदनाय नमः।Om Dvividanganishudanaya Namah।जिन्होंने द्विविद वानर का संहार किया।
366हस्तिनापुरसङ्कर्षिन्ॐ हस्तिनापुरसङ्कर्षिणे नमः।Om Hastinapurasankarshine Namah।जिन्होंने हल के बल से हस्तिनापुर को अपनी ओर खींचा।
367रथिन्ॐ रथिने नमः।Om Rathine Namah।जो दिव्य रथ पर आरूढ़ होने वाले हैं।
368कौरवपूजितॐ कौरवपूजिताय नमः।Om Kauravapujitaya Namah।जिनकी कौरवों ने भी पूजा एवं सम्मान किया।
369विश्वकर्माॐ विश्वकर्मणे नमः।Om Vishvakarmane Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के दिव्य निर्माणकर्ता हैं।
370विश्वधर्माॐ विश्वधर्मणे नमः।Om Vishvadharmane Namah।जो सम्पूर्ण विश्व के धर्म के आधार हैं।
371देवशर्माॐ देवशर्मणे नमः।Om Devasharmane Namah।जो देवताओं को शान्ति एवं कल्याण प्रदान करते हैं।
372दयानिधिॐ दयानिधये नमः।Om Dayanidhaye Namah।जो करुणा एवं दया के महासागर हैं।
373महाराजछत्रधरॐ महाराजछत्रधराय नमः।Om Maharajachhatradharaya Namah।जो महाराज के राजचिह्न एवं छत्र धारण करने वाले हैं।
374महाराजोपलक्षणॐ महाराजोपलक्षणाय नमः।Om Maharajopalakshanaya Namah।जो महान राजसी वैभव एवं गौरव से युक्त हैं।
375सिद्धगीतॐ सिद्धगीताय नमः।Om Siddhagitaya Namah।जिनकी स्तुति सिद्ध पुरुषों द्वारा गीतों में की जाती है।
376सिद्धकथाॐ सिद्धकथाय नमः।Om Siddhakathaya Namah।जिनकी दिव्य कथाएँ सिद्धों द्वारा गाई एवं कही जाती हैं।
377शुक्लचामरवीजितॐ शुक्लचामरवीजिताय नमः।Om Shuklachamaravijitaya Namah।जिनकी श्वेत चामरों से सेवा की जाती है।
378तारक्षॐ तारक्षाय नमः।Om Tarakshaya Namah।जो तेजस्वी एवं शक्तिशाली स्वरूप वाले हैं।
379किरणासॐ किरानासाय नमः।Om Kiranasaya Namah।जो दिव्य किरणों से प्रकाशित हैं।
380बिम्बोष्ठॐ बिम्बोष्ठाय नमः।Om Bimboshthaya Namah।जिनके अधर बिम्ब फल के समान लाल एवं सुन्दर हैं।
381सुस्मितच्छविॐ सुस्मितच्छवये नमः।Om Susmitachchhavaye Namah।जिनकी मनोहर मुस्कान दिव्य आभा बिखेरती है।
382करीन्द्रकरकोदण्डॐ करीन्द्रकरकोदण्डाय नमः।Om Karindrakarakodandaya Namah।जिनकी भुजाएँ हाथी की सूँड के समान शक्तिशाली हैं।
383प्रचण्डॐ प्रचण्डाय नमः।Om Prachandaya Namah।जो अत्यन्त शक्तिशाली एवं प्रचण्ड हैं।
384मेघमण्डलॐ मेघमण्डलाय नमः।Om Meghamandalaya Namah।जिनका दिव्य स्वरूप मेघमण्डल के समान विशाल एवं प्रभावशाली है।
385कपाटवक्षस्ॐ कपाटवक्षसे नमः।Om Kapatavakshase Namah।जिनका वक्षस्थल विशाल एवं द्वार के समान चौड़ा है।
386पीनांसॐ पीनाम्साय नमः।Om Pinamsaya Namah।जिनके कंधे अत्यन्त पुष्ट एवं शक्तिशाली हैं।
387पद्मपादस्फुरद्युतिःॐ पद्मपादस्फुरद्युतये नमः।Om Padmapadasphuradyutaye Namah।जिनके कमल समान चरण दिव्य प्रकाश से चमकते हैं।
388महाविभूतिॐ महाविभूतये नमः।Om Mahavibhutaye Namah।जो महान दिव्य ऐश्वर्य एवं शक्ति के स्वरूप हैं।
389भूतेशॐ भूतेशाय नमः।Om Bhuteshaya Namah।जो समस्त भूतों एवं प्राणियों के स्वामी हैं।
390बन्धमोक्षिन्ॐ बन्धमोक्षिणे नमः।Om Bandhamokshine Namah।जो जीवों को सांसारिक बन्धनों से मुक्त करते हैं।
391समीक्षणॐ समीक्षणाय नमः।Om Samikshanaya Namah।जो सम्पूर्ण जगत पर कृपापूर्ण दृष्टि रखते हैं।
392चैद्यशत्रुॐ चैद्यशत्रवे नमः।Om Chaidyashatrave Namah।जो चैद्यराज के शत्रु हैं।
393शत्रुसन्धॐ शत्रुसन्धाय नमः।Om Shatrusandhaya Namah।जो शत्रुओं को पहचानकर उनका दमन करते हैं।
394दन्तवक्त्रनिषूदकॐ दन्तवक्त्रनिषूदकाय नमः।Om Dantavaktranishudakaya Namah।जिन्होंने दन्तवक्त्र का संहार किया।
395अजातशत्रुॐ अजातशत्रवे नमः।Om Ajatashatrave Namah।जिनका कोई वास्तविक शत्रु नहीं है।
396पापघ्नॐ पापघ्नाय नमः।Om Papaghnaya Namah।जो सभी पापों का नाश करने वाले हैं।
397हरिदाससहायकृत्ॐ हरिदाससहायकृते नमः।Om Haridasasahayakrite Namah।जो भगवान के भक्तों एवं सेवकों की सहायता करते हैं।
398शालबाहुॐ शालबाहवे नमः।Om Shalabahave Namah।जिनकी भुजाएँ शाल वृक्ष के समान दृढ़ एवं शक्तिशाली हैं।
399शाल्वहन्तृॐ शाल्वहन्त्रे नमः।Om Shalvahantre Namah।जिन्होंने शाल्व का संहार किया।
400तीर्थयायिन्ॐ तीर्थयायिने नमः।Om Tirthayayine Namah।जो पवित्र तीर्थों की यात्रा करने वाले हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
401जनेश्वरॐ जनेश्वराय नमः।Om Janeshvaraya Namah।जो समस्त प्राणियों के स्वामी एवं शासक हैं।
402नैमिषारण्ययात्रार्थीॐ नैमिषारण्ययात्रार्थिने नमः।Om Naimisharanyayatrarthine Namah।जो पवित्र नैमिषारण्य की यात्रा करने वाले हैं।
403गोमतीतीरवासकृत्ॐ गोमतीतीरवासकृते नमः।Om Gomatitiravasakrite Namah।जो गोमती नदी के तट पर निवास करने वाले हैं।
404गण्डकीस्नानवान्ॐ गण्डकीस्नानवते नमः।Om Gandakisnanavate Namah।जो पवित्र गण्डकी नदी में स्नान करने वाले हैं।
405स्रग्वीॐ स्रग्विणे नमः।Om Sragvine Namah।जो सुगन्धित पुष्पमाला धारण करते हैं।
406वैजयन्तीविराजितॐ वैजयन्तीविराजिताय नमः।Om Vaijayantivirajitaya Namah।जो वैजयन्ती माला से सुशोभित हैं।
407अम्लानपङ्कजधरॐ अम्लानपङ्कजधराय नमः।Om Amlanapankajadharaya Namah।जो कभी न मुरझाने वाला कमल धारण करते हैं।
408विपाशिन्ॐ विपाशिने नमः।Om Vipashine Namah।जो विपाशा नदी के तटों पर विचरण करने वाले हैं।
409शोणसम्प्लुतॐ शोणसम्प्लुताय नमः।Om Shonasamplutaya Namah।जो शोण नदी के पवित्र जल में स्नान करने वाले हैं।
410प्रयागतीर्थराजॐ प्रयागतीर्थराजाय नमः।Om Prayagatirtharajaya Namah।जो प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थ के अधिपति हैं।
411सरयूॐ सरय्वे नमः।Om Sarayve Namah।जो पवित्र सरयू नदी के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
412सेतुबन्धनॐ सेतुबन्धनाय नमः।Om Setubandhanaya Namah।जो समुद्र पर सेतु का निर्माण करने वाले हैं।
413गयाशिरस्ॐ गयाशिरसे नमः।Om Gayashirase Namah।जो गया के पवित्र तीर्थ से सम्बद्ध हैं।
414धनदॐ धनदाय नमः।Om Dhanadaya Namah।जो भक्तों को धन एवं समृद्धि प्रदान करते हैं।
415पौलस्त्यॐ पौलस्त्याय नमः।Om Paulastyaya Namah।जो पुलस्त्य ऋषि की परम्परा से सम्बद्ध हैं।
416पुलहाश्रमॐ पुलहाश्रमाय नमः।Om Pulahashramaya Namah।जो पुलह ऋषि के आश्रम में विराजमान हुए।
417गङ्गासागरसङ्गार्थीॐ गङ्गासागरसङ्गार्थिने नमः।Om Gangasagarasangarthine Namah।जो गंगा और समुद्र के पवित्र संगम की ओर जाने वाले हैं।
418सप्तगोदावरीपतिॐ सप्तगोदावरिपतये नमः।Om Saptagodavaripataye Namah।जो सप्त गोदावरी की पवित्र धाराओं के अधिपति हैं।
419वेणीॐ वेण्यै नमः।Om Venyai Namah।जो पवित्र वेणी नदी के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
420भीमरथीॐ भीमरथ्यै नमः।Om Bhimarathyai Namah।जो पवित्र भीमरथी नदी के स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
421गोदाॐ गोदायै नमः।Om Godayai Namah।जो पवित्र गोदावरी नदी के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
422ताम्रपर्णीॐ ताम्रपर्ण्यै नमः।Om Tamraparnyai Namah।जो पवित्र ताम्रपर्णी नदी के स्वरूप हैं।
423वटोदकाॐ वटोदकायै नमः।Om Vatodakayai Namah।जो वटोदका के पवित्र जल से सम्बद्ध हैं।
424कृतमालाॐ कृतमालायै नमः।Om Kritamalayai Namah।जो पवित्र कृतमाला नदी के स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
425महापुण्याॐ महापुण्यायै नमः।Om Mahapunyayai Namah।जो महान पुण्य एवं पवित्रता प्रदान करने वाले हैं।
426कावेरीॐ कावेर्यै नमः।Om Kaveryai Namah।जो पवित्र कावेरी नदी के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
427पयस्विनीॐ पयस्विन्यै नमः।Om Payasvinyai Namah।जो पवित्र एवं समृद्ध पयस्विनी नदी के स्वरूप हैं।
428प्रतीचीॐ प्रतीच्यै नमः।Om Pratichyai Namah।जो पश्चिम दिशा की ओर प्रवाहित पवित्र धारा से सम्बद्ध हैं।
429सुप्रभाॐ सुप्रभायै नमः।Om Suprabhayai Namah।जिनकी आभा अत्यन्त शुभ एवं निर्मल है।
430वेणीॐ वेण्यै नमः।Om Venyai Namah।जो पवित्र वेणी नदी के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
431त्रिवेणीॐ त्रिवेण्यै नमः।Om Trivenyai Namah।जो तीन पवित्र नदियों के संगम के स्वरूप हैं।
432सरयूपमाॐ सरयूपमायै नमः।Om Sarayupamayai Namah।जो पवित्र सरयू के समान महिमामयी हैं।
433कृष्णाॐ कृष्णायै नमः।Om Krishnayai Namah।जो पवित्र कृष्णा नदी के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
434पम्पाॐ पम्पायै नमः।Om Pampayai Namah।जो पवित्र पम्पा नदी के स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
435नर्मदाॐ नर्मदायै नमः।Om Narmadayai Namah।जो पवित्र नर्मदा नदी के दिव्य स्वरूप हैं।
436गङ्गाॐ गङ्गायै नमः।Om Gangayai Namah।जो पवित्र गंगा नदी के दिव्य स्वरूप हैं।
437भागीरथी नदीॐ भागीरथ्यै नद्यै नमः।Om Bhagirathyai Nadyai Namah।जो भागीरथ की तपस्या से पृथ्वी पर आई पवित्र गंगा हैं।
438सिद्धाश्रमॐ सिद्धाश्रमाय नमः।Om Siddhashramaya Namah।जो सिद्ध महात्माओं के पवित्र आश्रम में विराजमान हैं।
439प्रभासॐ प्रभासाय नमः।Om Prabhasaya Namah।जो प्रभास के पवित्र तीर्थ में तेजस्वी रूप से विराजमान हैं।
440बिन्दुॐ बिन्दवे नमः।Om Bindave Namah।जो पवित्र जल की दिव्य बिन्दु के समान हैं।
441बिन्दुसरोवरॐ बिन्दुसरोवराय नमः।Om Bindusarovaraya Namah।जो पवित्र बिन्दुसरोवर के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
442पुष्करॐ पुष्कराय नमः।Om Pushkaraya Namah।जो पवित्र पुष्कर तीर्थ को पावन करने वाले हैं।
443सैन्धवॐ सैन्धवाय नमः।Om Saindhavaya Namah।जो समुद्र से सम्बद्ध पवित्र तीर्थों में विचरण करने वाले हैं।
444जम्बुॐ जम्ब्वे नमः।Om Jambve Namah।जो जम्बु नामक पवित्र नदी से सम्बद्ध हैं।
445नरनारायणाश्रमॐ नरनारायणाश्रमाय नमः।Om Naranarayanashramaya Namah।जो नर-नारायण के पवित्र आश्रम में विराजमान हुए।
446कुरुक्षेत्रपतिॐ कुरुक्षेत्रपतये नमः।Om Kurukshetrapataye Namah।जो पवित्र कुरुक्षेत्र के स्वामी एवं रक्षक हैं।
447रामॐ रामाय नमः।Om Ramaya Namah।जो राम के नाम से पूजित दिव्य स्वरूप हैं।
448जामदग्न्यॐ जामदग्न्याय नमः।Om Jamadagnaya Namah।जो जमदग्नि ऋषि की परम्परा से सम्बद्ध हैं।
449महामुनिॐ महामुनये नमः।Om Mahamunaye Namah।जो महान एवं तेजस्वी मुनि के स्वरूप हैं।
450इल्वलात्मजहन्तृॐ इल्वलात्मजहन्त्रे नमः।Om Ilvalatmajahantre Namah।जो इल्वल के पुत्र का संहार करने वाले हैं।
451सुदामासौख्यदायकॐ सुदामासौख्यदायकाय नमः।Om Sudamasaukhyadayakaya Namah।जो भक्त सुदामा को सुख एवं आनन्द प्रदान करते हैं।
452विश्वजित्ॐ विश्वजिते नमः।Om Vishvajite Namah।जो सम्पूर्ण विश्व पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
453विश्वनाथॐ विश्वनाथाय नमः।Om Vishvanathaya Namah।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं।
454त्रैलोक्यविजयीॐ त्रैलोक्यविजयिने नमः।Om Trailokyavijayine Namah।जो तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
455जयीॐ जयिने नमः।Om Jayine Namah।जो सदैव विजयी रहने वाले हैं।
456वसन्तमालतीकर्षीॐ वसन्तमालतीकर्षिणे नमः।Om Vasantamalatikarshine Namah।जो वसन्त एवं मालती की सुगन्धित लताओं को आकर्षित करने वाले हैं।
457गदाॐ गदाय नमः।Om Gadaya Namah।जो गदा धारण करने वाले हैं।
458गद्यॐ गद्याय नमः।Om Gadyaya Namah।जो स्तुति एवं आराधना के योग्य हैं।
459गदाग्रजॐ गदाग्रजाय नमः।Om Gadagrajaya Namah।जो गदा के अग्रज अर्थात् बड़े भाई हैं।
460गुणार्णवॐ गुणार्णवाय नमः।Om Gunarnavaya Namah।जो सद्गुणों के महासागर हैं।
461गुणनिधिॐ गुणनिधये नमः।Om Gunanidhaye Namah।जो समस्त सद्गुणों के भण्डार हैं।
462गुणपात्रॐ गुणपात्राय नमः।Om Gunapatraya Namah।जिनमें सभी श्रेष्ठ गुण विद्यमान हैं।
463गुणाकरॐ गुणाकराय नमः।Om Gunakaraya Namah।जो सभी सद्गुणों के स्रोत हैं।
464रङ्गवल्लीॐ रङ्गवल्लिने नमः।Om Rangavalline Namah।जो रंग एवं आनन्द से भरी लता के समान मनोहर हैं।
465जलाकारॐ जलाकाराय नमः।Om Jalakaraya Namah।जिनका स्वरूप समुद्र के समान विशाल एवं तरल है।
466निर्गुणॐ निर्गुणाय नमः।Om Nirgunaya Namah।जो तीनों भौतिक गुणों से परे हैं।
467सगुणॐ सगुणाय नमः।Om Sagunaya Namah।जो दिव्य रूप में गुणों को धारण एवं प्रकट करते हैं।
468बृहत्ॐ बृहते नमः।Om Brihate Namah।जो महान एवं अनन्त विस्तार वाले हैं।
469दृष्टॐ दृष्टाय नमः।Om Drishtaya Namah।जो प्रत्यक्ष रूप से दर्शन देने वाले हैं।
470श्रुतॐ श्रुताय नमः।Om Shrutaya Namah।जिन्हें वेद एवं शास्त्रों के द्वारा जाना जाता है।
471भवद्भूतॐ भवद्भूताय नमः।Om Bhavadbhutaya Namah।जो प्राचीन काल से सदैव विद्यमान हैं।
472भविष्यत्ॐ भविष्यते नमः।Om Bhavishyate Namah।जो भविष्य के सभी कालों में भी विद्यमान रहेंगे।
473अल्पविग्रहॐ अल्पविग्रहाय नमः।Om Alpavigrahaya Namah।जिनका रूप छोटा प्रतीत होते हुए भी अनन्त शक्ति धारण करता है।
474अनादिॐ अनादये नमः।Om Anadaye Namah।जिनका कोई आदि या आरम्भ नहीं है।
475आदिॐ आदये नमः।Om Adaye Namah।जो समस्त सृष्टि के आदि एवं मूल कारण हैं।
476आनन्दॐ आनन्दाय नमः।Om Anandaya Namah।जिनका स्वरूप स्वयं परम आनन्द है।
477प्रत्यग्धामन्ॐ प्रत्यग्धाम्ने नमः।Om Pratyagdhamne Namah।जिनका प्रकाश अन्तरात्मा के रूप में भीतर प्रकाशित होता है।
478निरन्तरॐ निरन्तराय नमः।Om Nirantaraya Namah।जो निरन्तर एवं अखण्ड रूप से विद्यमान हैं।
479गुणातीतॐ गुणातीताय नमः।Om Gunatitaya Namah।जो तीनों भौतिक गुणों से परे हैं।
480समॐ समाय नमः।Om Samaya Namah।जो सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखते हैं।
481साम्यॐ साम्याय नमः।Om Samyaya Namah।जिनका स्वभाव पूर्ण समता एवं समानता का है।
482समदृश्ॐ समदृशे नमः।Om Samadrishe Namah।जो सभी को समान दृष्टि से देखते हैं।
483निर्विकल्पॐ निर्विकल्पाय नमः।Om Nirvikalpaya Namah।जो संदेह एवं द्वैत से रहित हैं।
484गूढाव्यूढॐ गूढाव्यूढाय नमः।Om Gudhavyudhaya Namah।जिनका वास्तविक स्वरूप गूढ़ होते हुए भी भक्तों के लिए प्रकट है।
485गुणॐ गुणाय नमः।Om Gunaya Namah।जो सभी श्रेष्ठ गुणों से सम्पन्न हैं।
486गौणॐ गौणाय नमः।Om Gaunaya Namah।जिनका वर्णन संसार में विभिन्न उपाधियों के माध्यम से किया जाता है।
487गुणाभासॐ गुणाभासाय नमः।Om Gunabhasaya Namah।जिनमें भौतिक गुण केवल प्रतिबिम्ब के समान दिखाई देते हैं।
488गुणावृतॐ गुणावृताय नमः।Om Gunavritaya Namah।जो भौतिक गुणों की लीला से आवृत दिखाई देते हैं।
489नित्यॐ नित्याय नमः।Om Nityaya Namah।जो शाश्वत एवं सदैव विद्यमान हैं।
490अक्षरॐ अक्षराय नमः।Om Aksharaya Namah।जो अविनाशी एवं अक्षय हैं।
491निर्विकारॐ निर्विकाराय नमः।Om Nirvikaraya Namah।जो किसी भी परिवर्तन से रहित हैं।
492अक्षरॐ अक्षराय नमः।Om Aksharaya Namah।जो कभी नष्ट न होने वाले हैं।
493अजस्रसुखॐ अजस्रसुखाय नमः।Om Ajasrasukhaya Namah।जिनका आनन्द कभी समाप्त नहीं होता।
494अमृतॐ अमृताय नमः।Om Amritaya Namah।जो अमरत्व एवं अमृत के स्वरूप हैं।
495सर्वगॐ सर्वगाय नमः।Om Sarvagaya Namah।जो सर्वत्र व्याप्त हैं।
496सर्ववित्ॐ सर्वविदे नमः।Om Sarvavide Namah।जो सब कुछ पूर्ण रूप से जानने वाले हैं।
497सार्थॐ सार्थाय नमः।Om Sarthaya Namah।जो समस्त अस्तित्व के वास्तविक उद्देश्य एवं सार हैं।
498समबुद्धिॐ समबुद्ध्यै नमः।Om Samabuddhyai Namah।जो समभाव एवं स्थिर बुद्धि के स्वरूप हैं।
499समप्रभॐ समप्रभाय नमः।Om Samaprabhaya Namah।जिनकी दिव्य आभा सभी पर समान रूप से प्रकाशित होती है।
500अक्लेद्यॐ अक्लेद्याय नमः।Om Akledyaya Namah।जिन्हें कोई भी शक्ति नष्ट या विलीन नहीं कर सकती।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
501अच्छेद्यॐ अच्छेद्याय नमः।Om Achchhedyaya Namah।जिन्हें किसी भी शस्त्र से काटा नहीं जा सकता।
502आपूर्णॐ आपूर्णाय नमः।Om Apurnaya Namah।जो सदैव पूर्ण हैं और जिनमें किसी वस्तु की कमी नहीं है।
503अशोष्यॐ अशोष्याय नमः।Om Ashoshyaya Namah।जिन्हें सुखाया या नष्ट नहीं किया जा सकता।
504अदाह्यॐ अदाह्याय नमः।Om Adahyaya Namah।जिन्हें अग्नि द्वारा जलाया नहीं जा सकता।
505अनिवर्तकॐ अनिवर्तकाय नमः।Om Anivartakaya Namah।जो कभी पीछे हटने या लौटने वाले नहीं हैं।
506ब्रह्मॐ ब्रह्मणे नमः।Om Brahmane Namah।जो परम ब्रह्म के स्वरूप हैं।
507ब्रह्मधरॐ ब्रह्मधराय नमः।Om Brahmadharaya Namah।जो पवित्र वेदों एवं ब्रह्मज्ञान को धारण करने वाले हैं।
508ब्रह्मन्ॐ ब्रह्मणे नमः।Om Brahmane Namah।जो स्वयं परम ब्रह्म हैं।
509ज्ञापकॐ ज्ञापकाय नमः।Om Jnapakaya Namah।जो सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं।
510व्यापकॐ व्यापकाय नमः।Om Vyapakaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं।
511कविॐ कवये नमः।Om Kavaye Namah।जो दिव्य ज्ञान के द्रष्टा एवं ज्ञाता हैं।
512अध्यात्मिकॐ अध्यात्मकाय नमः।Om Adhyatmikaya Namah।जो आत्मा एवं आध्यात्मिक तत्त्व के अधिपति हैं।
513अधिभूतॐ अधिभूताय नमः।Om Adhibhutaya Namah।जो समस्त भौतिक तत्त्वों एवं प्राणियों के अधिपति हैं।
514अधिदैवॐ अधिदैवाय नमः।Om Adhidaivaya Namah।जो समस्त दिव्य एवं देवशक्तियों के अधिपति हैं।
515स्वाश्रयाश्रयॐ स्वाश्रयाश्रयाय नमः।Om Svashrayashrayaya Namah।जो स्वयं अपने ही आश्रय हैं।
516महावायुॐ महावायवे नमः।Om Mahavayave Namah।जो महान ब्रह्माण्डीय वायु के समान शक्तिशाली हैं।
517महावीरॐ महावीराय नमः।Om Mahaviraya Namah।जो महान वीर एवं अद्वितीय पराक्रमी हैं।
518चेष्टाॐ चेष्टाय नमः।Om Cheshtaya Namah।जो समस्त क्रिया एवं प्रयास के मूल प्रेरक हैं।
519रूपतनुस्थितॐ रूपतनुस्थिताय नमः।Om Rupatanusthitaya Namah।जो सभी रूपों एवं शरीरों में स्थित हैं।
520प्रेरकॐ प्रेरकाय नमः।Om Prerakaya Namah।जो सभी जीवों को कर्म के लिए प्रेरित करते हैं।
521बोधकॐ बोधकाय नमः।Om Bodhakaya Namah।जो दूसरों में ज्ञान एवं समझ जागृत करते हैं।
522बोधिॐ बोधिने नमः।Om Bodhine Namah।जो ज्ञान एवं आत्मबोध के मूल स्रोत हैं।
523त्रयोविंशतिकोगणॐ त्रयोविंशतिकोगणाय नमः।Om Trayovimshatikoganaya Namah।जो तेईस ब्रह्माण्डीय तत्त्वों के अधिपति हैं।
524अंशांशॐ अंशांशाय नमः।Om Amshamshaya Namah।जो प्रत्येक अंश में अपने दिव्य अंश रूप से विद्यमान हैं।
525नरवेशॐ नरवेशाय नमः।Om Naraveshaya Namah।जो मानव के समान दिव्य रूप धारण करते हैं।
526अवतारॐ अवताराय नमः।Om Avataraya Namah।जो धर्म की स्थापना के लिए दिव्य अवतार लेते हैं।
527भूपरिस्थितॐ भूपरिस्थिताय नमः।Om Bhuparisthitaya Namah।जो सम्पूर्ण पृथ्वी पर स्थित एवं व्याप्त हैं।
528महर्जनस्तपस्सत्यम्ॐ महर्जनस्तपस्सत्यम् नमः।Om Maharjanastapassatyam Namah।जो महर्लोक, जनलोक, तपलोक एवं सत्यलोक के आधार हैं।
529भूर्भुवःस्वरितिधायॐ भूर्भुवःस्वरितिधाय नमः।Om Bhurbhuvahsvaritidhaya Namah।जो पृथ्वी, आकाश एवं स्वर्ग लोकों को धारण करते हैं।
530नैमित्तिकॐ नैमित्तिकाय नमः।Om Naimittikaya Namah।जो नैमित्तिक प्रलय से सम्बद्ध दिव्य शक्ति हैं।
531प्राकृतिकॐ प्राकृतिकाय नमः।Om Prakritikaya Namah।जो प्राकृतिक सृष्टि एवं भौतिक प्रकृति से सम्बद्ध हैं।
532आत्यन्तिकमायाॐ आत्यन्तिकमायाय नमः।Om Atyantikamayaya Namah।जो माया के अंतिम एवं पूर्ण विलय के स्वरूप हैं।
533लयॐ लयाय नमः।Om Layaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि को अपने में विलीन करने वाले हैं।
534सर्गॐ सर्गाय नमः।Om Sargaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति के कारण हैं।
535विसर्गॐ विसर्गाय नमः।Om Visargaya Namah।जो सृष्टि के विस्तार एवं द्वितीयक सृजन के स्वरूप हैं।
536सर्गादिॐ सर्गादये नमः।Om Sargadaye Namah।जो सृष्टि के प्रारम्भ के मूल कारण हैं।
537निरोधॐ निरोधाय नमः।Om Nirodhaya Namah।जो समस्त शक्तियों एवं तत्त्वों को नियंत्रित करते हैं।
538रोधॐ रोधाय नमः।Om Rodhaya Namah।जो बाधाओं एवं सीमाओं को नियंत्रित करने वाले हैं।
539ऊतिमान्ॐ ऊतिमते नमः।Om Utimate Namah।जो सभी प्राणियों की रक्षा करने वाली शक्ति से सम्पन्न हैं।
540मन्वन्तरावतारॐ मन्वन्तरावताराय नमः।Om Manvantaravataraya Namah।जो विभिन्न मन्वन्तरों में दिव्य अवतार धारण करते हैं।
541मनुॐ मनवे नमः।Om Manave Namah।जो आदिपुरुष एवं धर्म के विधानकर्ता मनु के स्वरूप हैं।
542मनुसुतॐ मनुसुताय नमः।Om Manusუტaya Namah।जो मनु के पुत्र स्वरूप हैं।
543अनघॐ अनघाय नमः।Om Anaghaya Namah।जो पूर्णतः निष्पाप एवं दोषरहित हैं।
544स्वयम्भूॐ स्वयम्भुवे नमः।Om Svayambhuve Namah।जो स्वयं प्रकट हुए हैं और किसी अन्य कारण पर निर्भर नहीं हैं।
545शाम्भवॐ शाम्भवाय नमः।Om Shambhavaya Namah।जो भगवान शम्भु से सम्बद्ध एवं मंगलमय हैं।
546शङ्कुॐ शङ्कवे नमः।Om Shankave Namah।जो शान्ति एवं कल्याण प्रदान करने वाले हैं।
547स्वायम्भुवसहायकृत्ॐ स्वायम्भुवसहायकृते नमः।Om Svayambhuvasahayakrite Namah।जो स्वायम्भुव मनु के सहायक एवं सहयोगी हैं।
548सुरालयॐ सुरालयाय नमः।Om Suralayaya Namah।जो देवताओं के दिव्य निवास के स्वरूप हैं।
549देवगिरिॐ देवगिरये नमः।Om Devagiraye Namah।जो देवताओं के पवित्र पर्वत के स्वरूप हैं।
550मेरुॐ मेरवे नमः।Om Merave Namah।जो संसार के अक्ष माने जाने वाले मेरु पर्वत के स्वरूप हैं।
551हेमार्चितॐ हेमार्चिताय नमः।Om Hemarchitaya Namah।जिनकी स्वर्ण द्वारा पूजा की जाती है।
552गिरिॐ गिरये नमः।Om Giraye Namah।जो पर्वत के समान दृढ़ एवं स्थिर हैं।
553गिरीशॐ गिरीशाय नमः।Om Girishaya Namah।जो पर्वतों के स्वामी एवं महान अधिपति हैं।
554गणनाथॐ गणनाथाय नमः।Om Gananathaya Namah।जो गणों के अधिपति एवं नायक हैं।
555गौरीशॐ गौरीशाय नमः।Om Gaurishaya Namah।जो गौरी के स्वामी एवं कल्याणकारी स्वरूप हैं।
556गिरिगह्वरॐ गिरिगह्वराय नमः।Om Girigahvaraya Namah।जो पर्वतों की गुफाओं एवं गह्वरों में स्थित हैं।
557विन्ध्यॐ विन्ध्याय नमः।Om Vindhyaya Namah।जो विन्ध्य पर्वत के समान महान एवं स्थिर हैं।
558त्रिकूटॐ त्रिकूटाय नमः।Om Trikutaya Namah।जो त्रिकूट पर्वत के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
559मैनाकॐ मैनाकाय नमः।Om Mainakaya Namah।जो मैनाक पर्वत के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
560सुवेलॐ सुवेलाय नमः।Om Suvelaya Namah।जो लंका के समीप स्थित पवित्र सुवेल पर्वत के स्वरूप हैं।
561पारिभद्रकॐ पारिभद्रकाय नमः।Om Paribhadrakaya Namah।जो दिव्य पारिभद्रक पर्वत एवं वृक्ष के स्वरूप हैं।
562पतङ्गॐ पतङ्गाय नमः।Om Patangaya Namah।जो आकाश में पक्षी के समान तीव्र गति से विचरण करते हैं।
563शिशिरॐ शिशिराय नमः।Om Shishiraya Namah।जो शीत ऋतु के समान शीतल एवं शांत हैं।
564कङ्ग्कॐ कङ्ग्काय नमः।Om Kangkaya Namah।जो बगुले के समान दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
565जारुधॐ जारुधये नमः।Om Jarudhaye Namah।जो सभी प्राणियों में गति एवं चेतना उत्पन्न करते हैं।
566शैलसत्तमॐ शैलसत्तमाय नमः।Om Shailasattamaya Namah।जो पर्वतों में सर्वश्रेष्ठ एवं महान हैं।
567कालञ्जरॐ कालञ्जराय नमः।Om Kalanjaraya Namah।जो पवित्र कालञ्जर पर्वत के दिव्य स्वरूप हैं।
568बृहत्सानुॐ बृहत्सानवे नमः।Om Brihatsanave Namah।जिनकी पर्वतीय चोटियाँ एवं विस्तार अत्यन्त विशाल हैं।
569दरीभृत्ॐ दरीभृते नमः।Om Daribhrite Namah।जो पर्वतों की गुप्त गुफाओं को धारण करने वाले हैं।
570नन्दिकेश्वरॐ नन्दिकेश्वराय नमः।Om Nandikeshvaraya Namah।जो नन्दिकेश्वर के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
571सनातनॐ सनातनाय नमः।Om Sanatanaya Namah।जो नित्य, प्राचीन एवं शाश्वत हैं।
572तरुराजॐ तरुराजाय नमः।Om Tarurajaya Namah।जो वृक्षों में श्रेष्ठ एवं वन के अधिपति हैं।
573मन्दारॐ मन्दाराय नमः।Om Mandaraya Namah।जो समुद्र मंथन से सम्बद्ध मन्दर पर्वत के स्वरूप हैं।
574पारिजातकॐ पारिजातकाय नमः।Om Parijatakaya Namah।जो स्वर्ग के इच्छा-पूर्ति करने वाले पारिजात वृक्ष के स्वरूप हैं।
575जयन्तकृत्ॐ जयन्तकृते नमः।Om Jayantakrite Namah।जो विजय प्रदान करने वाले हैं।
576जयन्ताङ्गॐ जयन्ताङ्गाय नमः।Om Jayantangaya Namah।जिनके प्रत्येक अंग में विजय का तेज विद्यमान है।
577जयन्तीॐ जयन्त्यै नमः।Om Jayantyai Namah।जो विजय एवं जय की दिव्य शक्ति के स्वरूप हैं।
578दिग्जयाकुलॐ दिग्जयाकुलाय नमः।Om Digjayakulaya Namah।जो सभी दिशाओं में विजय प्राप्त करने वालों से घिरे हैं।
579वृत्रघ्नॐ वृत्रघ्ने नमः।Om Vritraghne Namah।जो वृत्रासुर जैसे दुष्ट शक्तियों के संहारक हैं।
580देवलोकॐ देवलोकाय नमः।Om Devalokaya Namah।जो देवताओं के दिव्य लोक के स्वरूप हैं।
581शशिन्ॐ शशिने नमः।Om Shashine Namah।जो चन्द्रमा के समान शीतल एवं प्रकाशमय हैं।
582कुमुदबान्धवॐ कुमुदबान्धवाय नमः।Om Kumudabandhavaya Namah।जो रात्रि में खिलने वाले कुमुद कमल के प्रिय हैं।
583नक्षत्रेशॐ नक्षत्रेशाय नमः।Om Nakshatreshaya Namah।जो समस्त नक्षत्रों के अधिपति हैं।
584सुधासिन्धुॐ सुधासिन्धवे नमः।Om Sudhasindhave Namah।जो अमृत के महासागर के समान हैं।
585मृगॐ मृगाय नमः।Om Mrigaya Namah।जो मृग नक्षत्र के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
586पुष्यॐ पुष्याय नमः।Om Pushyaya Namah।जो पुष्य नक्षत्र के पोषण एवं शुभता के स्वरूप हैं।
587पुनर्वसुॐ पुनर्वसवे नमः।Om Punarvasave Namah।जो पुनर्वसु नक्षत्र के पुनरुत्थान एवं नवजीवन के स्वरूप हैं।
588हस्तॐ हस्ताय नमः।Om Hastaya Namah।जो हस्त नक्षत्र के दिव्य स्वरूप हैं।
589अभिजित्ॐ अभिजिते नमः।Om Abhijite Namah।जो सदैव विजय प्रदान करने वाले अभिजित् नक्षत्र के स्वरूप हैं।
590श्रवणॐ श्रवणाय नमः।Om Shravanaya Namah।जो श्रवण नक्षत्र एवं दिव्य श्रवण शक्ति के स्वरूप हैं।
591वैधृतिॐ वैधृतये नमः।Om Vaidhritaye Namah।जो वैधृति नामक दिव्य योग के स्वरूप हैं।
592भास्करोदयॐ भास्करोदयाय नमः।Om Bhaskarodayaya Namah।जो सूर्य के उदय एवं प्रकाश के कारण हैं।
593ऐन्द्रॐ ऐन्द्राय नमः।Om Aindraya Namah।जो इन्द्र एवं दिव्य शक्तियों से सम्बद्ध हैं।
594साध्यॐ साध्याय नमः।Om Sadhyaya Namah।जो साध्य देवताओं के दिव्य स्वरूप हैं।
595शुभॐ शुभाय नमः।Om Shubhaya Namah।जो सदैव मंगल एवं शुभता प्रदान करते हैं।
596शुक्लॐ शुक्लाय नमः।Om Shuklaya Namah।जो उज्ज्वल, शुद्ध एवं चन्द्रमा के समान प्रकाशमय हैं।
597व्यतीपातॐ व्यतीपाताय नमः।Om Vyatipataya Namah।जो व्यतीपात नामक दिव्य योग के स्वरूप हैं।
598ध्रुवॐ ध्रुवाय नमः।Om Dhruvaya Namah।जो ध्रुव तारे के समान स्थिर एवं अचल हैं।
599सितॐ सिताय नमः।Om Sitaya Namah।जो उज्ज्वल एवं श्वेत प्रकाश के स्वरूप हैं।
600शिशुमारॐ शिशुमाराय नमः।Om Shishumaraya Namah।जो शिशुमार नामक दिव्य नक्षत्रीय स्वरूप में स्थित हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
601देवमयॐ देवमयाय नमः।Om Devamayaya Namah।जिनका स्वरूप दिव्य एवं माया के अधिपति के समान है।
602ब्रह्मलोकॐ ब्रह्मलोकाय नमः।Om Brahmalokaya Namah।जो ब्रह्मलोक के स्वामी एवं अधिपति हैं।
603विलक्षणॐ विलक्षणाय नमः।Om Vilakshanaya Namah।जो सभी से अद्वितीय एवं विशिष्ट हैं।
604रामॐ रामाय नमः।Om Ramaya Namah।जो सभी को आनन्द प्रदान करने वाले हैं।
605वैकुण्ठनाथॐ वैकुण्ठनाथाय नमः।Om Vaikunthanathaya Namah।जो वैकुण्ठ धाम के परम स्वामी हैं।
606व्यापीॐ व्यापिने नमः।Om Vyapine Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि में सर्वत्र व्याप्त हैं।
607वैकुण्ठनायकॐ वैकुण्ठनायकाय नमः।Om Vaikunthanayakaya Namah।जो वैकुण्ठ के प्रमुख एवं नायक हैं।
608श्वेतद्वीपॐ श्वेतद्वीपाय नमः।Om Shvetadvipaya Namah।जो पवित्र श्वेतद्वीप में निवास करने वाले हैं।
609जितपादॐ जितपादाय नमः।Om Jitapadaya Namah।जिनके चरणों ने समस्त लोकों पर विजय प्राप्त की है।
610लोकालोकाचलाश्रितॐ लोकालोकाचलाश्रिताय नमः।Om Lokalokachalashritaya Namah।जो लोकालोक पर्वत की सीमा पर स्थित हैं।
611भूमिॐ भूम्यै नमः।Om Bhumyai Namah।जो पृथ्वी को धारण एवं पोषण करने वाले हैं।
612वैकुण्ठदेवॐ वैकुण्ठदेवाय नमः।Om Vaikunthadevaya Namah।जो वैकुण्ठ के दिव्य स्वामी हैं।
613कोटिब्रह्माण्डकारकॐ कोटिब्रह्माण्डकारकाय नमः।Om Kotibrahmandakarakaya Namah।जो असंख्य ब्रह्माण्डों की रचना करने वाले हैं।
614असङ्ख्यब्रह्माण्डपतिॐ असङ्ख्यब्रह्माण्डपतये नमः।Om Asankhyabrahmandapataye Namah।जो अनगिनत ब्रह्माण्डों के परम स्वामी हैं।
615गोलोकेशॐ गोलोकेशाय नमः।Om Golokeshaya Namah।जो गोलोक धाम के स्वामी हैं।
616गवाम्पतिॐ गवाम्पतये नमः।Om Gavampataye Namah।जो गौओं के स्वामी एवं रक्षक हैं।
617गोलोकधामधिषणॐ गोलोकधामधिषणाय नमः।Om Golokadhamadhishanaya Namah।जो गोलोक धाम को धारण एवं पोषित करने वाले हैं।
618गोपिकाकण्ठभूषणॐ गोपिकाकण्ठभूषणाय नमः।Om Gopikakanthabhushanaya Namah।जो गोपिकाओं के कण्ठ के आभूषण के समान प्रिय हैं।
619श्रीधारॐ श्रीधाराय नमः।Om Shridharaya Namah।जो श्री अर्थात् लक्ष्मी को धारण करने वाले हैं।
620श्रीधरॐ श्रीधराय नमः।Om Shridharaya Namah।जो लक्ष्मी एवं समृद्धि के धारक हैं।
621लीलाधरॐ लीलाधराय नमः।Om Liladharaya Namah।जो अपनी दिव्य लीलाओं द्वारा सम्पूर्ण जगत का पालन करते हैं।
622गिरिधरॐ गिरिधराय नमः।Om Giridharaya Namah।जो पर्वत को धारण करने वाले हैं।
623धुरीॐ धुरीणे नमः।Om Dhurine Namah।जो संसार के भार एवं उत्तरदायित्व को धारण करते हैं।
624कुन्तधारीॐ कुन्तधारिणे नमः।Om Kuntadharinee Namah।जो शक्ति एवं भाले जैसे अस्त्र धारण करते हैं।
625त्रिशूलीॐ त्रिशूलिने नमः।Om Trishuline Namah।जो त्रिशूल धारण करने वाले हैं।
626बीभत्सीॐ बीभत्सिने नमः।Om Bibhatsine Namah।जो युद्ध में अत्यन्त उग्र एवं भयंकर स्वरूप धारण करते हैं।
627घर्घरस्वनॐ घर्घरस्वनाय नमः।Om Ghargharasvanaya Namah।जिनकी वाणी गम्भीर गर्जना के समान है।
628शूलसूच्यर्पितगजॐ शूलसूच्यर्पितगजाय नमः।Om Shulasuchyarpitagajaya Namah।जो त्रिशूल की नोक से गजरूप दैत्य का संहार करने वाले हैं।
629गजचर्मधरॐ गजचर्मधराय नमः।Om Gajacharmadharaya Namah।जो गजचर्म धारण करने वाले हैं।
630गजीॐ गजीने नमः।Om Gajine Namah।जो गज के समान शक्तिशाली एवं पराक्रमी हैं।
631अन्त्रमालिन्ॐ अन्त्रमालिने नमः।Om Antramaline Namah।जो दिव्य उग्र स्वरूप में अन्त्रों की माला धारण करते हैं।
632मुण्डमालिन्ॐ मुण्डमालिने नमः।Om Mundamaline Namah।जो मुण्डों की माला धारण करने वाले हैं।
633व्यालिन्ॐ व्यालिने नमः।Om Vyaline Namah।जो सर्प को आभूषण या अस्त्र के रूप में धारण करते हैं।
634दण्डकमण्डलुॐ दण्डकमण्डलवे नमः।Om Dandakamandalave Namah।जो दण्ड एवं कमण्डलु धारण करने वाले हैं।
635वेतालभृत्ॐ वेतालभृते नमः।Om Vetalabhrite Namah।जो वेताल को अपने दिव्य सहचर के रूप में धारण करते हैं।
636भूतसङ्घॐ भूतसङ्घाय नमः।Om Bhutasanghaya Namah।जो भूतों एवं दिव्य गणों से घिरे रहते हैं।
637कूष्माण्डगणसंवृतॐ कूष्माण्डगणसंवृताय नमः।Om Kushmandaganasamvritaya Namah।जो कूष्माण्ड गणों से घिरे हुए हैं।
638प्रमथेशॐ प्रमथेशाय नमः।Om Pramatheshaya Namah।जो प्रमथ गणों के प्रमुख एवं स्वामी हैं।
639पशुपतिॐ पशुपतये नमः।Om Pashupataye Namah।जो समस्त जीवों के स्वामी एवं रक्षक हैं।
640मृडानीशॐ मृडानीशाय नमः।Om Mridanishaya Namah।जो देवी मृडानी के स्वामी हैं।
641मृडॐ मृडाय नमः।Om Mridaya Namah।जो अत्यन्त कृपालु एवं सौम्य स्वरूप वाले हैं।
642वृषॐ वृषाय नमः।Om Vrishaya Namah।जो वृषभ के समान शक्तिशाली एवं धर्म के आधार हैं।
643कृतान्तकालसंहारिॐ कृतान्तकालसङ्घारये नमः।Om Kritantakalasangharaye Namah।जो काल एवं मृत्यु का भी संहार करने वाले हैं।
644कूटॐ कूटाय नमः।Om Kutaya Namah।जो पर्वत की चोटी के समान श्रेष्ठ एवं ऊँचे हैं।
645कल्पान्तभैरवॐ कल्पान्तभैरवाय नमः।Om Kalpantabhairavaya Namah।जो कल्प के अन्त में भैरव के समान उग्र स्वरूप धारण करते हैं।
646षडाननॐ षडाननाय नमः।Om Shadananaya Namah।जो छह मुखों वाले दिव्य स्वरूप हैं।
647वीरभद्रॐ वीरभद्राय नमः।Om Virabhadraya Namah।जो वीर एवं मंगलकारी योद्धा के स्वरूप हैं।
648दक्षयज्ञविघातकॐ दक्षयज्ञविघातकाय नमः।Om Dakshayajnavighatakaya Namah।जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का विनाश किया।
649खर्पराशीॐ खर्पराशीने नमः।Om Kharparashine Namah।जो खोपड़ियों के पात्र धारण करने वाले उग्र स्वरूप हैं।
650विशाषिन्ॐ विशाषिने नमः।Om Vishashine Namah।जो विशिष्ट एवं अद्वितीय महिमा से सम्पन्न हैं।
651शक्तिहस्तॐ शक्तिहस्ताय नमः।Om Shaktihastaya Namah।जिनके हाथ में दिव्य शक्ति विद्यमान है।
652शिवार्थदॐ शिवार्थदाय नमः।Om Shivarthadaya Namah।जो भक्तों को मंगल एवं कल्याण प्रदान करते हैं।
653पिनाकटङ्कारकरॐ पिनाकटङ्कारकराय नमः।Om Pinakatankarakaraya Namah।जिनकी शक्ति पिनाक के प्रचण्ड नाद के समान प्रभावशाली है।
654चलज्ज्हङ्कारनूपुरॐ चलज्झङ्कारनूपुराय नमः।Om Chalajjhankaranupuraya Namah।जिनके नूपुर चलने पर मधुर झंकार उत्पन्न करते हैं।
655पण्डितॐ पण्डिताय नमः।Om Panditaya Namah।जो समस्त ज्ञान एवं विद्याओं के महान ज्ञाता हैं।
656तर्कविदुष्ॐ तर्कविदुषे नमः।Om Tarkavidushe Namah।जो तर्क एवं न्यायशास्त्र के महान ज्ञाता हैं।
657वेदपाठीॐ वेदपाठिने नमः।Om Vedapathine Namah।जो वेदों का पाठ एवं ज्ञान प्रदान करने वाले हैं।
658श्रुतीश्वरॐ श्रुतीश्वराय नमः।Om Shrutishvaraya Namah।जो पवित्र वेद एवं श्रुतियों के स्वामी हैं।
659वेदान्तकृत्ॐ वेदान्तकृते नमः।Om Vedantakrite Namah।जो वेदान्त के ज्ञान एवं सिद्धान्तों के प्रतिपादक हैं।
660साङ्ख्यशास्त्रीॐ सङ्ख्याशास्त्रिणे नमः।Om Sankhyashastrine Namah।जो सांख्य दर्शन के महान ज्ञाता हैं।
661मीमांसिन्ॐ मीमांसिने नमः।Om Mimamsine Namah।जो मीमांसा दर्शन के ज्ञाता एवं व्याख्याता हैं।
662कणनामभाज्ॐ कणनामभाजे नमः।Om Kananamabhaje Namah।जो परमाणु एवं तत्त्वों के सूक्ष्म ज्ञान से सम्बद्ध हैं।
663काणादॐ काणादये नमः।Om Kanadaye Namah।जो महर्षि कणाद के ज्ञानस्वरूप से सम्बद्ध हैं।
664गौतमॐ गौतमाय नमः।Om Gautamaya Namah।जो महर्षि गौतम के दिव्य ज्ञानस्वरूप हैं।
665वादीॐ वादिने नमः।Om Vadine Namah।जो दार्शनिक वाद-विवाद में निपुण हैं।
666वादॐ वादाय नमः।Om Vadaya Namah।जो तर्क एवं शास्त्रार्थ के परम ज्ञाता हैं।
667नैयायिकॐ नैयायिकाय नमः।Om Naiyayikaya Namah।जो न्याय दर्शन के ज्ञाता एवं आचार्य हैं।
668नयॐ नयाय नमः।Om Nayaya Namah।जो उचित मार्ग एवं न्यायपूर्ण विचार के समर्थक हैं।
669वैशेषिकॐ वैशेषिकाय नमः।Om Vaisheshikaya Namah।जो वैशेषिक दर्शन के महान ज्ञाता हैं।
670धर्मशास्त्रीॐ धर्मशास्त्रिणे नमः।Om Dharmashastrine Namah।जो धर्मशास्त्रों के विद्वान एवं व्याख्याता हैं।
671सर्वशास्त्रार्थतत्त्वगॐ सर्वशास्त्रार्थतत्त्वगाय नमः।Om Sarvashastrarthatattvagaya Namah।जो सभी शास्त्रों के वास्तविक तत्त्व एवं अर्थ को जानते हैं।
672वैयाकरणकृत्ॐ वैयाकरणकृते नमः।Om Vaiyakaranakrite Namah।जो संस्कृत व्याकरण के ज्ञाता एवं आचार्य हैं।
673छन्दस्ॐ छन्दसे नमः।Om Chhandase Namah।जो वैदिक छन्द एवं काव्यशास्त्र के अधिपति हैं।
674वैयासॐ वैयासाय नमः।Om Vaiyasaya Namah।जो महर्षि व्यास की ज्ञानपरम्परा के स्वरूप हैं।
675प्राकृतॐ प्राकृतये नमः।Om Prakritaye Namah।जो सहज एवं सामान्य भाषा के ज्ञाता हैं।
676वचस्ॐ वचसे नमः।Om Vachase Namah।जिनकी वाणी मधुर, प्रभावशाली एवं सत्य है।
677पाराशरिसंहिताविद्ॐ पाराशरिसंहिताविदे नमः।Om Parasharisamhitavide Namah।जो महर्षि पराशर द्वारा रचित संहिताओं के ज्ञाता हैं।
678काव्यकृत्ॐ काव्यकृते नमः।Om Kavyakrite Namah।जो काव्य एवं उत्कृष्ट साहित्य की रचना करने वाले हैं।
679नाटकप्रदॐ नाटकप्रदाय नमः।Om Natakapradaya Namah।जो नाट्य एवं अभिनय कला का ज्ञान प्रदान करते हैं।
680पौराणिकॐ पौराणिकाय नमः।Om Pauranikaya Namah।जो प्राचीन पुराणों के महान ज्ञाता एवं व्याख्याता हैं।
681स्मृतिकरॐ स्मृतिकराय नमः।Om Smritikaraya Namah।जो धर्म एवं आचार से सम्बन्धित स्मृतियों के रचयिता हैं।
682वैद्यॐ वैद्याय नमः।Om Vaidyaya Namah।जो चिकित्सा एवं आरोग्य के महान ज्ञाता हैं।
683विद्याविशारदॐ विद्याविशारदाय नमः।Om Vidyavisharadaya Namah।जो समस्त विद्याओं में अत्यन्त निपुण हैं।
684अलङ्कारॐ अलङ्काराय नमः।Om Alankaraya Namah।जो काव्य के अलंकार एवं सौन्दर्य के ज्ञाता हैं।
685लक्षणार्थॐ लक्षणार्थाय नमः।Om Lakshanarthaya Namah।जो शब्दों के वास्तविक एवं परिभाषित अर्थ को जानते हैं।
686व्यङ्ग्यविद्ॐ व्यङ्ग्यविदे नमः।Om Vyangyavide Namah।जो शब्दों के गूढ़ एवं संकेतित अर्थ को जानते हैं।
687घनवद्ध्वनिॐ घनवद्ध्वनये नमः।Om Ghanavaddhvanaye Namah।जिनकी वाणी मेघ की गर्जना के समान गम्भीर है।
688वाक्यस्फोटॐ वाक्यस्फोटाय नमः।Om Vakyasphotaya Namah।जो सम्पूर्ण वाक्य के माध्यम से वास्तविक अर्थ को प्रकट करते हैं।
689पदस्फोटॐ पदस्फोटाय नमः।Om Padasphotaya Namah।जो एक-एक शब्द के वास्तविक अर्थ को प्रकट करते हैं।
690स्फोटवृत्तिॐ स्फोटवृत्तये नमः।Om Sphotavrittaye Namah।जो शब्द के प्रकट अर्थ के सिद्धान्त के आधार हैं।
691सार्थविद्ॐ सार्थविदे नमः।Om Sarthavide Namah।जो वाणी एवं शब्दों के वास्तविक अर्थ को जानते हैं।
692शृङ्गारॐ शृङ्गाराय नमः।Om Shringaraya Namah।जो प्रेम एवं सौन्दर्य के दिव्य रस के स्वरूप हैं।
693उज्ज्वलॐ उज्ज्वलाय नमः।Om Ujjvalaya Namah।जो अत्यन्त तेजस्वी एवं प्रकाशमय हैं।
694स्वच्छॐ स्वच्छाय नमः।Om Svachchhaya Namah।जो पूर्णतः निर्मल एवं निष्कलंक हैं।
695अद्भुतॐ अद्भुताय नमः।Om Adbhutaya Namah।जो आश्चर्य एवं दिव्य चमत्कार के स्वरूप हैं।
696हास्यॐ हास्याय नमः।Om Hasyaya Namah।जो हास्य, प्रसन्नता एवं आनन्द के स्वरूप हैं।
697भयानकॐ भयानकाय नमः।Om Bhayanakaya Namah।जो दुष्टों के लिए भयंकर एवं भय उत्पन्न करने वाले हैं।
698अश्वत्थॐ अश्वत्थाय नमः।Om Ashvatthaya Namah।जो पवित्र अश्वत्थ वृक्ष के स्वरूप हैं।
699यवभोजिन्ॐ यवभोजिने नमः।Om Yavabhojine Namah।जो यव अर्थात् जौ को पवित्र भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं।
700यवक्रीतॐ यवक्रीताय नमः।Om Yavakritaya Namah।जो अपने पराक्रम से यव अर्थात् जौ प्राप्त करने वाले हैं।
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No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
701यवक्रीतॐ यवक्रीताय नमः।Om Yavakritaya Namah।जो यवक्रीत नामक ऋषि के दिव्य स्वरूप से सम्बद्ध हैं।
702वर्षाकालॐ वर्षाकालाय नमः।Om Varshakalaya Namah।जो वर्षा ऋतु के स्वरूप एवं उसके नियन्ता हैं।
703मेघवाहनॐ मेघवाहनाय नमः।Om Meghavahanaya Namah।जो मेघों के समान विशाल एवं गतिशील हैं।
704नवाम्बुदॐ नवाम्बुदाय नमः।Om Navambudaya Namah।जो नये वर्षा-मेघ के समान श्याम एवं मनोहर हैं।
705सर्वकालकृतॐ सर्वकालकृते नमः।Om Sarvakalakrite Namah।जो सभी कालों एवं ऋतुओं के नियन्ता हैं।
706कालचक्रप्रवर्तकॐ कालचक्रप्रवर्तकाय नमः।Om Kalachakrapravartakaya Namah।जो कालचक्र को संचालित करने वाले हैं।
707पक्षॐ पक्षाय नमः।Om Pakshaya Namah।जो समय के पक्षों एवं काल-विभागों के आधार हैं।
708मासॐ मासाय नमः।Om Masaya Namah।जो महीनों के स्वरूप एवं अधिपति हैं।
709ऋतुॐ ऋतवे नमः।Om Ritave Namah।जो सभी ऋतुओं के स्वरूप हैं।
710संवत्सरॐ संवत्सराय नमः।Om Samvatsaraya Namah।जो वर्ष एवं समय-चक्र के स्वरूप हैं।
711अयनॐ अयनाय नमः।Om Ayanaya Namah।जो सूर्य के उत्तरायण एवं दक्षिणायन के आधार हैं।
712कालरूपॐ कालरूपाय नमः।Om Kalarupaya Namah।जो स्वयं काल के दिव्य स्वरूप हैं।
713कालातीतॐ कालातीताय नमः।Om Kalatitaya Namah।जो समय की सीमा से परे हैं।
714कालेशॐ कालेशाय नमः।Om Kaleshaya Namah।जो काल के परम स्वामी हैं।
715कालज्ञॐ कालज्ञाय नमः।Om Kalajnaya Namah।जो भूत, वर्तमान एवं भविष्य के सभी कालों को जानते हैं।
716कालचक्रधरॐ कालचक्रधराय नमः।Om Kalachakradharaya Namah।जो कालचक्र को धारण एवं संचालित करते हैं।
717कालभेदिन्ॐ कालभेदिने नमः।Om Kalabhedine Namah।जो काल के विभिन्न विभागों को जानने वाले हैं।
718कालदण्डधरॐ कालदण्डधराय नमः।Om Kaladandadharaya Namah।जो काल के दण्ड एवं न्याय के स्वामी हैं।
719कालस्वरूपॐ कालस्वरूपाय नमः।Om Kalasvarupaya Namah।जो काल का साक्षात् स्वरूप हैं।
720महाकालॐ महाकालाय नमः।Om Mahakalaya Namah।जो काल से भी परे महान काल के स्वरूप हैं।
721दिनकरॐ दिनकराय नमः।Om Dinakaraya Namah।जो दिन का प्रकाश उत्पन्न करने वाले सूर्यस्वरूप हैं।
722रविलोचनॐ रविलोचनाय नमः।Om Ravilochanaya Namah।जिनके नेत्र सूर्य के समान प्रकाशमय हैं।
723भास्करॐ भास्कराय नमः।Om Bhaskaraya Namah।जो प्रकाश एवं तेज प्रदान करने वाले हैं।
724सूर्यॐ सूर्याय नमः।Om Suryaya Namah।जो सूर्य के समान समस्त जगत को प्रकाशित करते हैं।
725सूर्यात्माॐ सूर्यात्मने नमः।Om Suryatmane Namah।जो सूर्य में स्थित परम आत्मस्वरूप हैं।
726सविताॐ सवित्रे नमः।Om Savitre Namah।जो सृष्टि को प्रेरणा एवं जीवन प्रदान करते हैं।
727विवस्वान्ॐ विवस्वते नमः।Om Vivasvate Namah।जो अत्यन्त तेजस्वी एवं प्रकाशमान हैं।
728आदित्यॐ आदित्याय नमः।Om Adityaya Namah।जो आदित्य के दिव्य स्वरूप हैं।
729मार्तण्डॐ मार्तण्डाय नमः।Om Martandaya Namah।जो सूर्य के दिव्य एवं प्राचीन स्वरूप हैं।
730मिहिरॐ मिहिराय नमः।Om Mihiraya Namah।जो सूर्य के समान प्रकाश फैलाने वाले हैं।
731अंशुमान्ॐ अंशुमते नमः।Om Anshumate Namah।जो दिव्य किरणों से युक्त हैं।
732प्रभाकरॐ प्रभाकराय नमः।Om Prabhakaraya Namah।जो महान प्रकाश उत्पन्न करने वाले हैं।
733दिनमणिॐ दिनमणये नमः।Om Dinamanaye Namah।जो दिन के रत्न अर्थात् सूर्य के समान प्रकाशमान हैं।
734लोकचक्षुॐ लोकचक्षुषे नमः।Om Lokachakshushe Namah।जो सम्पूर्ण जगत के नेत्र के समान हैं।
735तमोनाशकॐ तमोनाशकाय नमः।Om Tamonashakaya Namah।जो अज्ञान एवं अन्धकार का नाश करते हैं।
736तेजोराशिॐ तेजोराशये नमः।Om Tejorashaye Namah।जो अनन्त दिव्य तेज के भण्डार हैं।
737ज्योतिरूपॐ ज्योतिरूपाय नमः।Om Jyotirupaya Namah।जो स्वयं दिव्य प्रकाश के स्वरूप हैं।
738प्रकाशात्माॐ प्रकाशात्मने नमः।Om Prakashatmane Namah।जो चेतना एवं प्रकाश के परम आत्मस्वरूप हैं।
739दीप्तिमान्ॐ दीप्तिमते नमः।Om Diptimate Namah।जो अत्यन्त तेजस्वी हैं।
740सहस्रांशुॐ सहस्रांशवे नमः।Om Sahasramshave Namah।जो हजारों किरणों से प्रकाशित हैं।
741अग्निगर्भॐ अग्निगर्भाय नमः।Om Agnigarbhaaya Namah।जिनमें अग्नि के समान दिव्य शक्ति विद्यमान है।
742अग्निरूपॐ अग्निरूपाय नमः।Om Agnirupaya Namah।जो अग्नि के समान तेजस्वी एवं शुद्धिकारक हैं।
743हुताशनॐ हुताशनाय नमः।Om Hutashanaya Namah।जो यज्ञ की अग्नि के स्वरूप हैं।
744वैश्वानरॐ वैश्वानराय नमः।Om Vaishvanaraya Namah।जो सभी प्राणियों में स्थित पाचन अग्नि के स्वरूप हैं।
745ज्वलनॐ ज्वलनाय नमः।Om Jvalanaya Namah।जो अग्नि के समान निरन्तर प्रज्वलित हैं।
746पावकॐ पावकाय नमः।Om Pavakaya Namah।जो पवित्र एवं शुद्ध करने वाले हैं।
747अनलॐ अनलाय नमः।Om Analaya Namah।जो अग्नि के समान असीम शक्ति वाले हैं।
748वह्निॐ वह्नये नमः।Om Vahnaye Namah।जो यज्ञ एवं अग्नि के दिव्य स्वरूप हैं।
749दहनॐ दहनाय नमः।Om Dahanaya Namah।जो पाप एवं अशुद्धियों को जला देते हैं।
750शुचिॐ शुचये नमः।Om Shuchaye Namah।जो पूर्णतः पवित्र एवं निर्मल हैं।
751पवित्रॐ पवित्राय नमः।Om Pavit्राय Namah।जो स्वयं पवित्र हैं और दूसरों को भी पवित्र करते हैं।
752शुद्धात्माॐ शुद्धात्मने नमः।Om Shuddhatmane Namah।जिनका आत्मस्वरूप पूर्णतः निर्मल एवं शुद्ध है।
753शुद्धभावॐ शुद्धभावाय नमः।Om Shuddhabhavaya Namah।जिनका भाव पूर्णतः पवित्र एवं निर्मल है।
754शुद्धविग्रहॐ शुद्धविग्रहाय नमः।Om Shuddhavigrahaya Namah।जिनका दिव्य शरीर पूर्णतः शुद्ध एवं अलौकिक है।
755शुद्धसत्त्वॐ शुद्धसत्त्वाय नमः।Om Shuddhasattvaya Namah।जो शुद्ध सत्त्व एवं दिव्य चेतना के स्वरूप हैं।
756शान्तात्माॐ शान्तात्मने नमः।Om Shantatmane Namah।जिनका आत्मस्वरूप पूर्ण शान्त एवं स्थिर है।
757शान्तिदॐ शान्तिदाय नमः।Om Shantidaya Namah।जो भक्तों को शान्ति प्रदान करते हैं।
758शान्तिकरॐ शान्तिकराय नमः।Om Shantikराय Namah।जो संसार में शान्ति एवं कल्याण स्थापित करते हैं।
759शान्तॐ शान्ताय नमः।Om Shantaya Namah।जो स्वयं परम शान्ति के स्वरूप हैं।
760शान्तमूर्तिॐ शान्तमूर्तये नमः।Om Shantamurtaye Namah।जिनका दिव्य रूप अत्यन्त शांत एवं सौम्य है।
761शमॐ शमाय नमः।Om Shamaya Namah।जो मन एवं इन्द्रियों को शान्त करने वाले हैं।
762दमॐ दमाय नमः।Om Damaya Namah।जो आत्मसंयम एवं इन्द्रियनिग्रह के स्वरूप हैं।
763तितिक्षुॐ तितिक्षवे नमः।Om Titikshave Namah।जो सभी परिस्थितियों को धैर्यपूर्वक सहन करने वाले हैं।
764क्षमाशीलॐ क्षमाशीलाय नमः।Om Kshamashilaya Namah।जो अत्यन्त क्षमाशील एवं दयालु हैं।
765दयालुॐ दयालवे नमः।Om Dayaluve Namah।जो सभी जीवों पर करुणा करने वाले हैं।
766करुणाकरॐ करुणाकराय नमः।Om Karunakaraya Namah।जो करुणा एवं दया के स्रोत हैं।
767कृपानिधिॐ कृपानिधये नमः।Om Kripanidhaye Namah।जो असीम कृपा के भण्डार हैं।
768दीनबन्धुॐ दीनबन्धवे नमः।Om Dinabandhave Namah।जो दीन एवं असहाय भक्तों के सच्चे सहायक हैं।
769अनाथनाथॐ अनाथनाथाय नमः।Om Anathanathaya Namah।जो अनाथों के परम आश्रय एवं स्वामी हैं।
770शरणागतवत्सलॐ शरणागतवत्सलाय नमः।Om Sharanagatavatsalaya Namah।जो शरण में आए भक्तों से अत्यन्त प्रेम करते हैं।
771भक्तप्रियॐ भक्तप्रियाय नमः।Om Bhaktapriyaya Namah।जो अपने भक्तों को अत्यन्त प्रिय मानते हैं।
772भक्तवत्सलॐ भक्तवत्सलाय नमः।Om Bhaktavatsalaya Namah।जो भक्तों पर सदा प्रेम एवं कृपा करते हैं।
773भक्तपालकॐ भक्तपालकाय नमः।Om Bhaktapalakaya Namah।जो अपने भक्तों की रक्षा एवं पालन करते हैं।
774भक्तार्तिहरॐ भक्तार्तिहराय नमः।Om Bhaktartiharaya Namah।जो भक्तों के दुःख एवं कष्ट दूर करते हैं।
775भक्ताभीष्टप्रदॐ भक्ताभीष्टप्रदाय नमः।Om Bhaktabhishtapradaya Namah।जो भक्तों की शुभ मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
776भक्तानुग्रहकृत्ॐ भक्तानुग्रहकृते नमः।Om Bhaktanugrahakrite Namah।जो भक्तों पर विशेष अनुग्रह करने वाले हैं।
777भक्तिसाध्यॐ भक्तिसाध्याय नमः।Om Bhaktisadhyaya Namah।जो सच्ची भक्ति के द्वारा प्राप्त किए जा सकते हैं।
778भक्तिगम्यॐ भक्तिगम्याय नमः।Om Bhaktigamyaya Namah।जिन्हें केवल प्रेमपूर्ण भक्ति से प्राप्त किया जा सकता है।
779भक्तैकलभ्यॐ भक्तैकलभ्याय नमः।Om Bhaktaikalabhyaya Namah।जो सच्चे भक्तों के लिए सहज ही प्राप्त होने वाले हैं।
780भक्तैकजीवनॐ भक्तैकजीवनाय नमः।Om Bhaktaikajivanaya Namah।जो भक्तों के जीवन का परम आधार हैं।
781भक्तैकशरणॐ भक्तैकशरणाय नमः।Om Bhaktaikasharanaya Namah।जो भक्तों के एकमात्र परम आश्रय हैं।
782भक्तैकबन्धुॐ भक्तैकबन्धवे नमः।Om Bhaktaikabandhave Namah।जो भक्तों के सच्चे एवं परम मित्र हैं।
783भक्तैकगतिॐ भक्तैकगतये नमः।Om Bhaktaikagataye Namah।जो भक्तों की अंतिम एवं परम गति हैं।
784भक्तैकमानसॐ भक्तैकमानसाय नमः।Om Bhaktaikamanasaya Namah।जिनका मन भक्तों के प्रेम में सदैव स्थित रहता है।
785भक्तैकतोषकॐ भक्तैकतोषकाय नमः।Om Bhaktaikatoshakaya Namah।जो भक्तों को प्रसन्न एवं संतुष्ट करने वाले हैं।
786भक्तैकप्रियदर्शनॐ भक्तैकप्रियदर्शनाय नमः।Om Bhaktaikapriyadarshanaya Namah।जिनका दर्शन भक्तों के लिए अत्यन्त प्रिय एवं मंगलकारी है।
787भक्तैकप्राणॐ भक्तैकप्राणाय नमः।Om Bhaktaikapranaya Namah।जो भक्तों के जीवन एवं प्राणों के समान प्रिय हैं।
788भक्तैकसुखदॐ भक्तैकसुखदाय नमः।Om Bhaktaikasukhadaya Namah।जो भक्तों को परम सुख प्रदान करते हैं।
789भक्तैकहितकारकॐ भक्तैकहितकारकाय नमः।Om Bhaktaikahitakarakaya Namah।जो सदैव भक्तों के परम हित का कार्य करते हैं।
790भक्तैकवरदॐ भक्तैकवरदाय नमः।Om Bhaktaikavaradaya Namah।जो भक्तों को मनोवांछित वरदान प्रदान करते हैं।
791भक्तैकाभयदायकॐ भक्तैकाभयदायकाय नमः।Om Bhaktaikabhayadayakaya Namah।जो भक्तों को निर्भयता एवं सुरक्षा प्रदान करते हैं।
792भक्तैकसिद्धिदॐ भक्तैकसिद्धिदाय नमः।Om Bhaktaikasiddhidaya Namah।जो भक्तों को आध्यात्मिक सिद्धियाँ प्रदान करते हैं।
793भक्तैकमुक्तिदॐ भक्तैकमुक्तिदाय नमः।Om Bhaktaikamuktidaya Namah।जो भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं।
794भक्तैकस्वर्गदायकॐ भक्तैकस्वर्गदायकाय नमः।Om Bhaktaikasvargadayakaya Namah।जो भक्तों को दिव्य लोक एवं सुख प्रदान करते हैं।
795भक्तैकसर्वस्वॐ भक्तैकसर्वस्वाय नमः।Om Bhaktaikasarvasvaya Namah।जो भक्तों के लिए ही सम्पूर्ण धन एवं जीवन का सार हैं।
796भक्तैकपरायणॐ भक्तैकपरायणाय नमः।Om Bhaktaikaparayanaya Namah।जो भक्तों के कल्याण के लिए सदैव समर्पित हैं।
797भक्तैकप्रेमवर्धनॐ भक्तैकप्रेमवर्धनाय नमः।Om Bhaktaikapremavardhanaya Namah।जो भक्तों के हृदय में प्रेम और भक्ति को बढ़ाते हैं।
798भक्तैकप्रेमदायकॐ भक्तैकप्रेमदायकाय नमः।Om Bhaktaikapremadayakaya Namah।जो भक्तों को दिव्य प्रेम प्रदान करते हैं।
799भक्तैकप्रेमवशॐ भक्तैकप्रेमवशाय नमः।Om Bhaktaikapremavashaya Namah।जो अपने भक्तों के प्रेम से सहज ही वश में हो जाते हैं।
800भक्तैकप्रेमरूपॐ भक्तैकप्रेमरूपाय नमः।Om Bhaktaikapremarupaya Namah।जो स्वयं भक्तिपूर्ण दिव्य प्रेम के स्वरूप हैं।
36be422d56f3ea111894ec1209c9ab64 edited
No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
801भक्तैकप्रेमभाजनॐ भक्तैकप्रेमभाजनाय नमः।Om Bhaktaikapremabhajanaya Namah।जो भक्तों के दिव्य प्रेम के परम पात्र हैं।
802भक्तैकप्रेमभोज्यॐ भक्तैकप्रेमभोज्याय नमः।Om Bhaktaikapremabhojyaya Namah।जो भक्तों के प्रेम एवं समर्पण को स्वीकार करते हैं।
803भक्तैकप्रेमभाषितॐ भक्तैकप्रेमभाषिताय नमः।Om Bhaktaikapremabhashitaya Namah।जो भक्तों के प्रेमपूर्ण वचनों से प्रसन्न होते हैं।
804भक्तैकप्रेमसन्तुष्टॐ भक्तैकप्रेमसन्तुष्टाय नमः।Om Bhaktaikapremasantushtaya Namah।जो भक्तों के निष्कपट प्रेम से संतुष्ट होते हैं।
805भक्तैकप्रेमतृप्तिमान्ॐ भक्तैकप्रेमतृप्तिमते नमः।Om Bhaktaikaprematruptimate Namah।जो भक्तों के प्रेम से पूर्णतः तृप्त रहते हैं।
806भक्तैकप्रेमवर्धितॐ भक्तैकप्रेमवर्धिताय नमः।Om Bhaktaikapremavardhitaya Namah।जो भक्तों के प्रेम को निरन्तर बढ़ाने वाले हैं।
807भक्तैकप्रेमसंवर्धिन्ॐ भक्तैकप्रेमसंवर्धिने नमः।Om Bhaktaikapremasamvardhine Namah।जो भक्तों के हृदय में दिव्य प्रेम को विकसित करते हैं।
808भक्तैकप्रेमसम्पन्नॐ भक्तैकप्रेमसम्पन्नाय नमः।Om Bhaktaikapremasampannaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम से पूर्णतः सम्पन्न हैं।
809भक्तैकप्रेमविग्रहॐ भक्तैकप्रेमविग्रहाय नमः।Om Bhaktaikapremavigrahaya Namah।जो भक्तों के दिव्य प्रेम के साक्षात् स्वरूप हैं।
810भक्तैकप्रेममूर्तिॐ भक्तैकप्रेममूर्तये नमः।Om Bhaktaikapremamurtaye Namah।जो परम भक्तिपूर्ण प्रेम की मूर्ति हैं।
811भक्तैकप्रेमसागरॐ भक्तैकप्रेमसागराय नमः।Om Bhaktaikapremasagaraya Namah।जो भक्तों के प्रेम के अनन्त महासागर हैं।
812भक्तैकप्रेमवारिधिॐ भक्तैकप्रेमवारिधये नमः।Om Bhaktaikapremavaridhaye Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम के अथाह समुद्र हैं।
813भक्तैकप्रेमरत्नाकरॐ भक्तैकप्रेमरत्नाकराय नमः।Om Bhaktaikapremaratnakaraya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम के अमूल्य रत्नों के भण्डार हैं।
814भक्तैकप्रेमनिधानॐ भक्तैकप्रेमनिधानाय नमः।Om Bhaktaikapremanidhanaya Namah।जो दिव्य भक्तिपूर्ण प्रेम के परम भण्डार हैं।
815भक्तैकप्रेमधामॐ भक्तैकप्रेमधाम्ने नमः।Om Bhaktaikapremadhamne Namah।जो भक्तों के दिव्य प्रेम का परम धाम हैं।
816भक्तैकप्रेममन्दिरॐ भक्तैकप्रेममन्दिराय नमः।Om Bhaktaikapremamandiraya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम का पवित्र मंदिर हैं।
817भक्तैकप्रेमालयॐ भक्तैकप्रेमालयाय नमः।Om Bhaktaikapremalayaya Namah।जो भक्तों के प्रेम का परम आश्रय हैं।
818भक्तैकप्रेमनिलयॐ भक्तैकप्रेमनिलयाय नमः।Om Bhaktaikapremanilayaya Namah।जो दिव्य प्रेम के निवासस्थान हैं।
819भक्तैकप्रेमाश्रयॐ भक्तैकप्रेमाश्रयाय नमः।Om Bhaktaikpremashrayaya Namah।जो भक्तों के प्रेम का एकमात्र आश्रय हैं।
820भक्तैकप्रेमगृहॐ भक्तैकप्रेमगृहाय नमः।Om Bhaktaikpremagrihaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम के पवित्र गृह के समान हैं।
821भक्तैकप्रेमस्थानॐ भक्तैकप्रेमस्थानाय नमः।Om Bhaktaikpremasthanaya Namah।जो भक्तों के दिव्य प्रेम का पवित्र स्थान हैं।
822भक्तैकप्रेमभूमिॐ भक्तैकप्रेमभूमये नमः।Om Bhaktaikpremabhumaye Namah।जो दिव्य प्रेम की पवित्र भूमि के समान हैं।
823भक्तैकप्रेमक्षेत्रॐ भक्तैकप्रेमक्षेत्राय नमः।Om Bhaktaikpremakshetraya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम के पवित्र क्षेत्र हैं।
824भक्तैकप्रेमतीर्थॐ भक्तैकप्रेमतीर्थाय नमः।Om Bhaktaikprematirthaya Namah।जिनका स्मरण एवं प्रेम पवित्र तीर्थ के समान है।
825भक्तैकप्रेमयज्ञॐ भक्तैकप्रेमयज्ञाय नमः।Om Bhaktaikpremayajnaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम के परम यज्ञ के स्वरूप हैं।
826भक्तैकप्रेमपूजितॐ भक्तैकप्रेमपूजिताय नमः।Om Bhaktaikpremapujitaya Namah।जिनकी भक्तिपूर्ण प्रेम से पूजा की जाती है।
827भक्तैकप्रेमाराधितॐ भक्तैकप्रेमाराधिताय नमः।Om Bhaktaikpremaradhitaya Namah।जिनकी भक्तिपूर्ण प्रेम से आराधना की जाती है।
828भक्तैकप्रेमसेवितॐ भक्तैकप्रेमसेविताय नमः।Om Bhaktaikpremasevitaya Namah।जिनकी भक्त प्रेमपूर्वक सेवा करते हैं।
829भक्तैकप्रेमनमस्कृतॐ भक्तैकप्रेमनमस्कृताय नमः।Om Bhaktaikpremanamaskritaya Namah।जिन्हें भक्त प्रेमपूर्वक प्रणाम करते हैं।
830भक्तैकप्रेमवन्दितॐ भक्तैकप्रेमवन्दिताय नमः।Om Bhaktaikpremavanditaya Namah।जिनकी भक्तिपूर्ण प्रेम से वन्दना की जाती है।
831भक्तैकप्रेमकीर्तितॐ भक्तैकप्रेमकीर्तिताय नमः।Om Bhaktaikpremakirtitaya Namah।जिनकी महिमा भक्त प्रेमपूर्वक गाते हैं।
832भक्तैकप्रेमस्मृतॐ भक्तैकप्रेमस्मृताय नमः।Om Bhaktaikpremasmritaya Namah।जिनका स्मरण भक्त प्रेमपूर्वक करते हैं।
833भक्तैकप्रेमध्यातॐ भक्तैकप्रेमध्याताय नमः।Om Bhaktaikpremadhyataya Namah।जिनका ध्यान भक्त प्रेमपूर्वक करते हैं।
834भक्तैकप्रेमचिन्तितॐ भक्तैकप्रेमचिन्तिताय नमः।Om Bhaktaikpremachintitaya Namah।जिनका चिन्तन भक्त प्रेमपूर्वक करते हैं।
835भक्तैकप्रेमभावितॐ भक्तैकप्रेमभाविताय नमः।Om Bhaktaikpremabhavitaya Namah।जो भक्तों के प्रेमपूर्ण भाव से प्रभावित होते हैं।
836भक्तैकप्रेमसिद्धिदॐ भक्तैकप्रेमसिद्धिदाय नमः।Om Bhaktaikpremasiddhidaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम की सिद्धि प्रदान करते हैं।
837भक्तैकप्रेममुक्तिदॐ भक्तैकप्रेममुक्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremamuktidaya Namah।जो प्रेममयी भक्ति द्वारा मुक्ति प्रदान करते हैं।
838भक्तैकप्रेमज्ञानदॐ भक्तैकप्रेमज्ञानदाय नमः।Om Bhaktaikpremajnanadaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम से आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं।
839भक्तैकप्रेमभक्तिदॐ भक्तैकप्रेमभक्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremabhaktidaya Namah।जो भक्तों को प्रेममयी भक्ति प्रदान करते हैं।
840भक्तैकप्रेमशक्तिदॐ भक्तैकप्रेमशक्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremashaktidaya Namah।जो दिव्य प्रेम एवं आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं।
841भक्तैकप्रेमसम्पत्तिदॐ भक्तैकप्रेमसम्पत्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremasampattidaya Namah।जो भक्तों को प्रेमरूपी आध्यात्मिक सम्पदा प्रदान करते हैं।
842भक्तैकप्रेमैश्वर्यदॐ भक्तैकप्रेमैश्वर्यदाय नमः।Om Bhaktaikpremaishvaryadaya Namah।जो दिव्य प्रेम का परम ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
843भक्तैकप्रेमानन्ददॐ भक्तैकप्रेमानन्ददाय नमः।Om Bhaktaikpremanandadaya Namah।जो भक्तों को प्रेम का परम आनन्द प्रदान करते हैं।
844भक्तैकप्रेमसौख्यदॐ भक्तैकप्रेमसौख्यदाय नमः।Om Bhaktaikpremasaukhyadaya Namah।जो भक्तों को प्रेममय सुख प्रदान करते हैं।
845भक्तैकप्रेमशान्तिदॐ भक्तैकप्रेमशान्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremashantidaya Namah।जो भक्तों को प्रेम के माध्यम से परम शान्ति प्रदान करते हैं।
846भक्तैकप्रेममङ्गलदॐ भक्तैकप्रेममङ्गलदाय नमः।Om Bhaktaikpremamangaladaya Namah।जो प्रेममयी भक्ति से मंगल एवं कल्याण प्रदान करते हैं।
847भक्तैकप्रेमपुण्यदॐ भक्तैकप्रेमपुण्यदाय नमः।Om Bhaktaikpremapunyadaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम से महान पुण्य प्रदान करते हैं।
848भक्तैकप्रेमधर्मदॐ भक्तैकप्रेमadharmadaya नमः।Om Bhaktaikpremadharmadaya Namah।जो प्रेममयी भक्ति द्वारा धर्म की स्थापना करते हैं।
849भक्तैकप्रेममोक्षदॐ भक्तैकप्रेममोक्षदाय नमः।Om Bhaktaikpremamokshadaya Namah।जो भक्तों को प्रेममयी भक्ति के द्वारा मोक्ष प्रदान करते हैं।
850भक्तैकप्रेमपरायणॐ भक्तैकप्रेमपरायणाय नमः।Om Bhaktaikpremaparayanaya Namah।जो भक्तों के दिव्य प्रेम में सदैव समर्पित रहते हैं।
851भक्तैकप्रेमतत्परॐ भक्तैकप्रेमतत्पराय नमः।Om Bhaktaikprematatparaya Namah।जो भक्तों के प्रेम के प्रति सदैव तत्पर रहते हैं।
852भक्तैकप्रेमनिरतॐ भक्तैकप्रेमनिरताय नमः।Om Bhaktaikpremanirataya Namah।जो भक्तों के प्रेम में निरन्तर लीन रहते हैं।
853भक्तैकप्रेमासक्तॐ भक्तैकप्रेमासक्ताय नमः।Om Bhaktaikpremasaktaya Namah।जो भक्तों के प्रेम में अत्यन्त अनुरक्त हैं।
854भक्तैकप्रेममग्नॐ भक्तैकप्रेममग्नाय नमः।Om Bhaktaikpremamagnaya Namah।जो भक्तों के प्रेम में पूर्णतः मग्न रहते हैं।
855भक्तैकप्रेमविह्वलॐ भक्तैकप्रेमविह्वलाय नमः।Om Bhaktaikpremavihvalaya Namah।जो भक्तों के प्रेम से भावविभोर हो जाते हैं।
856भक्तैकप्रेमोन्मत्तॐ भक्तैकप्रेमोन्मत्ताय नमः।Om Bhaktaikpremonmattaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम में परम आनन्द से उन्मत्त हैं।
857भक्तैकप्रेमविहारीॐ भक्तैकप्रेमविहारिणे नमः।Om Bhaktaikpremaviharine Namah।जो भक्तों के प्रेम में दिव्य विहार करते हैं।
858भक्तैकप्रेमक्रीडितॐ भक्तैकप्रेमक्रीडिताय नमः।Om Bhaktaikpremakriditaya Namah।जो भक्तों के प्रेम के साथ दिव्य क्रीड़ा करते हैं।
859भक्तैकप्रेमलीलामयॐ भक्तैकप्रेमलीलामयाय नमः।Om Bhaktaikpremalilamayaya Namah।जिनकी दिव्य लीलाएँ भक्तिपूर्ण प्रेम से परिपूर्ण हैं।
860भक्तैकप्रेमलीलाधरॐ भक्तैकप्रेमलीladharaya नमः।Om Bhaktaikpremaliladharaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं को धारण करने वाले हैं।
861भक्तैकप्रेमलीलाकरॐ भक्तैकप्रेमलीलाकराय नमः।Om Bhaktaikpremalilakaraya Namah।जो भक्तों के साथ प्रेमपूर्ण दिव्य लीलाएँ करते हैं।
862भक्तैकप्रेमलीलावान्ॐ भक्तैकप्रेमलीलावते नमः।Om Bhaktaikpremalilavate Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम की दिव्य लीलाओं से सम्पन्न हैं।
863भक्तैकप्रेमलीलामयॐ भक्तैकप्रेमलीलामयाय नमः।Om Bhaktaikpremalilamayaya Namah।जिनका सम्पूर्ण दिव्य स्वरूप प्रेममयी लीला से परिपूर्ण है।
864भक्तैकप्रेमलीलाप्रियॐ भक्तैकप्रेमलीलाप्रियाय नमः।Om Bhaktaikpremalilapriyaya Namah।जिन्हें भक्तों के साथ प्रेममयी लीला अत्यन्त प्रिय है।
865भक्तैकप्रेमलीलानन्दॐ भक्तैकप्रेमलीलानन्दाय नमः।Om Bhaktaikpremalilanandaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं से आनन्दित होते हैं।
866भक्तैकप्रेमलीलारसॐ भक्तैकप्रेमलीलारसाय नमः।Om Bhaktaikpremalilarasaya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम की दिव्य लीला-रस के स्वरूप हैं।
867भक्तैकप्रेमलीलामृतॐ भक्तैकप्रेमलीलामृताय नमः।Om Bhaktaikpremalilamritaya Namah।जिनकी प्रेममयी लीलाएँ अमृत के समान हैं।
868भक्तैकप्रेमलीलासारॐ भक्तैकप्रेमलीलासाराय नमः।Om Bhaktaikpremalilasāraya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम की दिव्य लीलाओं का सार हैं।
869भक्तैकप्रेमलीलातत्त्वॐ भक्तैकप्रेमलीलातत्त्वाय नमः।Om Bhaktaikpremalilatattvaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के परम तत्त्व हैं।
870भक्तैकप्रेमलीलारहस्यॐ भक्तैकप्रेमलीलारहस्याय नमः।Om Bhaktaikpremalilarahasyaya Namah।जो दिव्य प्रेमलीला के गूढ़ रहस्य के स्वरूप हैं।
871भक्तैकप्रेमलीलाविद्ॐ भक्तैकप्रेमलीलाविदे नमः।Om Bhaktaikpremalilavide Namah।जो भक्तिपूर्ण दिव्य लीलाओं के रहस्य को जानते हैं।
872भक्तैकप्रेमलीलाज्ञॐ भक्तैकप्रेमलीलाज्ञाय नमः।Om Bhaktaikpremalilajnaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के ज्ञाता हैं।
873भक्तैकप्रेमलीलाकर्ताॐ भक्तैकप्रेमलीलाकर्त्रे नमः।Om Bhaktaikpremalilakartre Namah।जो भक्तों के साथ प्रेमपूर्ण दिव्य लीलाएँ करने वाले हैं।
874भक्तैकप्रेमलीलाभर्ताॐ भक्तैकप्रेमलीलाभर्त्रे नमः।Om Bhaktaikpremalilabhartre Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं का पालन एवं संचालन करते हैं।
875भक्तैकप्रेमलीलाधिपॐ भक्तैकप्रेमलीलाधिपाय नमः।Om Bhaktaikpremaliladhipaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के अधिपति हैं।
876भक्तैकप्रेमलीलेश्वरॐ भक्तैकप्रेमलीलेश्वराय नमः।Om Bhaktaikpremalileshvaraya Namah।जो भक्तिपूर्ण प्रेम की दिव्य लीलाओं के परमेश्वर हैं।
877भक्तैकप्रेमलीलानायकॐ भक्तैकप्रेमलीलानायकाय नमः।Om Bhaktaikpremalilanayakaya Namah।जो दिव्य प्रेमलीलाओं के परम नायक हैं।
878भक्तैकप्रेमलीलापतिॐ भक्तैकप्रेमलीलापतये नमः।Om Bhaktaikpremalilapataye Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के स्वामी हैं।
879भक्तैकप्रेमलीलारमणॐ भक्तैकप्रेमलीलारमणाय नमः।Om Bhaktaikpremalilaramanaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं में आनन्दित होते हैं।
880भक्तैकप्रेमलीलारसिकॐ भक्तैकप्रेमलीलारसिकाय नमः।Om Bhaktaikpremalilarasikaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के रस का आस्वादन करते हैं।
881भक्तैकप्रेमलीलानन्ददॐ भक्तैकप्रेमलीलानन्ददाय नमः।Om Bhaktaikpremalilanandadaya Namah।जो भक्तों को दिव्य प्रेमलीला का आनन्द प्रदान करते हैं।
882भक्तैकप्रेमलीलासुखदॐ भक्तैकप्रेमलीलासुखदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilasukhadaya Namah।जो भक्तों को प्रेममयी लीलाओं का सुख प्रदान करते हैं।
883भक्तैकप्रेमलीलामोक्षदॐ भक्तैकप्रेमलीलामोक्षदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilamokshadaya Namah।जो दिव्य प्रेमलीला के माध्यम से मुक्ति प्रदान करते हैं।
884भक्तैकप्रेमलीलासिद्धिदॐ भक्तैकप्रेमलीलासिद्धिदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilasiddhidaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीला द्वारा आध्यात्मिक सिद्धि प्रदान करते हैं।
885भक्तैकप्रेमलीलाज्ञानदॐ भक्तैकप्रेमलीलाज्ञानदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilajnanadaya Namah।जो प्रेमलीला के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं।
886भक्तैकप्रेमलीलाभक्तिदॐ भक्तैकप्रेमलीलाभक्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilabhaktidaya Namah।जो भक्तों में प्रेममयी भक्ति को बढ़ाते हैं।
887भक्तैकप्रेमलीलाशक्तिदॐ भक्तैकप्रेमलीलाशक्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilashaktidaya Namah।जो दिव्य प्रेमलीला की आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं।
888भक्तैकप्रेमलीलासम्पत्तिदॐ भक्तैकप्रेमलीलासम्पत्तिदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilasampattidaya Namah।जो प्रेममयी लीला की आध्यात्मिक सम्पदा प्रदान करते हैं।
889भक्तैकप्रेमलीलैश्वर्यदॐ भक्तैकप्रेमलीलैश्वर्यदाय नमः।Om Bhaktaikpremalilaishvaryadaya Namah।जो भक्तों को दिव्य प्रेमलीला का ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
890भक्तैकप्रेमलीलानन्दॐ भक्तैकप्रेमलीलानन्दाय नमः।Om Bhaktaikpremalilanandaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के परम आनन्द के स्वरूप हैं।
891भक्तैकप्रेमलीलारत्नॐ भक्तैकप्रेमलीलारत्नाय नमः।Om Bhaktaikpremalilaratnaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीला के अमूल्य रत्न हैं।
892भक्तैकप्रेमलीलानिधिॐ भक्तैकप्रेमलीलानिधये नमः।Om Bhaktaikpremalilanidhaye Namah।जो दिव्य प्रेमलीला के परम भण्डार हैं।
893भक्तैकप्रेमलीलाधामॐ भक्तैकप्रेमलीलाधाम्ने नमः।Om Bhaktaikpremaliladhamne Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं का परम धाम हैं।
894भक्तैकप्रेमलीलालयॐ भक्तैकप्रेमलीलालयाय नमः।Om Bhaktaikpremalilalayaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं का आश्रय हैं।
895भक्तैकप्रेमलीलानिलयॐ भक्तैकप्रेमलीलानिलयाय नमः।Om Bhaktaikpremalilanilayaya Namah।जो दिव्य प्रेमलीला के निवासस्थान हैं।
896भक्तैकप्रेमलीलाश्रयॐ भक्तैकप्रेमलीलाश्रयाय नमः।Om Bhaktaikpremalilashrayaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के परम आश्रय हैं।
897भक्तैकप्रेमलीलागृहॐ भक्तैकप्रेमलीलागृहाय नमः।Om Bhaktaikpremalilagrihaya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के पवित्र गृह के समान हैं।
898भक्तैकप्रेमलीलास्थानॐ भक्तैकप्रेमलीलास्थानाय नमः।Om Bhaktaikpremalilasthanaya Namah।जो दिव्य प्रेमलीला का पवित्र स्थान हैं।
899भक्तैकप्रेमलीलाक्षेत्रॐ भक्तैकप्रेमलीलाक्षेत्राय नमः।Om Bhaktaikpremalilakshetraya Namah।जो प्रेममयी दिव्य लीलाओं के पवित्र क्षेत्र हैं।
900भक्तैकप्रेमलीलातीर्थॐ भक्तैकप्रेमलीलातीर्थाय नमः।Om Bhaktaikpremalilatirthaya Namah।जिनकी दिव्य प्रेमलीला स्वयं पवित्र तीर्थ के समान है।
No.NameMantra (Sanskrit)Roman TransliterationMeaning
901जगद्बन्धुॐ जगद्बन्धवे नमः।Om Jagadbandhave Namah।जो सम्पूर्ण जगत के सच्चे मित्र एवं बन्धु हैं।
902जगद्भ्राताॐ जगद्भ्रात्रे नमः।Om Jagadbhratre Namah।जो सम्पूर्ण जगत के भाई एवं हितैषी हैं।
903जगन्मित्रॐ जगन्मित्राय नमः।Om Jaganmitraya Namah।जो समस्त जगत के मित्र हैं।
904जगत्सखॐ जगत्सखाय नमः।Om Jagatsakhaya Namah।जो सम्पूर्ण सृष्टि के सखा एवं मित्र हैं।
905ब्रह्मण्यदेवॐ ब्रह्मण्यदेवाय नमः।Om Brahmanyadevaya Namah।जो ब्राह्मणों एवं धर्म के परम आराध्य देव हैं।
906ब्रह्मण्यॐ ब्रह्मण्याय नमः।Om Brahmanyaya Namah।जो ब्रह्मज्ञान एवं धर्म के संरक्षक हैं।
907ब्रह्मपादरजोदधत्ॐ ब्रह्मपादरजोदधते नमः।Om Brahmapadarajodadhate Namah।जो ब्राह्मणों के चरणों की धूल को आदरपूर्वक धारण करते हैं।
908ब्रह्मपादरजःस्पर्शीॐ ब्रह्मपादरजःस्पर्शिने नमः।Om Brahmapadarajasparshine Namah।जो ब्राह्मणों के चरणों की पवित्र धूल का स्पर्श करते हैं।
909ब्रह्मपादनिषेवकॐ ब्रह्मपादनिषेवकाय नमः।Om Brahmapadanisevakaya Namah।जो ब्राह्मणों के चरणों की सेवा करने वाले हैं।
910विप्राङ्घ्रिजलपूताङ्गॐ विप्राङ्घ्रिजलपूताङ्गाय नमः।Om Vipranghrijalaputangaya Namah।जो ब्राह्मणों के चरणोदक से अपने शरीर को पवित्र करते हैं।
911विप्रसेवापरायणॐ विप्रसेवापरायणाय नमः।Om Viprasevaparayanaya Namah।जो ब्राह्मणों की सेवा में सदैव समर्पित रहते हैं।
912विप्रमुख्यॐ विप्रमुख्याय नमः।Om Vipramukhyaya Namah।जो विद्वानों एवं ब्राह्मणों में श्रेष्ठ हैं।
913विप्रहितॐ विप्रहिताय नमः।Om Viprahitaya Namah।जो ब्राह्मणों एवं विद्वानों के हितकारी हैं।
914विप्रगीतमहाकथॐ विप्रगीतमहाकथाय नमः।Om Vipragitamahakathaya Namah।जिनकी महान कथाओं का ब्राह्मण एवं ऋषिगण गान करते हैं।
915विप्रपादजलार्द्राङ्गॐ विप्रपादजलार्द्राङ्गाय नमः।Om Viprapadajalardrangaya Namah।जो ब्राह्मणों के चरणोदक से पवित्र शरीर वाले हैं।
916विप्रपादोदकप्रियॐ विप्रपादोदकप्रियाय नमः।Om Viprapadodakapriyaya Namah।जिन्हें ब्राह्मणों का चरणोदक प्रिय है।
917विप्रभक्तॐ विप्रभक्ताय नमः।Om Viprabhaktaya Namah।जो ब्राह्मणों एवं विद्वानों के प्रति भक्तिभाव रखते हैं।
918विप्रगुरुॐ विप्रगुरवे नमः।Om Vipragurave Namah।जो ब्राह्मणों के भी गुरु एवं मार्गदर्शक हैं।
919विप्रॐ विप्राय नमः।Om Vipraya Namah।जो परम ज्ञान एवं आध्यात्मिक प्रकाश के स्वरूप हैं।
920विप्रपदानुगॐ विप्रपदानुगाय नमः।Om Viprapadanugaya Namah।जो ब्राह्मणों के धर्ममार्ग का अनुसरण करने वाले हैं।
921अक्षौहिणीवृतॐ अक्षौहिणीवृताय नमः।Om Akshauhinivritaya Namah।जो विशाल अक्षौहिणी सेना से घिरे हुए हैं।
922योद्धाॐ योद्ध्रे नमः।Om Yoddhre Namah।जो महान एवं पराक्रमी योद्धा हैं।
923प्रतिमापञ्चसंयुतॐ प्रतिमापञ्चसंयुताय नमः।Om Pratimapanchasamyutaya Namah।जो पाँच दिव्य स्वरूपों से युक्त हैं।
924चतुरॐ चतुराय नमः।Om Chaturaya Namah।जो बुद्धिमान, कुशल एवं निपुण हैं।
925अङ्गिरस्ॐ अङ्गिरसे नमः।Om Angirase Namah।जो अङ्गिरस ऋषि की दिव्य परम्परा से सम्बद्ध हैं।
926पद्मवर्तीॐ पद्मवर्तिने नमः।Om Padmavartine Namah।जिनका स्वरूप कमल के समान पवित्र एवं सुन्दर है।
927सामन्तोद्धृतपादुकॐ सामन्तोद्धृतपादुकाय नमः।Om Samantoddhritapadukaya Namah।जिनकी चरण-पादुकाओं का महान सम्मान किया जाता है।
928गजकोटिप्रयायीॐ गजकोटिप्रयायिने नमः।Om Gajakotiprayayine Namah।जो करोड़ों हाथियों के समान शक्तिशाली हैं।
929रथकोटिजयध्वजॐ रथकोटिजयध्वजाय नमः।Om Rathakotijayadhvajaya Namah।जिनका विजय-ध्वज असंख्य रथों पर फहराता है।
930महारथॐ महारथाय नमः।Om Maharathaya Namah।जो महान रथी एवं श्रेष्ठ योद्धा हैं।
931अतिरथॐ अतिरथाय नमः।Om Atirathaya Namah।जो अकेले अनेक योद्धाओं का सामना कर सकते हैं।
932जैत्रॐ जैत्राय नमः।Om Jaitraya Namah।जो सदैव विजय प्राप्त करने वाले हैं।
933स्यन्दनमास्थितॐ स्यन्दनमास्थिताय नमः।Om Syandanamasthitaya Namah।जो विजयी दिव्य रथ पर विराजमान हैं।
934नारायणास्त्रीॐ नारायणास्त्रिणे नमः।Om Narayanastrine Namah।जो नारायणास्त्र के ज्ञाता एवं धारक हैं।
935ब्रह्मास्त्रीॐ ब्रह्मास्त्रिणे नमः।Om Brahmastrine Namah।जो ब्रह्मास्त्र के ज्ञाता एवं धारक हैं।
936रणश्लाघीॐ रणश्लाघिने नमः।Om Ranashlaghine Namah।जो युद्धभूमि में अपने पराक्रम के लिए प्रसिद्ध हैं।
937रणोद्भटॐ रणोद्भटाय नमः।Om Ranodbhataya Namah।जो युद्ध में अत्यन्त उग्र एवं पराक्रमी हैं।
938मदोत्कटॐ मदोत्कटाय नमः।Om Madotkataya Namah।जो अत्यन्त प्रचण्ड एवं शक्तिशाली हैं।
939युद्धवीरॐ युद्धवीराय नमः।Om Yuddhaviraya Namah।जो महान युद्धवीर हैं।
940देवासुरभयङ्करॐ देवासुरभयङ्कराय नमः।Om Devasurabhayankaraya Namah।जिनसे देवता और असुर दोनों भयभीत होते हैं।
941करिकर्णमरुत्प्रेजत्कुन्तलव्याप्तकुण्डलॐ करिकर्णमरुत्प्रेजत्कुन्तलव्याप्तकुण्डलाय नमः।Om Karikarnamarutprejatkuntalavyaptakundalaya Namah।जिनके केश एवं कुण्डल दिव्य गति से शोभायमान हैं।
942अग्रगॐ अग्रगाय नमः।Om Agragaya Namah।जो सबसे आगे चलने वाले एवं मार्गदर्शक हैं।
943वीरसंमर्दॐ वीरसंमर्दाय नमः।Om Virasammardaya Namah।जो महान योद्धाओं को परास्त करने वाले हैं।
944मर्दलॐ मर्दलाय नमः।Om Mardalaya Namah।जो शत्रुओं की शक्ति को कुचलने वाले हैं।
945रणदुर्मदॐ रणदुर्मदाय नमः।Om Ranadurmadaya Namah।जिनका युद्ध-पराक्रम अत्यन्त प्रचण्ड है।
946भटॐ भटाय नमः।Om Bhataya Namah।जो वीर एवं निर्भीक योद्धा हैं।
947प्रतिभटॐ प्रतिभटाय नमः।Om Pratibhataya Namah।जो प्रत्येक प्रतिद्वन्द्वी का सामना करने में समर्थ हैं।
948प्रोच्यॐ प्रोच्याय नमः।Om Prochyaya Namah।जो महान स्तुति एवं सम्मान के योग्य हैं।
949बाणवर्षीॐ बाणवर्षिणे नमः।Om Banavarshine Namah।जो युद्ध में बाणों की वर्षा करते हैं।
950सुतोयदॐ सुतोयदाय नमः।Om Sutoyadaya Namah।जो वर्षा करने वाले मेघ के समान हैं।
951खड्गखण्डितसर्वाङ्गॐ खड्गखण्डितसर्वाङ्गाय नमः।Om Khadgakhanditasarvangaya Namah।जो खड्ग द्वारा शत्रुओं का संहार करने वाले हैं।
952षोडशाब्दॐ षोडशाब्दाय नमः।Om Shodashabdaya Namah।जो सोलह वर्ष के युवा एवं तेजस्वी स्वरूप वाले हैं।
953षडक्षरॐ षडक्षराय नमः।Om Shadaksharaya Namah।जो पवित्र षडक्षर मन्त्र के स्वरूप हैं।
954वीरघोषॐ वीरघोषाय नमः।Om Viraghoshaya Namah।जिनकी वीर गर्जना अत्यन्त प्रभावशाली है।
955क्लिष्टवपुॐ क्लिष्टवपवे नमः।Om Klishtavapave Namah।जिनका शरीर महान शक्ति एवं सहनशीलता से युक्त है।
956वज्राङ्गॐ वज्राङ्गाय नमः।Om Vajrangaya Namah।जिनके अंग वज्र के समान दृढ़ हैं।
957वज्रभेदनॐ वज्रभेदनाय नमः।Om Vajrabhedanaya Namah।जो वज्र जैसी कठोर शक्ति को भी भेद सकते हैं।
958रुग्णवज्रॐ रुग्णवज्राय नमः।Om Rugnavajraya Namah।जो शत्रुओं के वज्र जैसी अस्त्र-शक्ति को नष्ट करते हैं।
959भग्नदण्डॐ भग्नदण्डाय नमः।Om Bhagnadandaya Namah।जो अन्याय के दण्ड एवं अत्याचार को तोड़ने वाले हैं।
960शत्रुनिर्भर्त्सनोद्यतॐ शत्रुनिर्भर्त्सनोद्यताय नमः।Om Shatrunirbhartsanodyataya Namah।जो शत्रुओं का दमन करने के लिए सदैव तत्पर हैं।
961अट्टहासॐ अट्टहासाय नमः।Om Attahasaya Namah।जिनकी प्रचण्ड हँसी अत्यन्त प्रभावशाली है।
962पट्टधरॐ पट्टधराय नमः।Om Pattadharaya Namah।जो रेशमी एवं राजसी वस्त्र धारण करते हैं।
963पट्टराज्ञीपतिॐ पट्टराज्ञीपतये नमः।Om Pattarajnipataye Namah।जो राजमहिषी के स्वामी हैं।
964पटुॐ पटवे नमः।Om Patave Namah।जो बुद्धिमान एवं सभी कार्यों में कुशल हैं।
965कालॐ कालाय नमः।Om Kalaya Namah।जो स्वयं काल एवं समय के स्वरूप हैं।
966पटहवादित्रॐ पटहवादित्राय नमः।Om Patahavaditraya Namah।जिनकी विजय में पटह एवं दिव्य वाद्यों की ध्वनि गूँजती है।
967हुंकारॐ हुङ्काराय नमः।Om Hunkaraya Namah।जिनकी हुंकार अत्यन्त शक्तिशाली है।
968गर्जितस्वनॐ गर्जितस्वनाय नमः।Om Garjitasvanaya Namah।जिनकी आवाज मेघ की गर्जना के समान गम्भीर है।
969साधुॐ साधवे नमः।Om Sadhave Namah।जो पवित्र, सदाचारी एवं धर्मनिष्ठ हैं।
970भक्तपराधीनॐ भक्तपराधीनाय नमः।Om Bhaktaparadhinaya Namah।जो अपने भक्तों के प्रेम से सहज ही बंध जाते हैं।
971स्वतन्त्रॐ स्वतन्त्राय नमः।Om Svatantraya Namah।जो पूर्णतः स्वतंत्र एवं स्वाधीन हैं।
972साधुभूषणॐ साधुभूषणाय नमः।Om Sadhubhushanaya Namah।जो संतों के सद्गुणों से सुशोभित हैं।
973अस्वतन्त्रॐ अस्वतन्त्राय नमः।Om Asvatantraya Namah।जो भक्तों के प्रेम के कारण उनके प्रति समर्पित रहते हैं।
974साधुमयॐ साधुमयाय नमः।Om Sadhumayaya Namah।जिनका स्वरूप संतों के सद्गुणों से परिपूर्ण है।
975साधुग्रस्तमनॐ साधुग्रस्तमनसे नमः।Om Sadhugrastamanase Namah।जिनका मन सदैव अपने भक्तों एवं संतों में लगा रहता है।
976मनाक्ॐ मनाके नमः।Om Manake Namah।जो अत्यन्त सूक्ष्म एवं विनम्र भाव से भक्तों की ओर आकर्षित हैं।
977साधुप्रियॐ साधुप्रियाय नमः।Om Sadhupriyaya Namah।जो संतों एवं सज्जनों को अत्यन्त प्रिय हैं।
978साधुधनॐ साधुधनाय नमः।Om Sadhudhanaya Namah।जो संतों एवं भक्तों को अपना अमूल्य धन मानते हैं।
979साधुज्ञातिॐ साधुज्ञातये नमः।Om Sadhujnataye Namah।जो संतों एवं सज्जनों के आत्मीय हैं।
980सुधाघनॐ सुधाघनाय नमः।Om Sudhaghanaya Namah।जो अमृत से भरे मेघ के समान कृपामय हैं।
981साधुचारीॐ साधुचारिणे नमः।Om Sadhucharine Namah।जो संतों एवं भक्तों के बीच विचरण करते हैं।
982साधुचित्तॐ साधुचित्ताय नमः।Om Sadhuchittaya Namah।जिनका हृदय पवित्र एवं संतस्वरूप है।
983साधुवासीॐ साधुवासिने नमः।Om Sadhuvasine Namah।जो संतों एवं भक्तों के बीच निवास करते हैं।
984शुभास्पदॐ शुभास्पदाय नमः।Om Shubhaspadaya Namah।जो समस्त शुभता एवं मंगल के परम आधार हैं।


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Every spiritual journey is unique. Every divine moment holds the power to inspire countless hearts. Through “Share Your Spiritual Experiences,” you can tell the world about the blessings, miracles, and sacred moments that have touched your life. Whether it is a peaceful meditation insight, a temple darshan that moved you, a dream with divine guidance, a life-changing blessing, or a powerful moment of devotion—your story can bring hope, faith, and positivity to many seekers. You can share: Personal spiritual experiences Miracles or blessings you witnessed Temple visits & divine encounters Moments of deep meditation or awakening Stories that strengthened your faith Why Share Your Experiences? Inspire thousands of devotees across the world Spread positivity and strengthen someone’s faith Become a part of our global spiritual community Contribute to the collective wisdom of seekers Help others feel connected, supported, and uplifted Your story matters. Your experience can become someone’s source of strength and hope. ✨ Share Your Spiritual Experiences and let your journey light the path for others.


    Supported: PDF, Excel, Word, JPG, PNG — Max 10 MB

    Some spiritual moments are so powerful that they deserve to be seen, felt, and experienced by many. Through “Share Your Divine Video Experiences,” you can upload videos capturing your sacred journeys, temple visits, miracles, blessings, rituals, or moments of deep devotion. Your videos have the power to spread positivity, awaken faith, and inspire thousands of devotees around the world. You can share videos of: Temple darshans & aartis Special rituals, festivals & celebrations Divine moments during yatras or pilgrimages Personal spiritual experiences or blessings Miraculous events or heart-touching stories Why Share Your Divine Videos? Let others experience sacred moments visually Inspire devotees with real spiritual experiences Contribute to India’s digital devotional library Spread peace, faith, and divine vibrations Help preserve rare rituals and traditions Your divine moments can uplift many hearts. Let your video become a light for others. ✨ Share Your Divine Video Experiences and let the world feel the grace you witnessed.
    Have a question, suggestion, or something you’d like to share? We’re here to listen. Whether it’s feedback, spiritual queries, collaboration ideas, or support-related messages—simply reach out and write to us. Your thoughts matter, and we’re always happy to connect with you. ✨ Just write to us, and we’ll get back to you with love, support, and guidance.

    सर्वं खल्विदं ब्रह्म

    अहं ब्रह्मास्मि

    ब्रह्मैव भवति

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